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OPINION
This Article is From May 12, 2016

प्राइम टाइम इंट्रो : तमिलनाडु में जयललिता और करुणानिधि के विज्ञापनों में एक ही कलाकार

हमारी राजनीति अगर विज्ञापनों और प्रबंधन पर इस कदर निर्भर होने लगेगी तो वही होगा जो तमिलनाडु में हुआ है। राजनीतिक दलों से अपील है कि वे जब भी विज्ञापन बनवाएं, एजेंसी से क्लियर कर लें कि जो एक्टर काम करेगा वो विरोधी दल के चुनावी विज्ञापन में काम तो नहीं कर चुका है।

Ravish Kumar
  • Ravish Kumar is Senior Executive Editor, NDTV India
हमारी राजनीति अगर विज्ञापनों और प्रबंधन पर इस कदर निर्भर होने लगेगी तो वही होगा जो तमिलनाडु में हुआ है। राजनीतिक दलों से अपील है कि वे जब भी विज्ञापन बनवाएं, एजेंसी से क्लियर कर लें कि जो एक्टर काम करेगा वो विरोधी दल के चुनावी विज्ञापन में काम तो नहीं कर चुका है। दरअसल सारा कुछ विज्ञापनों पर इतना निर्भर हो गया है कि ऐसी ग़लती स्वाभाविक है। तमिलनाडु में तो आप जानते ही हैं कि वहां की पार्टियां जनता को टेबल फैन से लेकर मंगलसूत्र और टीवी तक देती हैं। यही हाल रहा तो एक दिन पार्टियों के दफ्तर में किराना स्टोर खुल जाएगा कि जो लेना है ले लो। फिर राजनीतिक दल के नेता नेतागीरी छोड़कर दुकान पर बैठ जाएंगे और साबुन तेल के बदले ग्राहक से वोट मांगने लगेंगे। हमारे देश में हंगामों का एक भौगौलिक आधार है। हमारे यहां हंगामा सिर्फ यूपी, बिहार और दिल्ली को लेकर होता है। तमिलनाडु और केरल की बात ही नहीं होती।

67 साल की कस्तुरी पाती तमिलनाडु की जानी-मानी कलाकार हैं। टीवी सीरियलों में खूब आती हैं। कस्तुरी जी ने डीएमके के लिए विज्ञापन किया है और अन्ना द्रमुक के लिए भी विज्ञापन किया है। अगर आप वोटर हैं तो आपको यह विज्ञापन देखने के बाद पता ही नहीं चलेगा कि किसे वोट दें और किससे क्या मांगे। जीटी कस्तुरी अन्ना द्रमुक के वीडियो में जयललिता की खूब तारीफ कर रही हैं। जयललिता के अम्मा अन्नधनम योजना की तारीफ करती हुई कहती हैं कि अम्मा मंदिरों में मुफ्त का खाना खिलाती हैं। डीएमके के वीडियो में कस्तुरी जी व्यंग्य कर रही हैं कि जयललिता राज्य में हेलिकॉप्टर से दौरा कर रही हैं। वे इतनी घमंडी हो गई हैं कि ग़रीब लोगों से कट गई हैं।

मज़ेदार बात है कि कस्तुरी जी ने कहा कि उन्हें पता ही नहीं चला कि वे दो अलग-अलग पार्टियों के लिए प्रचार कर रही हैं। उन्हें बताया गया कि एक लघु फिल्म के लिए शूटिंग हो रही है। डीएमके ने अलग शूट के लिए बुलाया। मैंने कहा भी कि मैंने अम्मा कैंटीन का विज्ञापन किया लेकिन मुझे लेकर कंप्टीशन हो गया। एक विज्ञापन के लिए 1500 और एक वीडियो के 1000 रुपये ही मिले। पैसा तो बहुत कम मिला। दोनों दलों ने कास्टिंग एजेंट को दोषी ठहराया है। अगर आप किसी राजनीतिक दल के प्रबंधक हैं तो चेक कर लीजिए कि विज्ञापन बनाने वाली टीम कहीं दूसरी पार्टी के लिए तो काम नहीं करती है।

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