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This Article is From Jul 28, 2016

व्यापम घोटाला : फंसे छात्रों का मामला पुरानी बेंच के पास भेजा गया

व्यापम घोटाला : फंसे छात्रों का मामला पुरानी बेंच के पास भेजा गया
  • तीन जजों की बेंच दोबारा सुनवाई का आदेश नहीं दे सकती
  • व्यापम मामले में छात्रों की अर्जी पर दिया फैसला
  • मेडिकल छात्रों को परीक्षा में गड़बड़ी के तहत दाखिला मिला
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने व्यापम घोटाले से जुड़े 268 एमबीबीएस छात्रों की याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट की ही तीन जजों की बेंच के फैसले पर सवाल उठाए हैं. कहा है कि तीन जजों की बेंच किसी मामले में दो जजों की बेंच को दोबारा सुनवाई का आदेश नहीं दे सकती. कोर्ट ने कहा है कि ऐसा आदेश देश के संविधान या किसी कानून के तहत नहीं दिया जा सकता. कोर्ट ने यह भी कहा कि तीन जजों की बेंच में यह लिखा है कि दोनों जजों में एक राय नहीं थी, जो तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है.

जस्टिस जे चेलमेश्वर और जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने यह फैसला 28 जुलाई के जस्टिस जेएस खेहर की अगुवाई वाली बेंच के व्यापम मामले को फिर से भेजे जाने पर सुनाया है. कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि दोनों जज इस बात पर सहमत थे कि सभी मेडिकल छात्रों को परीक्षा में गड़बड़ी के तहत दाखिला मिला. हालांकि सजा पर दोनों के मत अलग थे इसलिए मामले को बड़ी बेंच को भेजा गया था. इस फैसले के साथ ही इन छात्रों का भविष्य अधर में ही रहेगा.अब उन्हें राहत मिले या नहीं,  यह तीन जजों की बेंच तय करेगी.

दरअसल व्यापम घोटाले से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने 12 मई को अहम फैसला सुनाया था. दो जजों की बेंच ने दो अलग-अलग फैसले सुनाए. फैसले सामूहिक नकल मे जुड़े 634 छात्रों के संबंध में थे. सुनवाई कर रहे जस्टिस जे चेलमेश्वर ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए कहा था कि जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी 634 छात्रों को ग्रेजुएशन पूरा होने के बाद पांच साल तक भारतीय सेना के लिए बिना किसी वेतन के काम करना पड़ेगा. पांच साल पूरे होने पर ही उन्हें डिग्री दी जाएगी. इस दौरान उन्हें केवल गुजारा भत्ता दिया जाएगा. वहीं जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए छात्रों की अपील को खारिज कर दिया था. मामला तीन जजों की बेंच को भेजा गया लेकिन इस बेंच ने 28 जुलाई को वापस मामले को पुरानी बेंच में भेज दिया ताकि यह साफ हो सके कि क्या दो जजों की बेंच ने छात्रों को सामूहिक नकल का दोषी माना है? इसी पर दो जजों की बेंच ने अपना फैसला सुनाया है.  

दरअसल मध्य प्रदेश के व्यापम मे सामूहिक नकल की बात सामने आने पर 2008-2012 के छात्रों के बैच का एडमीशन रद्द कर दिया गया था. इसके बाद सभी छात्रों ने कोर्ट से इस मामले में दखल देने की अपील की थी.

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