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This Article is From Jan 17, 2017

क्या कानपुर रेल हादसे में कोई विदेशी हाथ था? बिहार में छह गिरफ्तार

क्या कानपुर रेल हादसे में कोई विदेशी हाथ था? बिहार में छह गिरफ्तार
कानपुर में ट्रेन एक्सीडेंट बम ब्लास्ट से होने के संकेत मिले हैं. इसमें विदेशी हाथ होने की आशंका है.
  • दो लोगों की हत्या के मामले में गिरफ्तारी के बाद खुलासा
  • पूर्वी चंपारण में बम ब्लास्ट करने में विफल रहे लोगों की हत्या
  • कानपुर में ट्रैन के गुजरने के दौरान किया था बम ब्लास्ट
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पटना: पिछले साल उत्तर प्रदेश के कानपुर में दो ट्रेन हादसे हुए. हालांकि प्रारंभिक जांच में रेल पटरी में दरार को मुख्य कारण बताया गया था लेकिन बिहार के मोतिहारी में दो लोगों की हत्या के सिलसिले में छह लोगों की गिरफ्तारी के बाद इसके पीछे पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई के हाथ से इनकार नहीं किया जा सकता.

दरअसल बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के दो युवक अरुण राम और दीपक राम के शव नेपाल में 28 दिसम्बर को मिले. इस दोहरी हत्या की जांच में लगी मोतिहारी पुलिस ने नेपाल पुलिस के सहयोग से छह लोगों - उमाशंकर पटेल, मोती पासवान, मुकेश यादव, बृजकिशोर गिरी, मुजाहिद अंसारी और शम्भू गिरी को गिरफ्तार किया. इन लोगों ने स्वीकार किया कि अरुण और दीपक की हत्या इन लोगों ने इसलिए कर दी क्योंकि पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन में एक अक्टूबर को रेलवे ट्रैक पर बम ब्लास्ट करना था जिसमें वे विफल रहे. इस काम के लिए दोनों को अच्छी खासी रकम का भुगतान किया गया था. पैसा नहीं लौटाने पर नेपाल में बुलाकर उनकी हत्या कर दी.

पूछताछ के दौरान मोती पासवान ने स्वीकार किया कि न केवल घोड़ासहन बल्कि कानपुर में 20 नवम्बर को हुए रेल हादसे के पीछे भी उनका हाथ है और वहां भी ट्रैन जब गुजर  रही थी तब बम ब्लास्ट किया गया था. मोतिहारी पुलिस का कहना है कि दरअसल रेल हादसे की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस कर रही है इसलिए वे चाहते हैं कि मोती को वे रिमांड पर लेकर आवश्यक कर्रवाई करें.

मोती ने स्वीकार किया कि नेपाल के ही एक व्यक्ति शम्शुल होद्दा ने कानपुर धमाके के लिए उन्हें भुगतान किया था. मान जाता है कि शम्शुल का दुबई में बैठे लोगों से संपर्क है और वह वहां जाता-आता है. शम्शुल पहले भी भारत विरोधी गतिविधियों को सह देने के लिए भारतीय एजेंसियों के निशाने पर रहा है.

उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि मोतिहारी पुलिस की पूछताछ के बाद जल्द ही वह एक टीम भेजेगी और न केवल मोती बल्कि उनके अन्य साथियों के साथ पूछताछ की कोशिश करेगी. सभी गिरफ्तार आरोपियों ने माना है कि न केवल घोड़ासहन बम ब्लास्ट के असफल प्रयास बल्कि दोहरी हत्या में उनके साथ राकेश यादव और गजेंद्र पासवान भी शामिल थे, जो कि फरार चल रहे हैं.

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