8th CPC Pune Meeting: देश के 49 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनर्स की सैलरी-पेंशन, भत्ते और अन्य सेवा शर्तों के लिए 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) सिफारिशें तैयार करने में लगा है. इस क्रम में दिल्ली और देहरादून के बाद महाराष्ट्र के पुणे में आयोग की मीटिंग हो रही है. जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले आयोग ने 4 मई को कर्मचारी-पेंशनर्स से जुड़े कई संगठनों से बात की और आज 5 मई को भी चर्चा चल रही है. पुणे में चल रही इस मीटिंग से बड़ा अपडेट सामने आया है. महाराष्ट्र राज्य जुनी पेंशन संगठन (Maharashtra State Old Pension Organization) के सदस्यों ने आयोग की चेयरपर्सन जस्टिस देसाई, सदस्य सचिव पंकज जैन और अन्य सदस्यों के साथ मीटिंग में शामिल हुए और मिनिमम बेसिक सैलरी, पेंशन, फिटमेंट फैक्टर, HRA, TA, ग्रेच्युटी समेत कई मुद्दों पर सुझाव दिए. MSOPO के सोशल मीडिया हेड विनायक चौथे के मुताबिक, संगठन को उम्मीद है कि उनके सुझावों को वेतन आयोग अपनी सिफारिशों में शामिल करेगा.
सैलरी, पेंशन, ग्रेच्युटी समेत 16 विषयों पर हुई बात
महाराष्ट्र राज्य जुनी पेंशन संगठन की प्रमुख मांगों में ओल्ड पेंशन स्कीम की वापसी बड़ मुद्दा है. इसके अलावा 3.8 फिटमेंट फैक्टर, 5 फैमिली यूनिट फॉर्मूला, न्यूनतम वेतन 65,000 रुपये, HRA दरों में वृद्धि और HRA की विसंगतियां दूर करने, ग्रेच्युटी बढ़ाने, पेंशन सुधार, स्पेशल सैलरी इंक्रीमेंट की बहाली, शिक्षकों के लिए 10,20,30 फॉर्मूला लागू करना समेत 16 प्रमुख विषयों पर बातें हुईं. संगठन ने PPT के माध्यम से आयोग के समक्ष प्रेंजेंटेशन दिया और 8वें वेतन आयोग में इन सुझावों को शामिल किए जाने की मांग की. संगठन के स्टेट प्रेसिडेंट वितेश खांडेकर ने बताया कि आयोग ने सभी बिंदुओं को सुना और विषयों को गंभीरता से दर्ज किया. आइए जानते हैं संगठन ने किस मुद्दे पर क्या सुझाव दिए हैं.
1). न्यूनतम वेतन 65,000 रुपये की मांग
वर्तमान न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये से बढ़ाकर 65,000 रुपये किया जाए, यह मांग भी की गई.
2). फिटमेंट फैक्टर 3.8 की मांग
वेतन आयोग पर सबसे अधिक प्रभाव डालने वाला मुद्दा फिटमेंट फैक्टर है. 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था, जिसे अब बढ़ाकर 3.8 करने की मांग की गई.
3). फैमिली यूनिट में 3 के बजाय 5 सदस्य
न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर निर्धारित करते समय फैमिली यूनिट एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, इसलिए वर्तमान फैमिली यूनिट की अवधारणा में माता-पिता को शामिल कर 5 सदस्यों की फैमिली यूनिट मानी जाए, यह मुद्दा रखा गया.

4). DA की न्यूनतम वृद्धि का निर्धारण
वर्तमान में DA वृद्धि की दर कम होने के कारण बढ़ती महंगाई के अनुपात में सही वृद्धि नहीं हो पा रही है, इसलिए आयोग स्वयं ही डिफॉल्ट रूप से 4% न्यूनतम DA वृद्धि दर निश्चित करे, यह मांग की गई.
5). HRA दरों में सुधार और बढ़ोतरी
7वें वेतन आयोग में HRA की दरें महंगाई भत्ते (DA) से जुड़ी थीं. शहरों के प्रकार के अनुसार ये दरें 10%, 20%, 30% होती हैं, लेकिन 7वें वेतन आयोग में ये दरें DA के 50% पार करने पर मिलीं. शुरू में ये 8, 16, 24 थीं.
संगठन ने मांग की कि 8वें वेतन आयोग में शुरुआत से ही बढ़ी हुई दरों पर HRA मिले और इसे DA से लिंक न किया जाए, क्योंकि DA लिंक होने से कर्मचारियों को प्रतिमाह 2 से 6 हजार रुपये का नुकसान होता है.
आयोग ने इस पर सहमति जताई कि 8वें वेतन आयोग में ऐसा नहीं होगा. साथ ही, HRA दरों को 10%, 20%, 30% से बढ़ाकर क्रमशः 12%, 24%, 36% करने की मांग की गई, जिसे आयोग ने गंभीरता से नोट किया.

