- नीतीश कुमार ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी
- 'नीतीश कुमार अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनें'
- 'सदन में आकर नीतीश कुमार को वक्तव्य देना चाहिए'
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पटना:
सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को बिहार के सभी सुधार गृहों की जांच सीबीआई को देने का आदेश दिया. इस मुद्दे पर विपक्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ और आक्रामक हो गया. विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए. तेजस्वी ने कहा कि नीतीश कुमार को आने वाले समय में विधानसभा का मुंह नहीं देखना चाहिए. निश्चित रूप से सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले से विपक्ष को एक मुद्दा बैठे बिठाये मिल गया. तेजस्वी ने सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देते हुए कहा कि पिछले तीन महीने से कोर्ट की मॉनिटरिंग के कारण दूध का दूध पानी का पानी होता जा रहा है.
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनें और जिस तरह हर सुनवाई पर कोर्ट उनकी सरकार को फटकार लगा रही है उससे उन्हें शर्मशर हो जाना चाहिए. हालांकि विधानसभा की कार्रवाई विपक्ष के हंगामे के कारण नहीं चल रही लेकिन तेजस्वी ने मांग की कि नीतीश कुमार इस मुद्दे पर अपनी ग़लतियों को सुधारें और सदन में आकर वक्तव्य दें.
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तेजस्वी के अनुसार इस मामले में पुलिस ने जिस तरह से शुरू से आरोपियों को बचाने का प्रयास किया वो सब गृह विभाग के मुखिया नीतीश कुमार के इशारे पर हुआ है.
हालांकि नीतीश कुमार ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार ने शुरू से किसी भी जांच एजेंसी से जांच कराने की बात कही थी और बुधवार को भी कोर्ट में उसने अपनी सहमति दी. इसलिए तेजस्वी यादव या किसी नेता के पास कोई साक्ष्य है तो अब जांच एजेंसी को जाकर दे सकते हैं.
VIDEO: बिहार शेल्टर होम केस: SC ने CBI के को दिए सभी 17 केस
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनें और जिस तरह हर सुनवाई पर कोर्ट उनकी सरकार को फटकार लगा रही है उससे उन्हें शर्मशर हो जाना चाहिए. हालांकि विधानसभा की कार्रवाई विपक्ष के हंगामे के कारण नहीं चल रही लेकिन तेजस्वी ने मांग की कि नीतीश कुमार इस मुद्दे पर अपनी ग़लतियों को सुधारें और सदन में आकर वक्तव्य दें.
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हालांकि नीतीश कुमार ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार ने शुरू से किसी भी जांच एजेंसी से जांच कराने की बात कही थी और बुधवार को भी कोर्ट में उसने अपनी सहमति दी. इसलिए तेजस्वी यादव या किसी नेता के पास कोई साक्ष्य है तो अब जांच एजेंसी को जाकर दे सकते हैं.
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