- नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद राज्यसभा सांसद बनकर अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखी है
- उन्होंने सम्राट चौधरी को बिहार का मुख्यमंत्री बनवाने में निर्णायक भूमिका निभाई
- विजेंद्र यादव, विजय कुमार चौधरी को दो डिप्टी सीएम बनाकर जातीय गठजोड़ पिछड़ा वोट बैंक मजबूत करने की कोशिश की
नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद से हट चुके हैं और अब राज्यसभा के सांसद हैं. मगर अपने पार्टी के निशान तीर की तरह ही अपनी राजनीति कर गए हैं. बहुत बातें कही गईं कि उनके स्वास्थ्य की वजह से वो शायद राजनीतिक फैसले लेने में उतने सक्षम नहीं हैं मगर बिहार की राजनीति में उन्होंने जाते-जाते तीन शिकार कर गए हैं. पहला है सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना. इसमें सबसे बड़ी भूमिका रही है नीतीश कुमार की. बीजेपी में कई नामों पर चर्चा हुई मगर नीतीश कुमार ने सब नामों पर वीटो लगा दिया.
बीजेपी ने सम्राट चौधरी को बनाया सीएम
नीतीश कुमार ने बीजेपी के पास कोई विकल्प ही नहीं छोड़ा सिवाय सम्राट चौधरी के. बीजेपी को भी मालूम है कि बिहार और केंद्र में गठबंधन की सरकार है और दोनों जगह नीतीश कुमार की जरूरत है. जेडीयू के बिना ना तो बिहार में सरकार रहेगी और ना ही केंद्र में इसलिए नीतीश कुमार की बात मानना उनकी मजबूरी थी. बिहार में भी यही चर्चा थी कि कुर्मी मुख्यमंत्री को हटा कर या तो कोई कुर्मी मुख्यमंत्री हो या फिर कोईरी. बीजेपी को भी कोईरी मुख्यमंत्री पसंद आ रहा था कि क्योंकि कुशवाहा और कुर्मी एनडीए के साथ मजबूती से रहे.
यही वजह है कि उपेन्द्र कुशवाहा को बीजेपी ने एनडीए का पांचवा उम्मीदवार बना कर राज्यसभा के लिए जितवाया और अब एक और कुशवाहा को मुख्यमंत्री बनाया. नीतीश कुमार भी लव कुश (कुर्मी-कोईरी) के नेता रहे और जाते-जाते उन्हीं को सत्ता सौंप गए.
ये भी पढ़ें- बिहार में मंत्रालयों के भी 'चौधरी' बने सम्राट... क्या JDU अब सिर्फ 'सहयोगी' भर रह गई?
नीतीश के एक तीर से तीन शिकार
दूसरा सबसे बड़ा निशाना साधा नीतीश कुमार ने दो उपमुख्यमंत्री बना कर. विजेंद्र यादव और विजय कुमार चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया. एक यादव और एक भूमिहार. यह बिहार की राजनीति में एक नया जाति गठजोड़ बनाने का प्रयास है. एक यादव को उपमुख्यमंत्री बना कर अब बिहार की तीन बड़ी पिछड़ी जातियों को एक करने का प्रयास है. यादव,कुर्मी और कुशवाहा गठजोड़ को एक करने से पिछड़ा वोट बैंक और मजबूत होगा.
अगर ऐसा होता है तो राष्ट्रीय जनता दल की राजनीति पर असर पड़ेगा. यह कदम तेजस्वी यादव के लिए चिंता का सबब बनेगा. उत्तर बिहार के यादवों के चार बड़े जिलों–सहरसा, सुपौल, मधेपुरा और खगड़िया को नीतीश कुमार ने टारगेट किया है. इन जिलों के लोग जिस विश्वास के आधार पर जदयू को वोट करते थे, आज उसका कर्ज भी नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक विदाई में विजेंद्र यादव को डिप्टी सीएम बनाकर उतारने की कोशिश की है.
बिहार को दिया सर्वण जाति का डिप्टी सीएम
सीधे तौर पर तेजस्वी यादव और राष्ट्रीय जनता दल की राजनीति को विजेंद्र यादव को डिप्टी सीएम बनाकर चुनौती देने की कोशिश की गई है. नीतीश कुमार ने एक और तीर चलाया जो सीधे निशाने पर लगाया है. वो है सर्वण जाति से उपमुख्यमंत्री बनाना. सवर्णों में सबसे ज्यादा मुखर और लोगों को प्रभावित करने वाली जाति भूमिहार है. पिछले कई दशकों से यह जाति अपने आप को हाशिए पर पा रही थी मगर नीतीश कुमार ने इस जाति से उपमुख्यमंत्री बना कर भूमिहार समाज को ना केवल शांत करने के कोशिश की साथ ही उसे राजनीतिक संजीवनी भी दे दी है.
नीतीश कुमार ने विजय कुमार चौधरी के रूप में दूसरा डिप्टी सीएम देकर बिहार के समाज में संतुलन बनाने की कोशिश की है. अब आने वाला समय बताएगा कि नीतीश कुमार की यह धुरंधर राजनीतिक चतुराई वाली चाल कितनी सफल होती है, और सामाजिक तौर पर राष्ट्रीय जनता दल और बीजपी को कितना कमजोर करती है या जदयू को मजबूत करती है.
अतिपिछड़ा वर्ग की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे नीतीश
मगर एक तीर जो नीतीश कुमार चूक गए वो है उनका अति पिछड़ा वर्ग. इस वर्ग को नीतीश कुमार ने ही अपने वोट बैंक की तरह बनाया और यह वर्ग उनके साथ हमेशा खड़ा रहा. मगर हमेशा चट्टान कि तरह खड़े रहने वाले अतिपिछड़ा वर्ग को इस नई सरकार में सबसे ज़्यादा मायूसी मिली है. नीतीश कुमार ने अपने राजनीति जीवन में जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री बनाकर दलित और महादलित समाज को भी बड़ा राजनीतिक लाभ दिया पर अतिपिछड़ा समाज को हमेशा सर्वोच्च राजनीतिक पद देने में बचते रहे.
पूरे बिहार के राजनीतिक विश्लेषकों को लगता था कि नीतीश जाते-जाते बीजेपी के साथ मिलकर अतिपिछड़ा मुख्यमंत्री देंगे पर ऐसा नहीं हुआ. अति पिछड़ा उपमुख्यमंत्री की बात बहुत जोड़ शोर से आरजेडी ने विधानसभा चुनाव में की थी. फिर भी अतिपिछड़ा समाज ने नीतीश कुमार पर भरोसा जताया लेकिन नीतीश ने अति पिछड़ा वर्ग से उपमुख्यमंत्री नहीं बना कर सर्वण भूमिहार को चुना. बिहार में अब एक नया मुख्यमंत्री है और नई सरकार है. नीतीश कुमार ने अभी भी इस फेरबदल के बाद अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखी है. अब देखना होगा कि बीजेपी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी नीतीश कुमार के साए से कब निकल पाते हैं.
ये भी पढें-बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सत्ता के शिखर तक का सफर कुछ यूं किया तय
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं