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This Article is From Jun 23, 2015

ललित मोदी को लेकर ऐसी नरमी क्‍यों?

Ravish Kumar
  • Blogs,
  • Updated:
    जून 23, 2015 22:05 pm IST
    • Published On जून 23, 2015 21:49 pm IST
    • Last Updated On जून 23, 2015 22:05 pm IST
किसी राष्ट्रीय परीक्षा में एक प्रश्न पूछा जाए कि निम्नांकित श्रेणियों में से किन्हीं तीन के आगे टिक करें और बतायें कि ललित मोदी क्या हैं। जैसे मैंने एक प्रश्न का लंबा सा प्रश्नपत्र बनाया है ताकि आप टिक कर सकें। 1. भगोड़ा हैं, 2. भगोड़ा नहीं हैं, 3. ग्लोबल सैलानी हैं, 4. सच्चे देशभक्त हैं, 5. पारिवारिक मित्र हैं, 6. जिनके मित्र हैं उनके भी दुश्मन हैं, 7. जिनके दुश्मन हैं उनके भी मित्र हैं, 8. सबको फंसाते हैं, सब इनको बचाते हैं, 9. देश में मोदी सरकार है तो, 10. ललित की भी एक मोदी सरकार है।

दो तीन साल पहले की बात है। कॉमनवेल्थ घोटाला, स्पेक्ट्रम घोटाला और कोयला घोटाला को लेकर चैनलों के प्राइम टाइम पर रतजगा हुआ करता था। हफ्तों नहीं महीनों बहस हुआ करती थी। घड़ी-घड़ी संसद बंद होती थी और प्राइम टाइम के हिसाब से प्रवक्ताओं की शाम बदलने लगी। वे शादी और बर्थ डे पार्टी के बाहर से भी लाइव हो जाया करते थे।

धीरे-धीरे देश की राजनीतिक फ़िज़ा बदलने लगी। तब कोई नहीं कहता था कि देश में दूसरा मुद्दा है या नहीं। रोज़ कुछ न कुछ जानकारी सामने आ जा रही है। ललित मोदी बिना सामने आए कई लोगों का मीडिया के सामने आना मुश्किल किये दे रहे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस ने रविवार को एक पूरा पन्ना ललित मोदी को समर्पित करते हुए शीर्षक दिया- मोदी सरकार। बगल में ललित मोदी का खिलखिलाता चेहरा पाठकों का स्वागत कर रहा है कि आओ, मेरे बारे में जितना पढ़ना है पढ़ो। मैं सरकारों का भी सरकार हूं। ये भी कम ग़ज़ब नहीं कि एक मोदी सरकार के सामने एक और मोदी सरकार आ जाए जो बड़े वाले मोदी सरकार के वित्त मंत्री अरुण जेटली को चुनौती देने लगे कि इनका भी पर्दाफाश करूंगा। ये दिल से कांग्रेसी हैं। जनता अपनी ताकत का जिस राजनीति में निवेश करती है उसे इस तरह भरभरा कर गिरते हुए देखना कैसा लगता होगा। इसलिए ललित मोदी की ख़बर टीवी के बेचैन होते दर्शकों का भी इम्तहान है कि वे कब तक कुछ नहीं होते हुए इस शख्स का बहुत कुछ होना स्वीकार करते रहेंगे।

किसी के कहने पर या खुद ही कह दिया आर.के. सिंह ने कहना मुश्किल है पर पूर्व गृह सचिव और भाजपा के सांसद आर.के. सिंह के बयान से बीजेपी को ललित मोदी का कोई और ट्वीट ही बचा सकता है। सिंह साहब ने कहा कि ललित मोदी भगोड़ा है। भगोड़े की मदद करना बिल्कुल ग़लत है। चाहे कोई भी मदद किया हो। वसुंधरा राजे या सुषमा स्वराज का नाम नहीं लिया लेकिन अपनी बात से बीजेपी के किये कराये पर पानी फेर दिया। आर.के. सिंह ने कहा कि उसके ख़िलाफ वारेंट पेंडिंग है, समन पेंडिंग है, उसको नहीं मान रहा है तो भगोड़ा है न। मेरा तो मानना है कि वो भगोड़ा है, उसका पासपोर्ट रद्द हो गया, हाईकोर्ट ने बहाल कर दिया तो उसके ख़िलाफ़ अपील होनी चाहिए। उसको वापस लेना चाहिए। उसे ट्रायल का सामना करना चाहिए।

