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This Article is From Jan 02, 2024

चांद के साथ सातवें आसमान पर पहुंचा भारत, अमृत काल में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियां

Harish Chandra Burnwal
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    जनवरी 02, 2024 16:12 pm IST
    • Published On जनवरी 02, 2024 16:11 pm IST
    • Last Updated On जनवरी 02, 2024 16:12 pm IST

वक्त के पहियों पर सवार साल 2023 अलविदा कह चुका है, नए साल 2024 ने दस्तक दे दी है, लेकिन बदलता हुआ ये पल उन घटनाओं की चर्चा के बगैर अधूरा ही रहेगा, जिसने देश दुनिया में भारत की छवि को बदलकर रख दिया. वह चाहे चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक बुलंदी हो, या फिर G-20 का सफलतम आयोजन हो. वह चाहे आधुनिकता और प्राचीन संस्कृति का संगम नया संसद भवन हो या फिर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भारत का बढ़ता सम्मान हो. अमृतकाल में यह साल बार-बार नए भारत की अनगिनत कहानियां लिखता रहा. दुनियाभर में गुंजायमान होने वाली इन उपलब्धियों से न सिर्फ हर भारतवासी का सीना गर्व से चौड़ा हुआ, बल्कि देश की गौरवगाथा में भी चार चांद लगे.

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अब हमारा ‘शिवशक्ति प्वाइंट'

नए वर्ष के पहले दिन ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक्सपो सैटेलाइट की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग के साथ एक नया रिकॉर्ड कायम किया. यह मिशन एक्स रे रहस्यों का पता लगाने के साथ ब्लैक होल की जानकारी इकट्ठा करेगा और ऐसा करने वाला भारत अमेरिका के बाद दूसरा देश बन गया है. इसी कड़ी में अगर साल 2023 को देखें तो इसरो का चंद्रयान-3 मिशन पिछले साल की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धियों में से एक रहा है. चंद्रयान-3 ने चांद की सतह पर उतर कर इतिहास रच दिया. भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरने वाला दुनिया का पहला देश बना. हमने जहां लैंडिंग की, उस जगह को 'शिव‍शक्ति प्वाइंट' नाम दिया गया है. पिछले साल 14 जुलाई को दोपहर 2:35 बजे श्रीहरिकोटा से उड़ान भरने वाले चंद्रयान-3 ने अपनी यात्रा 40 दिनों में 23 अगस्त को पूरी की. विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग के बाद प्रज्ञान रोवर ने चंद्रमा की सतह पर घूमकर शोध किया और कई अहम जानकारियां जुटाईं. भारत से पहले अमेरिका, पूर्ववर्ती सोवियत संघ और चीन ही चांद पर सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग' कर पाए हैं, लेकिन ये देश भी चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कभी नहीं उतर पाए. यह गर्वीला रिकॉर्ड भारत ने ही बनाया. इसके साथ ही हमें यह भी याद रखना चाहिए कि इस सफलता के पीछे इसरो के पूर्व चेयरमैन कैलासवादिवु सिवन की अथक मेहनत और आंसू भी छिपे हैं. पांच साल पहले इसरो ने चंद्रयान-2 को लॉन्च किया था, लेकिन तब चांद पर लैंडिग से पहले विक्रम लैंडर से सभी संपर्क टूट गए थे. इसके बाद भारत ने किसी भी मुश्किल में हार न मानने का जज्बा, जोश और समर्पण दिखाया.

