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प्रियदर्शन

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    राइटर को गोली मारी, अब उसका स्मारक जलाया- ऐसे महान बनेगा अमेरिका?

    इस हत्या की पूरे अमेरिका में तीखी प्रतिक्रिया हुई. लेकिन फेडरल एजेंसियों ने गोली चलाए जाने को सही ठहराया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि यह आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई थी- यह महिला पुलिसवाले को कुचलने का इरादा रखती थी. ट्रंप के मुताबिक पुलिसवाला अस्पताल पहुंच गया. हालांकि वीडियो बताते हैं कि यह भी ट्रंप का एक और झूठ भर है.

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    सौ साल बाद के लिए अभी लिखी जा रही किताबें

    फ्यूचर लाइब्रेरी ऐसी ही विराट परियोजना है जिसका इरादा हमारे समय की सर्वश्रेष्ठ रचनात्मकता और कल्पनाशीलता को एक सदी के बाद के पाठकों के लिए बचाए रखने का है. वैसे यह सच है कि  दुनिया जितनी तेज़ी से बदलती है, उतनी ही ज़िद के साथ पुरानेपन से जकड़ी भी रहती है.

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    दुष्यंत की कोशिश थी कि ये सूरत बदलनी चाहिए- उन्होंने ग़ज़लों की बिल्कुल नई लकीर खींची

    अचानक यह बात समझ में आती है कि उर्दू में फ़ैज़ जिस बात के लिए सराहे जाते हैं- रोमानियत और राजनीति को मिलाने के लिए, उसे शायद हिंदी में दुष्यंत कुमार ने कुछ और गाढ़ेपन के साथ साधने में कामयाबी हासिल की है.

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    धुरंधर के मुक़ाबले इक्कीस

    अगर उन्माद के बीच विवेक की आवाज़ सुननी हो तो ‘इक्कीस’ भी देखें. सच तो यह है कि इस फिल्म की नाकामी हमारे विवेक की भी नाकामी है.

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    ईरानी लड़कियों के सीने में जलती है एक आग

    ईरान में लड़कियों अपने दमन और उत्पीड़न की परवाह किए बिना, अपने कटे होंठों से बहते लहू के साथ मोर्चे पर हैं, ईरान को बदलने की बात कर रही हैं. वैसे ईरान में लड़कियों की यह जुझारू भूमिका नई नहीं है.

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    क्या नेताओं का अहंकार इस दुनिया को नष्ट कर देगा?

    दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जो नई विश्व-व्यवस्था बनी थी, वह दो ध्रुवों में बंटी हुई एक शीतयुद्ध लड़ती रही. लेकिन सोवियत संघ के पतन के बाद अमेरिका के एकाधिकार की छुपी हुई कोशिशें अब बिल्कुल स्पष्ट घोषणाओं में बदल चुकी हैं.

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    दिल्ली बुक फेयर में लाखों नई किताबें, AI और इंटरनेट पर दुनिया भर के कंटेंट के बावजूद कैसे टिकी हैं पुस्तकें

    किताबों ने हमें देखना सिखाया है. किताबें ख़ूब ख़रीदें. यह अनुभव आम है कि हम जितनी किताबें ख़रीदते हैं, उतनी पढ़ नहीं पाते. लेकिन किताबों का घर में होना आश्वस्त करता है कि किसी भी दिन हम चाहें तो उन्हें पलटेंगे. किताबें भी हमें अपनी आलमारियों से देखती रहती हैं.

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    स्मृतिशेष ज्ञानरंजन: हिंदी की ऊष्मा और ऊर्जा का एक स्रोत चला गया

    वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार ज्ञानरंजन का आज 89 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्हें उनकी कहानियों के साथ-साथ 'पहल' नाम की साहित्य पत्रिका के संपादन के लिए भी याद किया जाएगा.

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    वेनेजुएला पर हमला: न ड्रग्स, न तेल, डॉलर से बैर ने मादुरो को लगवाई हथकड़ी? सद्दाम से गद्दाफी तक यही कहानी

    अमेरिका की इस दादागीरी के खिलाफ दुनिया खड़ी नहीं होगी तो उसे और भी अलग-अलग रूपों में झेलने को मजबूर होगी. दूसरे देशों के साथ कारोबार में मनमाने टैरिफ, अमेरिका के वीजा नियमों में मनचाहे बदलाव आदि इसी दादागीरी के अन्य रूप हैं.

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    21वीं सदी के 25 साल, कितने कमाल-कितने मलाल

    वैसे इन पच्चीस वर्षों में जितने त्वरित बदलाव दिख रहे हैं, उतने ही ज़िद्दी ठहराव भी नज़र आ रहे हैं. जिन बीमारियों को हम उन्नीसवीं सदी में ख़त्म मान ले रहे थे, वे इक्कीसवीं सदी में प्रगट हो रही हैं. जिन बहसों को बीती सदी में बीत जाना चाहिए था, वे नई धमक के साथ मौजूद हैं.