Bihar News: गंगा नदी पर बने विक्रमशिला पुल हादसे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक्शन में नजर आ रहे हैं. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पुल के स्पेन टूटने पर की जा रही कार्रवाई की समीक्षा बैठक के बाद मंगलवार को पुल का हवाई निरीक्षण किया. इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी थे. इससे पहले समीक्षा बैठक में सीएम सम्राट ने विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के कारण यातायात बहाली के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. साथ ही मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक्सपर्ट से टेक्नीकल मंजूरी लेकर पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक करने का काम शुरू किया जाए.
सभी पुलों के रखरखाव के निर्देश
04 अप्रैल को हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जिला प्रशासन, पुलिस एवं ट्रैफिक पुलिस की मुस्तैदी के कारण इस घटना में किसी भी प्रकार की जान-माल की क्षति नहीं हुई. उन्होंने ने गंगा नदी पर इस पुल के समानांतर बनाए जा रहे नए 4-लेन ब्रिज के निर्माण कार्य को तेजी से पूर्ण करने का भी निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि सभी पुलों का समुचित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए. रखरखाव में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

3 मई की रात को टूटा था पिलर
दरअसल, भागलपुर में गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु का एक पिलर रविवार देर रात करीब 1:10 बजे ध्वस्त हो गया, जिस पर उस पर टिका स्लैब भी पूरी तरह गंगा नदी में समा गया. देर रात हुए इस हादसे के तुरंत बाद समय रहते पुलिस और प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए आवाजाही रोक दी थी, जिससे स्लैब गिरने के दौरान कोई वाहन उसकी चपेट में नहीं आया और बड़ा नुकसान टल गया.पुल टूटने से नवगछिया और भागलपुर के बीच का संपर्क टूट गया है.
देर रात वहां मौजूद भागलपुर जिले के थाना बिहपुर निवासी ऋषव मिश्रा ने NDTV को बताया कि पुल के दिन में ही हल्का क्षतिग्रस्त होने की सूचना आ रही थी और देर रात पुल का एक बड़ा हिस्सा (स्पैन) नदी में समा गया. रविवार रात करीब 11:33 बजे से पिलर नंबर 133 अचानक बैठना शुरू हुआ. रात 11:55 बजे तक पाया काफी हद तक झुक गया था और आखिरकार, देर रात 1:10 बजे वो पिलर पाया पूरी तरह ध्वस्त होकर गंगा में विलीन हो गया.
2001 में इस पुल का हुआ था उद्घाटन
बता दें कि विक्रमशिला सेतु का उद्घाटन साल 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने किया था. इस पुल की लंबाई 4.7 किलोमीटर है और यह उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला पुल है. जानकारी के मुताबिक, 5 देशरत्न मार्ग पर गंगा नदी पर बना यह पुल हर दिन एक लाख से ज्यादा लोगों की आवाजाही का माध्यम था.
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