सिद्धा हाथी
- 'सिद्धा' के आगे का दाहिना पांव जख्मी, अधिकांश समय रहता है पानी में
- पानी में शरीर का वजन हल्का होने की वजह से दर्द कम होता है
- पानी में रहने से इसके शरीर और पैर पर काफी बुरा असर पड़ रहा है
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बंगलुरु:
बंगलुरु से करीब 45 किलोमीटर दूर मंचिंबेले बांध में ये हाथी ज्यादातर वक़्त बिताता है क्योंकि इसके आगे का दाहिना पांव जख्मी है और पानी में शरीर का वजन हल्का होने की वजह से दर्द कम होता है, ऐसे में ये हाथी अधिकांश समय पानी में रहना पसंद करता है. हालांकि पानी में रहने से इसके शरीर पैर पर काफी बुरा असर पड़ रहा है.
सूंढ़ के आसपास का हिस्सा ऐसा लगता है जैसे गल रहा हो. जब इसे भूख लगती है तो ये आसपास के खेतों की फसल खा लेता है. इससे गाव वाले नाराज़ हैं लेकिन उनकी हमदर्दी इस बेज़ुबान घायल जानवर से है इसलिए वे इसे परेशान नहीं कर रहे हैं.
जब ये खबर फैली तो कुछ युवक सामने आए. उन्होंने पैसे जुटाए और इस हाथी के लिए खाने का बंदोबस्त कर रहे हैं. इनमें से एक दयाननद ने बताया कि वन विभाग की तरफ से इस हाथी के इलाज के लिए अभी तक पहल नहीं की गई है. हालांकि मौके पर हमें वन विभाग के रैपिड एक्शन फोर्स की एक ट्रॉली दिखी जो इस हांथी को खाना देते हैं लेकिन अब तक इलाज के लिए कुछ नहीं किया गया है.
जब हमने इस सिलसिले में राज्य के वन मंत्री रामनाथ राय से बात की तो उन्होंने बताया कि वन विभाग की तरफ से एक समिति गठित की गई है जो इस सिलसिले में फैसला लेगी कि किस तरह सिद्धा नाम के हाथी का इलाज किया जाए.
काफी वक़्त बीत चुका है ऐसे में दिनोंदिन इसकी हालात खराब हो रही है. ऐसा माना जा रहा है कि मैसूर दशहरा की वजह से सभी प्रशिक्षित हाथी फिलहाल मैसूर में हैं. अगले एक दो दिनों में वहां से निकलने के बाद दो तीन हाथियों को यहां लाया जाएगा ताकि इस जंगली हांथी को काबू में रख जा सके और तभी उसका इलाज शरू हो पाएगा.
सूंढ़ के आसपास का हिस्सा ऐसा लगता है जैसे गल रहा हो. जब इसे भूख लगती है तो ये आसपास के खेतों की फसल खा लेता है. इससे गाव वाले नाराज़ हैं लेकिन उनकी हमदर्दी इस बेज़ुबान घायल जानवर से है इसलिए वे इसे परेशान नहीं कर रहे हैं.
जब ये खबर फैली तो कुछ युवक सामने आए. उन्होंने पैसे जुटाए और इस हाथी के लिए खाने का बंदोबस्त कर रहे हैं. इनमें से एक दयाननद ने बताया कि वन विभाग की तरफ से इस हाथी के इलाज के लिए अभी तक पहल नहीं की गई है. हालांकि मौके पर हमें वन विभाग के रैपिड एक्शन फोर्स की एक ट्रॉली दिखी जो इस हांथी को खाना देते हैं लेकिन अब तक इलाज के लिए कुछ नहीं किया गया है.
जब हमने इस सिलसिले में राज्य के वन मंत्री रामनाथ राय से बात की तो उन्होंने बताया कि वन विभाग की तरफ से एक समिति गठित की गई है जो इस सिलसिले में फैसला लेगी कि किस तरह सिद्धा नाम के हाथी का इलाज किया जाए.
काफी वक़्त बीत चुका है ऐसे में दिनोंदिन इसकी हालात खराब हो रही है. ऐसा माना जा रहा है कि मैसूर दशहरा की वजह से सभी प्रशिक्षित हाथी फिलहाल मैसूर में हैं. अगले एक दो दिनों में वहां से निकलने के बाद दो तीन हाथियों को यहां लाया जाएगा ताकि इस जंगली हांथी को काबू में रख जा सके और तभी उसका इलाज शरू हो पाएगा.
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