आजादी के 75 साल बाद पहला सूर्य मिशन 'आदित्य एल1' लॉन्च

भारत सरकार ही नहीं करोड़ों देशवासियों की दुआएं इसरो के वैज्ञानिकों के साथ थीं. उसी का सुखद परिणाम चंद्रयान मिशन की सफलता के रूप में सामने आया और पूरी दुनिया ने इसरो और भारतीय वैज्ञानिकों की मेधा का लोहा माना. चंद्र-विजय के साथ अब बारी सूर्य मिशन की है. आजादी के 75 साल बाद भारत ने पिछले साल 2 सितंबर को अपना पहला सूर्य मिशन लॉन्च किया है. इसरो ने 'आदित्य एल1' को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के स्पेस सेंटर से पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV-C57) से लॉन्च किया गया. इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ के मुताबिक सूर्य मिशन 6 जनवरी 2024 को अपने गंतव्य लैग्रेंजियन पॉइंट (एल1) पर पहुंचेगा. यह पृथ्वी से 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर स्थित है. आदित्य एल1 मिशन एक बार अपने गंतव्य पर स्थापित हो जाएगा तो अगले पांच वर्षों तक सूर्य पर होने वाली विभिन्न घटनाओं को मापने में मदद करेगा. यह इन वर्षों में इतना महत्वपूर्ण डेटा इकट्ठा करेगा, जो भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बेहद उपयोगी साबित होने वाला है. इससे वैज्ञानिकों को सूर्य की गतिशीलता के साथ-साथ यह हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करता है, इसे समझने में बेहद मदद मिलेगी. इन्हीं सफलताओं का असर है कि इसरो ने साल 2024 के लिए 12 महीने में 12 बड़े मिशन का टार्गेट सेट किया है.

सफलतम जी-20 से दुनियाभर की सुर्खियों में रहा भारत

स्पेस की इन उपलब्धियों के साथ-साथ भारत जी-20 के सफलतम आयोजन के लिए दुनियाभर में सुर्खियों में रहा. इस शिखर सम्मेलन की शानदार मेजबानी और नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन (एनडीएलडी) को सर्वसम्मति के साथ स्वीकारे जाने के लिए भारतीय नेतृत्व को वैश्विक स्तर पर काफी तारीफ मिली. यह कहा गया कि रूस-यूक्रेन युद्ध से बढ़ते तनाव और अलग-अलग विचारों के बीच डिक्लेरेशन को अपनाया जाना भारत की महत्वपूर्ण कामयाबी है. यहां तक कि दुनिया इस युद्ध के खात्मे के लिए भारत की ओर आशा भरी नजरों से देखने लगी है. भारत की पहल पर African Union यानी अफ्रीकी देशों का संघ भी G-20 का स्थाई सदस्य बना. ज्यादातर वैश्विक मीडिया ने ‘ग्लोबल साउथ' की आवाज के रूप में भारत के बढ़ते दबदबे की तारीफ की. समिट के इतिहास में भारत ने पिछले जी-20 की तुलना में दोगुने से अधिक काम किया है. इस बार समिट में कुल 73 मुद्दों पर चर्चा के बाद सहमति बनी. इसके अलावा 39 अन्य प्रकार के दस्तावेज (Annexed Documents) पर भी बात आगे बढ़ी है. कुल मिलाकर इस बार 112 आउटकम निकले हैं. जबकि पिछले साल इसी समिट में सिर्फ 27 मुद्दों पर ही सहमति बन पाई थी. 2021 में 36 और 2020 में सिर्फ 22 मुद्दों पर ही चर्चा के बाद सहमति बनी थी. यह आंकड़े भी भारत की अध्यक्षता में हुए सफल समिट के गवाह हैं.

आधुनिकता और प्राचीन संस्‍कृति का संगम नया संसद भवन

भारत के भविष्य के लिए एक स्वर्णिम अध्याय नए संसद भवन के रूप में भी इस साल जुड़ा. संसद भवन आधुनिकता और प्राचीन परंपरा-संस्कृति का सुंदर संगम है. अंग्रेजों ने जिस पवित्र सेंगोल के जरिए भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को आजाद भारत की सत्ता सौंपी थी, उसे भारत सरकार ने विधि-विधान से लोकसभा में स्थापित कराया है. नए संसद भवन के लोकसभा कक्ष में अधिकतम 888 सांसदों के बैठने की व्‍यवस्‍था है, जबकि राज्‍यसभा कक्ष में 384 सांसद बैठ सकते हैं. बता दें कि 1971 की जनगणना के आधार पर किए गए परिसीमन में लोकसभा सीटों की संख्या 545 पर अपरिवर्तित बनी हुई है. 2026 के बाद इसमें वृद्धि होने की संभावना है, क्योंकि सीटों की संख्या बढ़ने पर रोक 2026 तक ही है. ऐसे में नए परिसीमन से सांसदों की संख्या बढ़ने के बाद भी नए संसद भवन में बैठने में कोई मुश्किल नहीं आएगी.


