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Success Story: रेलवे का गेटमैन राजू बना DSP, पिता की मौत के बाद मां ने गाय पालकर पढ़ाया, BPSC में 72वीं रैंक

ब‍िहार में बेगूसराय के राजू कुमार की सफलता की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. पिता के निधन के बाद मां ने गाय पालकर पढ़ाया और भाई ने मजदूरी की. रेलवे ग्रुप-डी की नौकरी के साथ संघर्ष करते हुए राजू ने 70वीं BPSC में 72वीं रैंक हासिल कर DSP का पद पाया.

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  • बेगूसराय के राजू कुमार ने बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में 72वीं रैंक हासिल की है
  • पिता की असमय मृत्यु के बावजूद मां और बड़े भाई के समर्थन से राजू ने पढ़ाई जारी रखी और सपने नहीं छोड़े
  • आर्थिक मजबूती के लिए राजू ने भारतीय रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरी की, लेकिन उनका असली लक्ष्य पुलिस सेवा था

Success Story: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा का परिणाम आते ही सफलता की कई कहानियां सामने आ रही हैं, लेकिन बेगूसराय के राजू कुमार की कामयाबी हर किसी का दिल छू रही है. यह महज एक युवा के अफसर बनने की कहानी नहीं है, बल्कि एक मां के त्याग, बड़े भाई के समर्पण और एक बेटे की कभी न हार मानने वाली जिद्द की मिसाल है. कठिन परिस्थितियों को मात देकर राजू बिहार पुलिस सेवा में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पद पर चयनित हुए हैं.

मैट्रिक परीक्षा से ठीक पहले टूटा दुखों का पहाड़

बेगूसराय जिले के खोदावंदपुर प्रखंड अंतर्गत मलमल्ला गांव के रहने वाले राजू कुमार का बचपन आम ग्रामीण बच्चों जैसा ही था. साल 2014 में जब वह अपनी मैट्रिक परीक्षा की तैयारियों में जुटे थे, तभी एक भीषण सड़क दुर्घटना में उनके पिता कैलाश महतो का असमय निधन हो गया. पिता के गुजर जाने से परिवार पर दुखों और आर्थिक तंगी का पहाड़ टूट पड़ा. ऐसी विकट परिस्थिति में पढ़ाई छोड़कर काम में लग जाना बहुत आसान था, लेकिन परिवार ने राजू के सपनों की बलि नहीं चढ़ने दी.  

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Photo Credit: NDTV

मां ने गाय पाली, बड़े भाई ने की मजदूरी

राजू के सपनों को जिंदा रखने के लिए उनकी मां रेखा देवी ने हिम्मत दिखाई. उन्होंने घर में गाय पालकर दूध बेचना शुरू किया और दिन-रात कड़ी मेहनत करके घर का खर्च चलाया. वहीं, उनके बड़े भाई राहुल कुमार ने खुद मजदूरी करना शुरू कर दिया ताकि छोटे भाई की पढ़ाई में पैसे की कोई कमी न आए. परिवार के इस अटूट समर्पण को देखकर राजू ने भी अपनी मेहनत में कोई कसर नहीं छोड़ें और कठिन से कठिन दौर में भी अपनी पढ़ाई जारी रखी.

रेलवे ग्रुप-डी की नौकरी से मिली आर्थिक मजबूती, पर लक्ष्य था वर्दी

राजू की मेहनत रंग लाई और उनका चयन भारतीय रेलवे में ग्रुप-डी के पद पर हो गया. आर्थिक रूप से परिवार को सहारा तो मिल गया, लेकिन राजू का असली सपना खाकी वर्दी पहनकर समाज की सेवा करना था. हम सभी जानते हैं कि रेलवे ग्रुप-डी में शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद थका देने वाली ड्यूटी होती है. इसके बावजूद, राजू के सिर पर कुछ बड़ा हासिल करने का जुनून सवार था.  

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जेब में नोट्स और मोबाइल में PDF: ऐसे की बिना कोचिंग सेल्फ स्टडी

राजू ने बताया क‍ि अपनी ड्यूटी के दौरान जब भी उनको थोड़ा सा भी समय मिलता, वे किताबों में खो जाते. चाहे रात की मुश्किल शिफ्ट हो या दिन की थकाऊ ड्यूटी, राजू अपनी जेब में हमेशा छोटे-छोटे नोट्स रखते थे और मोबाइल में पीडीएफ फाइलों से पढ़ाई करते थे. जब शरीर पूरी तरह थक जाता था, तब भी उनका सपना उन्हें सोने नहीं देता था. उन्होंने किसी बड़े या महंगे कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया, बल्कि पूरी तरह से सेल्फ स्टडी और इंटरनेट का सही इस्तेमाल करते हुए BPSC की तैयारी जारी रखी.  

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BPSC में 72वीं रैंक हासिल कर बने डीएसपी

20 जून 2026 को जब ब‍िहार लोक सेवा आयोग की 70वीं प्रत‍ियोगी परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित हुआ, तो राजू के घर में खुशियों के आंसू छलक पड़े. राजू ने पूरी राज्य सूची में 72वां स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. उनका चयन बिहार पुलिस सेवा के अंतर्गत डीएसपी के पद पर हुआ है. राजू की यह सफलता साबित करती है कि मंजिल तक पहुंचने के लिए संसाधनों से कहीं अधिक मजबूत इरादों की जरूरत होती है.   

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