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आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका का कदम, AQIS नेता आतिफ याह्या गौरी पर 84 करोड़ का इनाम

अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए अल कायदा की दक्षिण एशिया शाखा AQIS के डिप्टी हेड आतिफ याह्या गौरी पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित किया है. यह इनाम गौरी के ठिकाने, नेटवर्क, फंडिंग या गतिविधियों से जुड़ी पुख्ता जानकारी देने पर दिया जाएगा.

आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका का कदम, AQIS नेता आतिफ याह्या गौरी पर 84 करोड़ का इनाम
  • अमेरिका ने अल-कायदा की दक्षिण एशिया शाखा के डिप्टी हेड आतिफ याह्या गौरी पर दस मिलियन डॉलर का इनाम घोषित किया
  • AQIS की स्थापना 2014 में अल-कायदा के सरगना अयमान अल-जवाहिरी के निर्देश पर हुई थी
  • आतिफ याह्या गौरी पाकिस्तान के इस्लामाबाद में जन्मा है और उन्होंने कट्टरपंथी विचारधारा अपना ली

अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है. अमेरिका सरकार ने अल‑कायदा की दक्षिण एशिया शाखा अल‑कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) के डिप्टी हेड आतिफ याह्या गौरी पर 10 मिलियन डॉलर यानी करीब 84 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया है. अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि आतिफ याह्या गौरी AQIS का डिप्टी अमीर है और लंबे समय से संगठन की आतंकी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है. यह इनाम उस व्यक्ति या समूह को दिया जाएगा, जो भी गौरी के ठिकाने, उसके नेटवर्क, फंडिंग या उसकी गतिविधियों से जुड़ी पुख्ता और उपयोगी जानकारी मुहैया कराएगा.

AQIS की स्थापना और गौरी की भूमिका

AQIS दरअसल अल‑कायदा का वह विंग है, जो विशेष रूप से दक्षिण एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. संगठन की स्थापना साल 2014 में अल‑कायदा के तत्कालीन सरगना अयमान अल‑जवाहिरी के निर्देश पर की गई थी. इसका उद्देश्य भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और आसपास के इलाकों में पश्चिमी प्रभाव को खत्म करना और सख्त सुन्नी इस्लामी कानून के तहत एक एकीकृत इस्लामिक अमीरात की स्थापना करना रहा है. संगठन की शुरुआती कमान आसिम उमर के हाथों में थी, जबकि आतिफ याह्या गौरी उनके डिप्टी के रूप में काम करता था. जानकारी के अनुसार, जनवरी 2015 में अमेरिकी ड्रोन हमले में AQIS से जुड़े अहमद फारूक के मारे जाने के बाद आतिफ याह्या गौरी को डिप्टी अमीर बनाया गया.

गौरी की पृष्ठभूमि और आतंकी गतिविधियां

गौरी का जन्म पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुआ था और उसने इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की. शिक्षा पूरी करने के बाद वह कट्टरपंथी विचारधारा की ओर झुक गया और धीरे‑धीरे आतंकी संगठनों से जुड़ता गया. बताया जाता है कि वह लंबे समय से AQIS के ऑपरेशनों की योजना बनाने, नेटवर्क फैलाने और आतंकियों की भर्ती जैसे कामों में अहम भूमिका निभाता रहा है. AQIS का नाम कई बड़े आतंकी हमलों में सामने आ चुका है. फरवरी 2015 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक अमेरिकी‑बांग्लादेशी दंपत्ति पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया था, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं.

AQIS से जुड़े हमले और अमेरिकी रुख

इसके अलावा अप्रैल 2016 में अमेरिकी एजेंसी USAID की एक महिला कर्मचारी और उसके साथी की हत्या भी इसी संगठन से जुड़ी मानी जाती है. साल 2015 में हुए एक अन्य हमले में एक अमेरिकी नागरिक की भी हत्या हुई थी, जिससे AQIS को एक खतरनाक और संगठित आतंकी नेटवर्क के रूप में देखा जाने लगा. अमेरिकी विदेश विभाग ने साफ किया है कि आतिफ याह्या गौरी जैसे आतंकियों को पकड़ना वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है. इसी उद्देश्य से ‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस' कार्यक्रम के तहत यह इनाम घोषित किया गया है. सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि अगर किसी के पास गौरी से जुड़ी कोई भी विश्वसनीय जानकारी है, तो वह आगे आए और संबंधित एजेंसियों को सूचित करे.

जानकारी देने वालों को गोपनीय सुरक्षा

जानकारी देने के लिए सुरक्षित डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है. सिग्नल, टेलीग्राम और व्हाट्सऐप जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए सूचना साझा की जा सकती है. अमेरिकी अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी. कुल मिलाकर, अमेरिका का यह कदम यह संकेत देता है कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी वैश्विक लड़ाई में किसी भी तरह की ढील नहीं बरतना चाहता. खासकर दक्षिण एशिया में सक्रिय आतंकी संगठनों के खिलाफ सख्ती बढ़ाने की दिशा में यह इनाम एक अहम कदम माना जा रहा है.
 

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