Delhi Liquor Market: दिल्ली में शराब के बाजार का एक विवाद देश की सबसे बड़ी निष्पक्ष बिजनेस रेगुलेटर्स CCI यानी भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की दहलीज पर जा पहुंची है. मामला किसी छोटी-मोटी रंजिश का नहीं, बल्कि दुनिया की दिग्गज शराब कंपनी पर्नोड रिकार्ड (Pernod Ricard) पर लगे उन आरोपों का है, जिसने पूरी इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है. कंपनी पर अपने ब्रैंड को बढ़ावा देने और कंपटीटर्स कंपनियों की शराब की बिक्री प्रभावित करने के लिए गलत तरीके अपनाने के आरोप लग हैं. आरोप है कि इसके लिए कंपनी ने दिल्ली के रिटलर्स को अतिरिक्त सुविधाएं दी. करोडों रुपये के फंड जैसी पेशकश की और इसके जरिये शराब की खुदरा दुकानों पर केवल अपने ब्रैंड्स की शराब देखना चाहा.
'फ्रेंच कंपनी' की वो चाल
आरोप है कि इस फ्रांसीसी शराब समूह ने दिल्ली के रिटेलर्स के साथ मिलकर एक ऐसा 'एक्सक्लूसिव' ताना-बाना बुना, जिसका मकसद सिर्फ और सिर्फ अपना माल बेचना और प्रतिस्पर्धियों को किनारे करना था. CCI ने अपनी शुरुआती जांच में पाया है कि पर्नोड रिकार्ड ने दिल्ली के 'इंडियन मेड फॉरेन लिकर' (IMFL) सेगमेंट में अपनी धाक जमाने के लिए नियमों के साथ कथित तौर पर खिलवाड़ किया है.
200 करोड़ की 'गारंटी' और शेल्फ पर कब्जा
कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट साल 2021 की उस आबकारी नीति के दौरान आता है, जब पर्नोड रिकार्ड ने कथित तौर पर दिल्ली के शराब विक्रेताओं को बैंक लोन और लाइसेंस दिलाने के लिए 200 करोड़ रुपये (करीब 23 मिलियन यूरो) की कॉर्पोरेट गारंटी दी थी.
लेकिन आरोप है कि ये 'मदद' निस्वार्थ नहीं थी. शिकायत के मुताबिक, जिन रिटेलर्स को ये वित्तीय मदद मिली, उन्हें इसके बदले में अपनी दुकानों के शेल्फ पर पर्नोड रिकार्ड के ब्रांड्स (जैसे चिवास रीगल और एब्सोल्यूट वोदका) को प्रमुखता से दिखाना था. साथ ही प्रतिद्वंद्वी ब्रांड्स के स्टॉक और बिक्री को सीमित करना था.
CCI ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि प्रतिस्पर्धी उत्पादों को रोकने से बाजार में मांग का स्वरूप बिगड़ने की संभावना है, जिससे उपभोक्ताओं की पसंद सीमित हो जाती है.
इंटरनल ईमेल से खुला 'रणनीति' का राज!
नियामक ने कंपनी के उन आंतरिक संचार (Internal Communications) का भी हवाला दिया है, जिनमें कंपनी के अधिकारी कथित तौर पर लाइसेंस की बोली लगाने वाले रिटेलर्स को वित्तीय सहायता देकर दिल्ली के रिटेल जोन में 'रणनीतिक बढ़त' (Strategic Advantage) हासिल करने पर चर्चा कर रहे थे.
टेंडर और बिड रिगिंग का खेल
मामला सिर्फ रिटेल तक सीमित नहीं रहा है. CCI 2022-23 में दिल्ली आबकारी विभाग की ओर से देसी शराब की थोक आपूर्ति के लिए जारी टेंडर में 'बिड रिगिंग' (Bid Rigging) यानी बोली में हेराफेरी के आरोपों की भी जांच कर रहा है. आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान दो बोलीदाताओं ने कोलुसिव प्रैक्टिस (Collusive Practice) के तहत अपने वित्तीय कोट्स का खुलासा कर दिया था, जिसके चलते विभाग को टेंडर रद्द करना पड़ा था.
90 दिन में जांच रिपोर्ट
भरोसे के इस सवाल पर मचे बवाल के बाद, CCI ने अपने महानिदेशक (DG) को मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं. जांच टीम को 90 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी. जांच के दायरे में पर्नोड रिकार्ड के साथ-साथ इंडो स्पिरिट्स, पाथवे एचआर सॉल्यूशंस, यूनिवर्सल डिस्ट्रीब्यूटर्स, खाओ गली, बबली बेवरेजेस, शिव एसोसिएट्स और ऑर्गेनोमिक्स इकोसिस्टम जैसी यूनिट्स भी रहेंगी. जांच की ये आंच दिल्ली के शराब बाजार को भी प्रभावित कर सकती है.
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