बीजेपी भले ही निजी राय बताये लेकिन आर.के. सिंह का बयान है झन्नाटेदार। हमारे सहयोगी श्रीनिवासन जैन की रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि भारत ने ललित मोदी के ख़िलाफ़ इंटरपोल में कोई नोटिस नहीं निकाला है। मौजूदा विवाद की शुरूआत में जब ललित मोदी के वकील ने कहा था कि कोई नोटिस नहीं है तब वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि लाइट ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी हुआ है, लेकिन इंटरपोल के पूर्व प्रमुख नोबल ने श्रीनिवासन जैन को बताया कि भारत ने कोई लाइट ब्लू कॉर्नर नोटिस की मांग नहीं की है। तो क्या वित्त मंत्री ने ग़लत बोला।

नोबेल ने लिखा है कि वे ललित मोदी को 2013 से जानते हैं और भारत ने कभी उनके ख़िलाफ सबूत नहीं दिये हैं। इस तस्वीर में ललित मोदी के साथ रॉन नोबल हैं जो पिछले साल नवंबर तक इंटरपोल के चीफ थे। अक्टूबर 2014 की इस तस्वीर में ललित मोदी और नोबेल एक साथ फुटबाल मैच देखते हुए पाये जा सकते हैं। दोनों बार्सिलोना और रियाल मैड्रिड के बीच होने वाले ला क्लासिको मैच का लुत्फ ले रहे हैं। ललित मोदी नोबेल को अपना भाई बताते हैं। श्रीनिवासन जैन का कहना है कि जिस तरह ललित मोदी अपने ख़िलाफ मामलों को सबको बताते चलते हैं उससे यह हो ही नहीं सकता कि नोबेल को उनके बारे मे कुछ पता न हो।

तो क्या यूपीए और एनडीए दोनों ही सरकारों में ललित मोदी की ही सरकार चल रही है। वसुंधरा राजे के बेटे और ललित मोदी के बीच कारोबारी संबंध की बात करने वाले जेटली ने मंगलवार को कहा कि कोई क्लीन चिट नहीं दी है जबकि नितिन गडकरी क्लीन चिट दिये चल रहे हैं। सरकार को एक क्लीन चिट आयोग बना लेना चाहिए। इस बीच एक और मामला आ गया है मुंबई के पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया का। लगता है ललित मोदी हर मिलने वाले का फोटो खींच लेते हैं।

राकेश मारिया ने महाराष्ट्र सरकार से स्वीकार कर लिया है कि 17 जुलाई 2014 को लंदन में मोदी से मिले थे। इसी महीने के आस पास सुषमा ने ललित मोदी की मदद की थी। मारिया ने बताया है कि मोदी की सुरक्षा को लेकर मुलाकात हुई थी और इसके बारे में कांग्रेस एनसीपी सरकार के गृहमंत्री को बता दिया था। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि उन्हें पता नहीं। पूर्व गृहमंत्री आर.आर. पाटिल का इसी फरवरी में निधन हो गया था। कभी आपने सामान्य नागरिक की सुरक्षा को लेकर पुलिस कमिश्नर को घर जाते देखा है, यहां तो मारिया जी लंदन चले गए।

महाराष्ट्र की बीजेपी शिवसेना सरकार मारिया की मुलाकात की जांच कर रही है इस लिहाज़ से केंद्र की मोदी सरकार और राजस्थान की वसुंधरा सरकार में भी जांच होनी चाहिए। अगर दो जगह पर मुलाकात पारिवारिक होकर जायज़ हो सकती है तो एक जगह पर पुलिस कमिश्नर के ख़िलाफ जांच का ऐलान क्या दोहरापन नहीं है। तो क्या मारिया भी बचाये जायेंगे।

बीजेपी हर सवाल और जानकारी को खारिज कर दे रही है। ललित मोदी तो ट्वीट कर कांग्रेस से भी सवाल कर रहे हैं और कांग्रेस चुप है। कांग्रेस से ऐसे सवाल किये हैं कि जिनका जवाब हां में ही लगता है पर अच्छा हो कि कांग्रेस ही जवाब दे। हां या ना में। ललित ललकारने में लगे हैं और सरकार है कि उनकी बातों को सरकाने में। ऐसे कैसे चलेगा।

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