Tax Compliance Drive: सरकार की कमाई बढ़ाने और टैक्स चोरी करने वालों पर सख्ती करने के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने अब तक का सबसे बड़ा प्लान बनाया है. दरअसल इस बार टैक्स डिपार्टमेंट कम अमाउंट के टैक्स देने वालों के पीछे नहीं पड़ेगा, बल्कि उन 10 हजार बड़े मामलों पर कार्रवाई करेगा, जिन पर सरकार का बहुत ज्यादा टैक्स बकाया है. यानी अब डिपार्टमेंट का फोकस बड़े पेंडिंग चल रहे बड़े अमाउंट के टैक्स पर रहेगा.
क्या है CBDT का मास्टर प्लान?
आयकर विभाग ने टैक्स कंप्लायंस ड्राइव शुरू की है, जिससे जो टैक्स पहले तय हो चुका है, लेकिन अभी तक जमा नहीं हुआ, उसे वसूला जा सके. ये अमाउंट बहुत बड़ा है, करीब 2.57 लाख करोड़ रुपये. इसके लिए डिपार्टमेंट ने 10 हजार ऐसे बड़े मामलों को चुना है, जहां टैक्स देना था, लेकिन किसी वजह से पैसा अब तक नहीं आया. अब सरकार उसी रुके हुए पैसे को वापस लेना चाहती है.
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क्यों पड़ी इस बड़े एक्शन की जरूरत?
भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और इस ग्रोथ रेट को बनाए रखने के लिए सरकार को रेवेन्यू की जरूरत है. दूसरी तरफ पिछले कुछ सालों में टैक्स एरियर (Tax Arrears) के अमाउंट का ग्राफ लगातार ऊपर गया है. कई मामलों में केस चल रहे हैं, तो कई जगहों पर टैक्सपेयर्स ने पेमेंट में ढिलाई की है. अब टैक्स डिपार्टमेंट इन हाई-वैल्यू मामलों को सबसे पहले सुलझाएगा.
कैसे होगी वसूली?
टैक्स डिपार्टमेंट ने इस टैक्स कंप्लायंस ड्राइव के लिए तीन स्टेप्स पर काम कर रहा है. पहला, जिन 10 हजार बड़े मामलों से पैसा आना है, उन पर बड़े अधिकारी खुद नजर रख रहे हैं और हर हफ्ते देखते हैं कि मामला कहां तक पहुंचा. दूसरा, जिन मामलों में टैक्स की रकम कोर्ट या ट्रिब्यूनल में फंसी हुई है, उन्हें जल्दी सुलझाने की कोशिश की जा रही है. तीसरा, डिजिटल तरीके अपनाए जा रहे हैं, जिसमें कंप्यूटर के साथ एआई की मदद से टैक्स ना देने वालों की संपत्ति पर नजर रखी जा रही है, जिससे बकाया टैक्स जल्दी लिया जा सके.
अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
अगर टैक्स डिपार्टमेंट इस 2.57 लाख करोड़ रुपये को वसूल लेता है तो ये भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बूस्टर डोज साबित हो सकता है. इस पैसे का इस्तेमाल इंफ्रा, एजुकेशन, हेल्थ और दूसरी योजनाओं में हो सकेगा.
अब बकायेदारों के पास क्या रास्ता?
एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार की सख्ती के बाद बकायेदारों के पास अभी भी समाधान का रास्ता है. वो विवाद से विश्वास जैसी सरकारी योजना के जरिए अपना टैक्स मामला समझौते से खत्म कर सकते हैं. सरकार चाहती है कि लोग आपस में बात करके टैक्स विवाद सुलझाएं. लेकिन जो लोग जानबूझकर टैक्स नहीं दे रहे हैं और बार‑बार टाल रहे हैं, उनके लिए आगे मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
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