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This Article is From Dec 29, 2019

बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे पर प्रशांत किशोर का बड़ा बयान, कहा - BJP को JDU के प्रस्ताव पर...

प्रशांत किशोर ने रविवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी को सीटों के बंटवारे को लेकर JDU के प्रस्ताव पर जरूर विचार करना चाहिए. जेडीयू को आगामी चुनाव में 50 फीसदी से ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए.

बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे पर प्रशांत किशोर का बड़ा बयान, कहा - BJP को JDU के प्रस्ताव पर...
प्रशांत किशोर ने बिहार चुनाव को लेकर दिया बयान
  • प्रशांत किशोर ने कहा कि हमें ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए
  • बीजेपी को हमारे प्रस्ताव पर विचार करना चाहिए - किशोर
  • बिहार में अगले साल होने हैं विधानसभा चुनाव
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नई दिल्ली:

बिहार में विधानसभा चुनाव भले ही अगले साल होने हैं लेकिन इसे लेकर अभी से ही बयानबाजी का दौर शुरू गया है. चुनाव को लेकर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने NDTV से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने चुनाव में सीटों के बंटवारे से लेकर NRC पर अपनी  पार्टी के स्टैंड पर बात की. सीट बंटवारे को लेकर किशोर ने रविवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी को सीटों के बंटवारे को लेकर JDU के प्रस्ताव पर जरूर विचार करना चाहिए. मुझे लगता है कि जेडीयू को आगामी चुनाव में 50 फीसदी से ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि बीजेपी से सीट बंटवारे को लेकर अनुपात 1 बटे 1.3 या 1.4 ही रहेगा. उन्होंने एनआरसी को लेकर भी अपनी पार्टी का स्टैंड साफ किया. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने पहले ही साफ कर दिया है कि हमारी पार्टी राज्य में एनआरसी लागू नहीं करेगी. उधर, सीटों के बंटवारें को लेकर प्रशांत किशोर के बयान पर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. बीजेपी नेता नितिन नवीन ने कहा कि सीट बंटवारे पर आखिरी फैसला पार्टी हाई कमान को लेना है. मुझे समझ नहीं आ रहा है कि इस मुद्दे पर प्रशांत किशोर इतनी बयानबाजी क्यों कर रहे हैं. लेकिन जेडीयू के नेताओं का कहना है कि जो प्रशांत किशोर जो बात कह रहे हैं वही भावना नीतीश की भी है.

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बता दें कि बिहार में चुनाव को लेकर जेडीयू ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. साल 2015 में बिहार में जिस नारे के दम पर  नीतीश कुमार  ने विधानसभा चुनाव जीता था इस बार उसमें थोड़ा सा बदलाव किया गया है. पिछली बार नारा था, 'बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है' इस नारे को गढ़ने में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का दिमाग़ था. लेकिन जो नया बदलाव किया गया है इसमें प्रशांत किशोर का कोई हाथ नहीं है. लेकिन साल 2020 में होने वाले चुनाव को लेकर जो नारा गढ़ा गया है वह है, 'क्यूं करें विचार, ठीके तो है नीतीश कुमार'. अब देखने वाली बात यह होगी कि बदली परिस्थितियों में नारे कितना काम करते हैं. लगातार तीन बार मुख्यमंत्री बन चुके नीतीश कुमार ने पिछला चुनाव आरजेडी+जेडीयू+कांग्रेस को मिलाकर महागठबंधन के बैनर तले लड़ा था. जिसमें इन तीन पार्टियों का वोटबैंक बीजेपी पर भारी पड़ गया था. नीतीश कुमार इससे पहले एनडीए में थे लेकिन नरेंद्र मोदी को पीएम पद का चेहरा बनाए जाने पर वह नाराज हो गए और बीजेपी से नाता तोड़ लिया.

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लोकसभा चुनाव में तो नीतीश कुमार की पार्टी की करारी हार हुई लेकिन उन्होंने लालू प्रसाद यादव के साथ मिलकर बिहार में मोदी का विजय रथ रोक दिया था. यह सरकार करीब डेढ़ साल तक चली थी लेकिन इसके बाद लालू परिवार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर जेडीयू और आरजेडी के बीच झगड़ा बढ़ गया और आखिरकार नीतीश कुमार ने खुद ही सीएम पद से इस्तीफा देकर बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली.

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लोकसभा चुनाव में बीजेपी और जेडीयू ने मिलकर आरजेडी का सूपड़ा साफ कर दिया और लालू की पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई. लेकिन अब बीजेपी के साथ रिश्तों में वह गर्माहट नहीं है. बीजेपी केंद्र में प्रचंड बहुमत के साथ आई है और उसके पास 300 से ज्यादा सीटे हैं और उसे सरकार में बने रहने के लिए किसी सहयोगी की जरूरत नहीं है यही वजह है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में जेडीयू का एक भी मंत्री नहीं है. उधर तीन तलाक और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के मुद्दे पर जेडीयू भी मोदी सरकार के साथ नहीं थी. लेकिन अगर बिहार में बीजेपी-जेडीयू और एलजीपी साथ मिलकर चुनाव लड़ती है तो तीनों का वोटबैंक मिलकर बाकियों पर भारी पड़ेगा. लेकिन राजनीति में हवा बदलने में एक हफ्ता काफी होता है और अभी चुनाव में लगभग एक साल बाकी है.

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