रूस और चीन ने शुक्रवार को गाजा में युद्धविराम (Ceasefire) पर सुरक्षा परिषद (Security Council) में अमेरिका के नेतृत्व वाले मसौदा प्रस्ताव को वीटो कर दिया. साथ ही मॉस्को ने वाशिंगटन पर इजरायल पर दबाव नहीं डालने और "पाखंड का तमाशा" करने का आरोप लगाया.
इजरायल के मुख्य सहयोगी अमेरिका ने युद्धविराम की पिछली अपीलों को वीटो कर दिया था. उसने अब इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया है जिसमें पहली बार "तत्काल और निरंतर युद्धविराम की अनिवार्यता" का समर्थन किया गया है और सात अक्टूबर के हमले के लिए हमास की निंदा करने की बात है.
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प्रस्ताव पर रूस और चीन ने अपने वीटो का प्रयोग किया, अल्जीरिया ने भी इसके खिलाफ मतदान किया और गुयाना गैरमौजूद रहा. सुरक्षा परिषद के अन्य 11 सदस्यों ने पक्ष में मतदान किया, जिनमें स्थायी सदस्य फ्रांस और ब्रिटेन भी शामिल हैं.
रूस के राजदूत वासिली नेबेंज़िया ने कहा कि अमेरिका इजरायल पर लगाम लगाने के लिए कुछ नहीं कर रहा है. उन्होंने "गाजा को पृथ्वी से लगभग मिटा दिए जाने" के बाद युद्धविराम की बात करने के लिए वाशिंगटन का मज़ाक उड़ाया. उन्होंने कहा, "हमने एक विशिष्ट पाखंडी तमाशा देखा है."
उन्होंने कहा, "अमेरिका ने अत्यधिक राजनीतिकरण किया गया है, जिसका एक मात्र उद्देश्य मतदाताओं को लुभाना और गाजा में युद्धविराम के किसी प्रकार का जिक्र करके उन्हें परेशान करना है."
यह प्रस्ताव "इज़रायल को दंड से मुक्ति सुनिश्चित करेगा, जिसके अपराधों का मसौदे में मूल्यांकन भी नहीं किया गया है."
यह मसौदा हमास द्वारा बंधकों को रिहा करने के बदले में युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका और मिस्र के समर्थन से कतर के नेतृत्व में चल रही बातचीत से युद्धविराम को जोड़ता है.
अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफ़ील्ड ने रूसी और चीनी वीटो को "न केवल निंदनीय" बल्कि "तुच्छ" भी कहा. उन्होंने कहा, "रूस और चीन अमेरिका द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव के लिए मतदान नहीं करना चाहते थे."
अमेरिकी राजदूत ने कहा, "आइए ईमानदार रहें, सभी उग्र बयानबाजी के बावजूद, हम सभी जानते हैं कि रूस और चीन स्थायी शांति को आगे बढ़ाने या मानवीय प्रतिक्रिया प्रयास में सार्थक योगदान देने के लिए कूटनीतिक रूप से कुछ भी नहीं कर रहे हैं."
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