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रूस-यूक्रेन जंग शहीद हुए भाई को मोक्ष दिलाने 5200 KM दूर बोधगया पहुंची बहन, नम आंखों से किया पिंडदान

रूस-यूक्रेन युद्ध में शहीद हुए रूसी सैनिक की आत्मा की शांति के लिए उसकी रूस से 5,200 किलोमीटर दूर बिहार के गयाजी पहुंची. बहन ने फल्गु नदी के तट पर वैदिक रीति-रिवाज से भाई का पिंडदान किया.

रूस-यूक्रेन जंग शहीद हुए भाई को मोक्ष दिलाने 5200 KM दूर बोधगया पहुंची बहन, नम आंखों से किया पिंडदान
भाई का पिंडदान करती हुई बहन
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 Russia-Ukraine war martyred brother Pind Daan News: मोक्षभूमि गयाजी में शुक्रवार को एक ऐसा भावुक मंजर देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों को नम कर दिया.  रूस से तकरीबन 5,200 किमी  बिहार के गया में एक परिवार ने अपने एक सदस्य का पिंडदान करने आए थे. वह रशिया की सेना में शामिल था, जिसकी मौत  रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान हुई . 

बहन ने किया शहीद भाई का पिंडदान

इस भावुक कर देने मंजर को लेकर बताया गया कि युद्ध में शहीद होने वाले जवान का नाम फेस टू बाल था. शहीद जवान की याद में उनकी बहन ललिता राधा रानी फेस, जीजा सुंदरा फेस और परिवार के अन्य सदस्य बोध गया पहुंचकर पूरे रीति- रिवाज के साथ धार्मिक अनुष्ठान कर पिंडदान किया. इस दौरान परिवार के अन्य सदस्य भावुक नजर आए.

धार्मिक अनुष्ठान कर पिंडदान किया

धार्मिक अनुष्ठान कर पिंडदान किया
Photo Credit: NDTV

गयाजी में पिंडदान की मान्यता के कारण यहां आए

फल्गु तट पर भावुक कर देने मंजर  इस मंजर को लेकर शहीद जवान के जीजा सुंदरा फेस ने बताया कि युद्ध में उनके साले की मौत के बाद पूरा परिवार टूट चुका है. उन्होंने कहा कि गयाजी में पिंडदान की मान्यता विश्वभर में प्रसिद्ध है और उन्हें विश्वास है कि यहां अनुष्ठान कराने से मृत आत्मा को शांति मिलेगी.

गयाजी में मिलता है आत्मा को मोक्ष

सुंदरा फेस ने कहा हम अपने साले और अपने पिता की आत्मा की शांति के लिए यहां आए हैं. हमारी कामना है कि परिवार में सुख-शांति और खुशहाली बनी रहे. उन्होंने बताया कि रूस में भी लोगों को गयाजी की धार्मिक महत्ता के बारे में जानकारी है. यही कारण है कि वे हजारों किलोमीटर दूर से यहां पहुंचे हैं. 

आत्मा की शांति के लिए होता है पिंडदान

आत्मा की शांति के लिए होता है पिंडदान
Photo Credit: NDTV

पुरोहित ने बताया गयाजी का वैश्विक महत्व

पवित्र फल्गु नदी तट पर पिंडदान की प्रक्रिया स्थानीय पुरोहित कुमार गौरव की देखरेख में संपन्न हुई. उन्होंने बताया कि यह पूरा परिवार रूस से विशेष रूप से गयाजी आया है. पुरोहित कुमार गौरव ने बताया कि गयाजी  आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है.

हर साल विदेशों से पहुंचते हैं श्रद्धालु

गौरतलब है कि पवित्र फल्गु नदी के तट पर हर वर्ष देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने आते हैं. विदेशी श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या गयाजी की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत कर रही है.

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