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This Article is From Dec 23, 2018

कौन हैं ये मुकेश साहनी जो कह रहे हैं 'माछ भात खाएंगे महागठबंधन को जिताएंगे'

मुकेश साहनी ने पिछले महीने ही अपनी एक पार्टी विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) बनायी है.

तेजस्‍वी यादव के साथ प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में मुकेश साहनी
पटना:

बिहार में लोकसभा चुनाव में महागठबंधन और NDA में कौन कौन से दल रहेंगे यह साफ़ हो गया. सबसे ज़्यादा जिज्ञासा रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी को लेकर थी जिसने दबाव बनाकर BJP से छह लोकसभा की सीटें और प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई 1 राज्यसभा की सीट अपनी झोली मैं करने में क़ामयाब रही. वहीं सन ऑफ़ मल्‍लाह के नाम से मशहूर मुकेश साहनी महागठबंधन के साथ गये.

मुकेश साहनी ने पिछले महीने ही अपनी एक पार्टी विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) बनायी है. अख़बारों और टीवी चैनल में विज्ञापन देकर सुर्ख़ियो में बने रहने वाले मुकेश ने हाल के समय में हेलीकॉप्टर से प्रचार शुरू कर दिया था. इनकी मुख्य मांग है कि निषाद जाति को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल किया जाये. हालांकि बिहार सरकार ने केंद्र सरकार को इसकी अनुशंसा भेज दी है.

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महागठबंधन में शामिल होने वाले मुकेश ने पिछले विधानसभा चुनाव में पहले नीतीश कुमार को समर्थन दिया फिर कुछ दिनों के अंदर ही उन्होंने अपना निर्णय बदल कर एनडीए की सरकार बनाने की घोषणा कर दी. BJP को लगता था कि मुकेश की मल्‍लाह वोटरों में काफ़ी लोकप्रियता है और उनका नीतीश कुमार के प्रति जो झुकाव है उसे तोड़ने में वह क़ामयाब होंगे.

शायद यही कारण था कि BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने क़रीब 40 सभाओं में मुकेश को अपने साथ रखा. वह उन्हें अपने साथ हर दिन हेलीकॉप्टर में ले जाते थे और दोनों संयुक्त सभा को संबोधित करते थे. लेकिन जब चुनाव परिणाम आया तो BJP के नेताओं का कहना है कि मल्‍लाह वोटरों का झुकाव नीतीश कुमार के प्रति अधिक रहा और कुशवाहा की तरह मुकेश पर भरोसा करना फ़ायदेमंद नहीं रहा.

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मुकेश साहनी के बारे में कहा जाता है कि ये बॉम्बे में फ़िल्म के सेट बनाने का काम करते हैं और उस धंधे में इन्होंने काफ़ी अच्छी कमाई की. लेकिन इनकी हमेशा राजनीतिक महत्वाकांक्षा रही जिसके कारण 2014 के लोकसभा चुनावों से वह बिहार में काफ़ी सक्रिय रहे हैं. लेकिन 2015 के विधानसभा चुनाव में NDA की हार के बाद वो फिर वापस मुम्बई चले गए लेकिन पिछले एक वर्ष से बिहार की राजनीति में फिर सक्रिय हुए हैं. वह अपनी जाति के वोटरों को लामबंद और अपने प्रति आकर्षित करने के लिए हर क़दम उठाते हैं चाहे वो हेलीकॉप्टर से प्रचार करने का तरीक़ा हो या विशेष रथ में घूम-घूमकर जिला और कस्बों में प्रचार करने का उनका स्टाइल.

लेकिन रविवार को जैसे कि मुकेश ने घोषणा की है कि माछ भात खाएंगे और महगठबंधन को जिताएंगे और अगर एनडीए दोहरे अंक में पहुंच गया तो राजनीति नहीं करेंगे, उससे लगता है कि उन्होंने अपने लिए कठिन लक्ष्य रखा है. उससे ज़्यादा उन्हें साबित करना होगा कि उनका अपने जाति के वोटरों के ऊपर प्रभाव हैं.

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