नमो भारत और सबसे लंबे रेलवे स्टेशन का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

इन बड़ी उपलब्धियों के बीच रेलवे के कायाकल्प के लिए भी यह साल याद रखा जाएगा. देश की पहली RAPID रेल (नमो भारत) शुरू हुई है. यह पहले फेज में दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर साहिबाबाद से दुहाई डिपो तक 17 किमी की यात्रा 12 मिनट में तय करेगी. इसके अलावा मार्च 2023 में भारतीय रेलवे ने दक्षिण-पश्चिम रेलवे जोन के हुबली रेलवे स्टेशन को देश का सबसे लंबा रेलवे स्टेशन बनाया. इसके एक प्लेटफॉर्म की लंबाई 1507 मीटर है. इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया. दिलचस्प बात ये भी है भारत ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा. इससे पहले गोरखपुर स्टेशन दुनिया का सबसे लंबा रेलवे स्टेशन था. इसके साथ ही 24,470 करोड़ रुपये की लागत से अमृत भारत स्टेशनों के जरिए भी भारतीय रेलवे की तस्वीर बदली जा रही है.

भारत अब वैश्विक निवेशकों के लिए सबसे बड़ा बाजार

साल 2023 के अप्रैल माह में भारत ने एक रिकॉर्ड अपने नाम किया. इसे निगेटिव या पॉजिटिव दोनों संदर्भ में लिया जा सकता है, लेकिन महत्वपूर्ण तथ्य ये है कि भारत जनसंख्या के मामले में चीन को पछाड़कर दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश बना. हालांकि खास बात यह है कि भारत की आबादी का बड़ा हिस्सा युवाओं का है. ऐसे में देश के आर्थिक सेहत के लिए ये अच्छी खबर है, क्योंकि वर्किंग पॉपुलेशन से कोई भी देश अपनी इकोनॉमी को बेहतर बना सकता है. आबादी बढ़ने से भारत में निवेश भी बढ़ेगा. किसी भी बड़े बिजनेस के लिए ज्यादा से ज्यादा कंज्यूमर जरूरी होते हैं. भारत अब दुनियाभर के निवेशकों के लिए एक बड़े बाजार की तरह है. इसके अलावा दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश का टैग मिलने से यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में स्थायी सदस्यता के लिए भारत का दावा और मजबूत हो सकता है.

एशियाई खेलों में पहली बार पदक का आंकड़ा 100 पार

वैश्विक मंच पर खेलों की दुनिया में भी भारत की तस्वीर बदल रही है. एशियाई खेलों में देश ने वैश्विक मंच पर एक उभरती ताकत के रूप में अपनी प्रतिष्ठा मजबूती से स्थापित की है. भारत ने हांगझोऊ एशियाई खेलों में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन कर नया बेंचमार्क बनाया. इसमें हमारे देश के खिलाड़ियों ने 28 स्वर्ण, 38 रजत और 41 कांस्य सहित 107 पदकों के साथ ऐतिहासिक प्रदर्शन किया और 2018 में 70 पदकों के अपने पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया. इस साल की शानदार सफलता अगले साल पेरिस ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और जीत का खाका तैयार करने का काम करेगी. खेलों में ही नहीं अब भारत हर मोर्चे पर नित-नई बुलंदियां छूने को आतुर है. यही वजह है कि विश्व की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने के सपने को साकार करने के साथ ही विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि की राह पर देश मजबूती से चल पड़ा है.

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं...

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं.

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