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This Article is From Dec 13, 2018

राजस्थान: देश के पहले और इकलौते 'गाय मंत्री' भी नहीं बचा पाए अपनी सीट, जानें- क्या रही हार की वजह

हमेशा पारंपरिक वेशभूषा में नजर आने वाले देवासी लाल पगड़ी और सफेद धोती पहनते हैं. देवासी नेता होने के साथ-साथ अध्यात्म से भी जुड़े हुए हैं.

राजस्थान: देश के पहले और इकलौते 'गाय मंत्री' भी नहीं बचा पाए अपनी सीट, जानें- क्या रही हार की वजह
ओटाराम देवासी.
  • काफी विवादों में रहा था इनका कार्यकाल
  • निर्दलीय उम्मीदवार ने हराया.
  • सिरोही सीट से थे चुनाव के मैदान में
जयपुर: राजस्थान विधानसभा चुनाव में देश के पहले और इकलौते गाय मंत्री ओटाराम देवासी भी अपनी सीट नहीं बचा पाए. सिरोही सीट से चुनावी मैदान में उतरे देवासी को निर्दलीय उम्मीदवार ने करीब 10 हजार वोटों से हरा दिया. बतौर गाय मंत्री देवासी का कार्यकाल काफी विवादों में रहा है. उनके कार्यकाल में भूख और बीमारी की वजह से सैंकड़ों गायों की मौत हुई थी. हमेशा पारंपरिक वेशभूषा में नजर आने वाले देवासी लाल पगड़ी और सफेद धोती पहनते हैं. देवासी नेता होने के साथ-साथ अध्यात्म से भी जुड़े हुए हैं.

देवासी ने साल 2008 में सिरोही विधानसभा से चुनाव लड़ा था और साल 2013 में भी इसी सीट से जीते थे. लेकिन इस बार निर्दलीय उम्मीदवार संयम लोढ़ा ने उन्हें दस हजार वोट से हरा दिया. देवासी को 71019 वोट मिले, जबकि लोढ़ा को 81272 वोट हासिल किए. 

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साल 2015 में देश का पहला गौ पालन मंत्रालाय राजस्थान में बनाया गया था और पुलिसकर्मी से राजनेता बने ओटाराम देवासी को इसका मंत्री बनाया गया. देवासी ने राज्य में आवारा घूम रहीं गायों के लिए फंड इकट्ठा करने को नई प्रॉपर्टी खरीदने वालों पर 'गाय कर' के रूप में 20 फीसदी सरचार्ज लगाने का फैसला किया था. लेकिन राज्य सरकार द्वारा संचालित गऊशाला में करीब 500 गायों की मौत की वजह से उनकी छवि खराब हुई थी. इन गऊशाला में भारी बारिश के वक्त बाढ़ जैसे हालात बन रहे थे. जिस राज्य में गौ हत्या करने पर 10 साल की सजा है, वहां अगस्त महीने में फिर 28 गायों की मौत हो गई, इससे भी उनकी छवि और धूमिल हुई थी.
 
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देवासी नेता होने के साथ-साथ अध्यात्म से भी जुड़े हुए हैं.​

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पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में गौरक्षा के नाम पर हिंसा की कई घटनाएं देखने को मिली. इतना ही नहीं बीफ ले जाने या गौ हत्या के आरोप में कई लोगों की हत्या करने के मामले भी सामने आए थे. पिछले साल अलवर में हाईवे पर एक मुस्लिम युवक की भीड़ ने हत्या कर दी थी. वह मुस्लिम युवक अपनी डेयरी के लिए गाय ले जा रहा था, उस पर आरोप लगाया गया कि वह गौहत्या के लिए इन्हें ले जा रहा है. अलवर के मेवात क्षेत्र में गौहत्या के नाम पर ज्यादा घटनाएं देखने को मिलीं. गायों की दुर्गति और गाय के नाम पर होने वाली हिंसा की घटनाओं को देवासी की हार की वजहों के रूप में देखा जा रहा है. 

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राजस्थान में भाजपा ने गौहत्या पर कठोर कानून और गऊशाला के लिए ज्यादा फंड देने के नाम पर प्रचार किया था. लेकिन कांग्रेस ने यहां भाजपा को हरा दिया. राजस्थान की 200 सीटों में से कांग्रेस को 99 मिलीं, जबकि भाजपा के हिस्से में 73 सीटें आईं. इसके अलावा भाजपा शासित छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा. 

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