अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते की वजह से कच्चे तेल की कीमतें लगातार नीचे आ रही हैं. क्रूड ऑयल हल्की तेजी के साथ 71.61 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. जब कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं थी तब दुनियाभर के बाजारों में रोजमर्रा के सामानों से लेकर खाने-पीने की चीजें महंगी हो चली थीं. भारत भी इस संकट से बच नहीं पाया था. अब एक सवाल आम नागरिक के दिमाग में आ रहा है कि जब कच्चे तेल की कीमतें अपने पुराने भाव पर लौट आई हैं तो क्या देश की एफएमसीजी कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स को पहले वाली कीमतों पर ले जाएंगी? रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) की अभी हाल में जारी हुई रिपोर्ट से इस सवाल के जवाब को समझने की कोशिश करते हैं.
कच्चा तेल तो सस्ता पर एग्री प्रोडक्ट्स ने बिगाड़ा खेल
रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) की रिपोर्ट के अनुसार अगर आप उम्मीद कर रहे हैं कि इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल सस्ता होने से आपके घर के बजट को राहत मिलेगी, तो आपको थोड़ा झटका लग सकता है. रिपोर्ट कहती है कि कच्चे तेल के सस्ता होने से कच्चा माल जैसे, पैकेजिंग मैटेरियल और लीनियर अल्काइल बेंजीन की कीमतें नीचे आई हैं. इससे मौजूदा वित्त वर्ष में कंपनियों का ग्रोस मार्जिन बढ़ेगा. लेकिन अब मामला यही फंसा है. कच्चा माल तो सस्ता हो रहा है पर दूसरी तरफ पाम ऑयल के साथ एग्री बेस्ड चीजें जैसे कॉफी, कोको और गेंहूं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. अब जब साबुन से लेकर बिस्किट में पाम ऑयल का इस्तेमाल होता है तो एक तरफ मिली राहत को दूसरी महंगाई ने बराबर कर दिया है.
प्री कोविड के समय से कम बढ़ेगा मुनाफा
इक्रा (ICRA) के कॉर्पोरेट रेटिंग्स सेक्टर हेड और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट शमशेर दीवान के अनुसार, गांव और शहर दोनों जगह डिमांड में इजाफा हुआ है. उम्मीद है कि पर्सनल केयर के साथ होम केयर और ओरल केयर सेक्टर्स में सेल बढ़ेगी. इसके अलावा एफएमसीजी कंपनियों के ग्रॉस मार्जिन में 0.5% से 1% तक की पॉजिटिव ग्रोथ आ सकती है. हालांकि ये ग्रोथ अभी कोरोना समय से पहले से कम है. वहीं, एग्री प्रोडक्ट्स की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव से कंपनियां अलर्ट मोड पर हैं.
कंपनियां जमकर कर रहीं एडवर्टाइजमेंट
एल नीनो की वजह से देश में गर्मी चरम पर है, नतीजन आइसक्रीम के साथ बेवरेजेस और गर्मियों के पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स की सेल में रफ्तार दिखी है. ऐसे में अब कंपनियां नए प्रोडक्ट्स को प्रमोट के लिए एडवर्टाइजमेंट पर जमकर पैसा लगा रही हैं. इक्रा के अनुसार इस बड़े खर्च की वजह से कंपनियों का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 21.5% से 22% पर बना रह सकता है. रिपोर्ट से साफ पता चल रहा है कि प्रॉफिट बढ़ाने के चक्कर में कंपनियां ग्राहकों के लिए दाम शायद ही कम करने के मूड में आएं.
आगे कैसी रह सकती है स्थिति?
वित्त वर्ष 2027 के लिए इक्रा ने कंपनियों के आउटलुक को स्टेबल रखा है. साथ ही बताया कि कंपनियों की बैलेंस शीट मजबूत है. लोन कम है और लगातार कैपेक्स पर निवेश हो रहा है. इससे मैन्युफैक्चरिंग के साथ लॉजिस्टिक्स मजबूत होगा. ऐसे में अगर इस साल मानसून देशभर में अच्छा रहता है तो गांव के साथ शहरों में डिमांड और बढ़ती दिख सकती है.
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