सुशील कुमार मोदी (फाइल फोटो)
पटना:
वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की फरक्का बांध को बंद करने की मांग पर सवाल उठाए हैं. कुमार ने कल केंद्र सरकार से पश्चिम बंगाल में स्थित फरक्का बांध को बंद करने की मांग की थी. कुमार का कहना था कि इसकी कोई उपयोगिता नहीं है और इसमें गाद जमने के कारण यह बिहार में आने वाली बाढ़ की बड़ी वजह है.
वरिष्ठ भाजपा नेता मोदी ने कहा, "सबसे पहले, फरक्का बांध भारत और बांग्लादेश के बीच अंतरराष्ट्रीय अनुबंध के तहत है. यह किसी एक राज्य का मुद्दा नहीं है. यह दो देशों से जुड़ा हुआ मुद्दा है."
उन्होंने कहा कि बिहार में 1954 में बाढ़ से प्रभावित 25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र था, उस समय राज्य में कुल 160 किलोमीटर बांध था. लेकिन 2016 में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र बढ़कर 72.95 किलोमीटर हो गया, जबकि अब राज्य में कुल 3731 किलोमीटर बांध है.
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री मोदी ने कहा कि ऐसे में क्या राज्य सरकार बाढ़ से निपटने के लिए राज्य में सभी बांध खत्म करने की सिफारिश करेगी क्योंकि यह दिखाता है कि बांध बाढ़ से लोगों की रक्षा करने में सक्षम नहीं है.
बक्सर और उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद-हल्दिया में प्रस्तावित जलाशय के निर्माण पर बिहार के मुख्यमंत्री के विरोध के बारे में मोदी ने कहा कि यह पहले ही साफ हो चुका है कि राष्ट्रीय जलमार्ग1 के लिए गंगा पर कोई बांध नहीं बनाया जाएगा.
इससे पहले, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कल यानी सोमवार को यह कहते हुए केंद्र से फरक्का बैराज को बंद करने की जोरदार मांग की थी कि उसकी कोई उपयोगिता नहीं है और उसकी वजह से हर साल राज्य में बाढ़ आती है. कुमार ने इलाहाबाद हल्दिया जलमार्ग पर बक्सर और उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित जलाशय का भी विरोध किया था. नीतीश ने कहा था, "हमने पिछली संप्रग सरकार से पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज को बंद करने की मांग की थी. मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी कहा है कि फरक्का बांध से गंगा नदी में भारी गाद जमा हो रहा है और यह बिहार में हर साल भारी बाढ़ की बड़ी वजह है."
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
वरिष्ठ भाजपा नेता मोदी ने कहा, "सबसे पहले, फरक्का बांध भारत और बांग्लादेश के बीच अंतरराष्ट्रीय अनुबंध के तहत है. यह किसी एक राज्य का मुद्दा नहीं है. यह दो देशों से जुड़ा हुआ मुद्दा है."
उन्होंने कहा कि बिहार में 1954 में बाढ़ से प्रभावित 25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र था, उस समय राज्य में कुल 160 किलोमीटर बांध था. लेकिन 2016 में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र बढ़कर 72.95 किलोमीटर हो गया, जबकि अब राज्य में कुल 3731 किलोमीटर बांध है.
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री मोदी ने कहा कि ऐसे में क्या राज्य सरकार बाढ़ से निपटने के लिए राज्य में सभी बांध खत्म करने की सिफारिश करेगी क्योंकि यह दिखाता है कि बांध बाढ़ से लोगों की रक्षा करने में सक्षम नहीं है.
बक्सर और उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद-हल्दिया में प्रस्तावित जलाशय के निर्माण पर बिहार के मुख्यमंत्री के विरोध के बारे में मोदी ने कहा कि यह पहले ही साफ हो चुका है कि राष्ट्रीय जलमार्ग1 के लिए गंगा पर कोई बांध नहीं बनाया जाएगा.
इससे पहले, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कल यानी सोमवार को यह कहते हुए केंद्र से फरक्का बैराज को बंद करने की जोरदार मांग की थी कि उसकी कोई उपयोगिता नहीं है और उसकी वजह से हर साल राज्य में बाढ़ आती है. कुमार ने इलाहाबाद हल्दिया जलमार्ग पर बक्सर और उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित जलाशय का भी विरोध किया था. नीतीश ने कहा था, "हमने पिछली संप्रग सरकार से पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज को बंद करने की मांग की थी. मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी कहा है कि फरक्का बांध से गंगा नदी में भारी गाद जमा हो रहा है और यह बिहार में हर साल भारी बाढ़ की बड़ी वजह है."
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