6). यात्रा भत्ता (TA) में वृद्धि:
6वें वेतन आयोग की तरह अब भी यात्रा भत्ते में 2.5 गुना वृद्धि की मांग की गई.
7). कठिन क्षेत्रों के लिए विशेष प्रोत्साहन भत्ते में वृद्धि हो.
8). वार्षिक वेतन वृद्धि 3% से बढ़ाकर 5% करना.
9). शिक्षकों को भी 10,20,30 सुनिश्चित प्रगति योजना लागू की जाए:
संगठन ने ध्यान दिलाया कि शिक्षकों को छोड़कर सभी कर्मचारियों को यह योजना लागू है, जबकि शिक्षकों के लिए अभी भी पुरानी योजनाएं लागू हैं जो उनके साथ भेदभाव है. आयोग ने इस पर सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया.
10). प्रमोशन में 10,20,30 या 12,24,36 योजना की वेतन विसंगतियां दूर हों
10 वर्ष की सेवा के बाद पदोन्नति के समय वेतन वृद्धि न मिलने की बात साक्ष्यों के साथ आयोग के सामने रखी गई, जिसे वहां मौजूद आयोग के सदस्यों ने भी स्वीकार किया. संगठन ने ऐसे मामलों में अगले स्तर पर वेतन निर्धारण की मांग की.
11). विशेष वेतन वृद्धि योजना पुनः शुरू करना
उत्कृष्ट कार्य के लिए 5वें वेतन आयोग की इस योजना को, जो 6वें आयोग से बंद थी, 8वें वेतन आयोग में फिर से शुरू करने की मांग की गई.

12). पेंशन रिफॉर्म्स: प्रमुख बिंदु
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करना: देश के 85 लाख NPS कर्मचारियों के लिए OPS की जोरदार मांग की गई. आयोग ने इसे सरकार का नीतिगत निर्णय बताते हुए सावधानीपूर्वक प्रतिक्रिया दी.
- OPS योजना में आवश्यक बदलाव: सेवा के दौरान मृत्यु होने पर मिलने वाली फैमिली पेंशन की दर (जो 10 साल बाद 30% हो जाती है) को अंत तक 50% रखने और बढ़ी हुई पेंशन (20% वृद्धि) को 80 वर्ष के बजाय 75 वर्ष की आयु से शुरू करने की मांग की गई.
- UPS योजना की विसंगतियां: संगठन ने समझाया कि UPS में कई कमियां हैं, जैसे पेंशन गारंटी के बदले 10% अंशदान वापस न करना और फैमिली पेंशन में भेदभाव. इन मुद्दों पर आयोग ने चिंता व्यक्त की और सहमति जताई.
- NPS योजना की कमियां: शेयर बाजार आधारित होने के कारण इसमें रिटर्न की गारंटी नहीं है, इसलिए न्यूनतम 10% वार्षिक ब्याज की गारंटी और शासन अंशदान को बढ़ाकर 18.5% करने की मांग की गई.
13). रिटायरमेंट ग्रेच्युटी में सुधार:
गणना सूत्र में वेतन के 1/4 के स्थान पर 1/3 करने, सेवा वर्षों की गणना 33 वर्ष के बजाय वास्तविक वर्षों के अनुसार करने और अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये करने की मांग की गई.
14). डेथ ग्रेच्युटी कैलकुलेशन में सुधार:
मृतक कर्मचारियों के परिवारों को अधिक लाभ देने के लिए ग्रेच्युटी के गुणक में वृद्धि की मांग की गई.
आयोग के साथ हुई मीटिंग के बाद संगठन सदस्यों ने आयोग के अधिकारियों का धन्यवाद किया. इस मीटिंग में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष वितेश खांडेकर के नेतृत्व में संगठन के राज्य सचिव गोविंद उगले, विनायक चौथे, बबनराव म्हाळसकर, जितेंद्र फापाळे, सोमनाथ कुदळे, आनंद लोंढे मौजूद रहे.
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