बिहार के सीएम नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
- केंद्रीय मंत्री के बेटे पर लगाया हिंसा का आरोप
- अर्जित शाश्वत को शनिवार देर रात पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया
- इससे पहले कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी थी
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पटना:
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस समय राज्य में बिगड़ते कानून व्यवस्था लेकर तीखी आलोचनाएं झेल रहे हैं. कांग्रेस ने उनको 'असहाय' कहा तो बिहार में मुख्य विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार बीजेपी का एजेंडा लागू होने दे रहे हैं. अब तक लग रहा था कि बिहार में बिगड़ते साम्प्रदायिक सौहार्द को संभालने का जिम्मा नीतीश सरकार ने अपने सहयोगी बीजेपी पर छोड़ दिया है. लेकिन शनिवार को नीतीश सरकार ने बीजेपी नेता अर्जित शाश्वत द्वारा कोर्ट में दिए गए अग्रिम जमानत के अनुरोध का पुरजोर विरोध करके कड़ा संदेश भी दे दिया.
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इस संबंध में सरकार ने कोर्ट से कहा कि केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत ने भागलपुर में रामनवमी के मौके पर निकाले गए जुलूस की अगुवाई की थी. सरकार ने कहा कि बिना प्रशासन के अनुमति के उन्होंने यह जुलूस निकाला था. अर्जित शाश्वत को शनिवार देर रात पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. जिले के सरकारी अभियोजक एसएन साह ने अदालत से कहा कि बीते दिनों राज्य के कई हिस्सों में इसी तरह की हिंसा को व्यापक रूप में देखा गया. उन्होंने राज्य में भाजपा नेता अर्जित शाश्वत को सांप्रदायिक हिंसा के लिए दोषी ठहराया. बाद में जज कुमुद राजन ने अर्जित शाश्वत के अग्रिम जमानत के अनुरोध को खारिज कर दिया.
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस हफ्ते की शुरुआत में जोर देकर कहा था कि उनकी सरकार शांति और सद्भाव में विश्वास करती है. उन्होंने कहा था कि कई लोग इस कोशिश में लगे रहते हैं कि कहीं फसाद हो जाए, जिससे समाज में टकराव हो जाएगा. नीतीश कुमार ने कहा कि हम इस कोशिश में रहते हैं कि समाज में शांति बनी रहे, लेकिन कुछ लोग सोचते हैं कि समाज में टकराव होने से चुनाव में लाभ मिलेगा.
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इस संबंध में जेडीयू की ओर से भी बीजेपी को कड़ा संदेश देने की कोशिश की गई. ताकि पार्टी अपने नेताओं पर लगाम लगाए. पार्टी की ओर से दिया गया यह बयान सीएम नीतीश कुमार के उस बयान से कहीं ज्यादा तीखा है जिसमें उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता 'स्वीकार' नहीं है. लेकिन नीतीश कुमार के इस बयान का कोई असर बीजेपी नेताओं पर नहीं पड़ा था. भागलपुर से शुरू हुई हिंसा समस्तीपुर के कुछ इलाकों और उनके गृह जिले को नालंदा तक पहुंच गई.
VIDEO: दंगों की आग में सुलगता बिहार
इससे पहले अश्विनी चौबे के अपने बेटे और भाजपा नेता अर्जित शाश्वत के बचाव में खुल कर मैदान में आए थे. उन्होंने उल्टे राज्य सरकार के ऊपर सवाल खड़ा किया है. चौबे ने आरोप लगाया था कि स्थानीय प्रशासन अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए उनके बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कराया है.
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इस संबंध में सरकार ने कोर्ट से कहा कि केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत ने भागलपुर में रामनवमी के मौके पर निकाले गए जुलूस की अगुवाई की थी. सरकार ने कहा कि बिना प्रशासन के अनुमति के उन्होंने यह जुलूस निकाला था. अर्जित शाश्वत को शनिवार देर रात पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. जिले के सरकारी अभियोजक एसएन साह ने अदालत से कहा कि बीते दिनों राज्य के कई हिस्सों में इसी तरह की हिंसा को व्यापक रूप में देखा गया. उन्होंने राज्य में भाजपा नेता अर्जित शाश्वत को सांप्रदायिक हिंसा के लिए दोषी ठहराया. बाद में जज कुमुद राजन ने अर्जित शाश्वत के अग्रिम जमानत के अनुरोध को खारिज कर दिया.
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस हफ्ते की शुरुआत में जोर देकर कहा था कि उनकी सरकार शांति और सद्भाव में विश्वास करती है. उन्होंने कहा था कि कई लोग इस कोशिश में लगे रहते हैं कि कहीं फसाद हो जाए, जिससे समाज में टकराव हो जाएगा. नीतीश कुमार ने कहा कि हम इस कोशिश में रहते हैं कि समाज में शांति बनी रहे, लेकिन कुछ लोग सोचते हैं कि समाज में टकराव होने से चुनाव में लाभ मिलेगा.
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इस संबंध में जेडीयू की ओर से भी बीजेपी को कड़ा संदेश देने की कोशिश की गई. ताकि पार्टी अपने नेताओं पर लगाम लगाए. पार्टी की ओर से दिया गया यह बयान सीएम नीतीश कुमार के उस बयान से कहीं ज्यादा तीखा है जिसमें उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता 'स्वीकार' नहीं है. लेकिन नीतीश कुमार के इस बयान का कोई असर बीजेपी नेताओं पर नहीं पड़ा था. भागलपुर से शुरू हुई हिंसा समस्तीपुर के कुछ इलाकों और उनके गृह जिले को नालंदा तक पहुंच गई.
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इससे पहले अश्विनी चौबे के अपने बेटे और भाजपा नेता अर्जित शाश्वत के बचाव में खुल कर मैदान में आए थे. उन्होंने उल्टे राज्य सरकार के ऊपर सवाल खड़ा किया है. चौबे ने आरोप लगाया था कि स्थानीय प्रशासन अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए उनके बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कराया है.
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