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फ्रांस में ‘अवैध’ प्रदर्शनों पर रोक लगाने की तैयारी में मैक्रों, खुद बताया-किन्हें मिलेगी अनुमति

फ्रांस के मुख्य छात्र संगठन, UNEF ने भी शनिवार को रैलियां निकालने का आह्वान किया है. फ्रांसीसी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा की आशंका को देखते हुए मध्य पेरिस और अन्य शहरों में कारोबारियों ने अपनी दुकानों की खिड़कियों को ढकना और निजी सुरक्षाकर्मियों को काम पर रखना शुरू कर दिया है.

फ्रांस में ‘अवैध’ प्रदर्शनों पर रोक लगाने की तैयारी में मैक्रों, खुद बताया-किन्हें मिलेगी अनुमति
मैक्रों अब हिंसक प्रदर्शनों को काबू करने के लिए सख्त रुख अपनाने वाले हैं. (फोटो-एनडीटीवी)
  • फ्रांस के राष्ट्रपतिने अवैध प्रदर्शनों पर रोक लगाने का फैसला किया है ताकि देश में शांति बहाल की जा सके
  • मान्यता प्राप्त समूहों के प्रदर्शन की अनुमति दी जाएगी लेकिन उनके मार्गों में बदलाव संभव होगा
  • हिंसा के लिए अति-वामपंथी समूहों और उपद्रवियों को जिम्मेदार ठहराया गया है जो गणतंत्र को कमजोर करना चाहते हैं

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि आने वाले दिनों में "अवैध" प्रदर्शनों पर रोक लगा दी जाएगी. फ्रांस में हाल ही में 'जीवन-यापन की लागत' (महंगाई) को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पिछले कुछ वर्षों की सबसे भीषण हिंसा देखने को मिली, जिसके बाद देश में अशांति को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है.

खुफिया प्रमुखों और वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक के बाद, फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने गुरुवार को कहा कि मान्यता प्राप्त समूहों द्वारा आयोजित प्रदर्शनों की अनुमति दी जाएगी, हालांकि उनके रास्ते बदले जा सकते हैं.

मैक्रों ने कहा कि "ऐसे व्यक्तियों या समूहों" द्वारा किए जाने वाले प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा, जिनके पास कोई "वैध अधिकार" नहीं है. ट्रेड यूनियनों जैसे संगठनों के आवेदनों की "कानून के अनुसार जांच" की जाएगी, लेकिन उन्हें प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि शहर के केंद्रों, व्यवसायों और सार्वजनिक इमारतों की सुरक्षा के लिए ये कदम जरूरी थे. उन्होंने आगे कहा: "नियम सरल हैं और मुझे लगता है कि ये सामान्य समझ की बात हैं. आम सलाह यही है कि आने वाले दिनों में कोई प्रदर्शन नहीं होना चाहिए."

हिंसा का किसे बताया जिम्मेदार

मैक्रों ने पिछले सप्ताहांत हुई अशांति और लूटपाट के लिए मुख्य रूप से उन उपद्रवियों को जिम्मेदार ठहराया जो खास तौर पर लूटपाट करने आए थे. उन्होंने कहा कि हिंसा का सबसे बुरा रूप "अति-वामपंथी समूहों की राजनीतिक और देशद्रोही हरकतों" के कारण देखने को मिला, जिनका मकसद "गणतंत्र को गिराना" था. उन्होंने कहा, "हमारी प्राथमिकता शांति बहाल करना है." उन्होंने बताया कि वह शुक्रवार को प्रमुख मंत्रियों के साथ रक्षा परिषद की एक बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें शनिवार और उसके बाद होने वाले देशव्यापी प्रदर्शनों को लेकर ठोस "अगले कदम" तय किए जाएंगे.

पेरिस में गुरुवार को छात्रों के एक प्रस्तावित प्रदर्शन पर पुलिस ने रोक लगा दी थी, जिसे अदालत ने पलट दिया. हालांकि, ग्रेनोबल, रूएन, ले हावरे और टूलॉन में उसी दिन होने वाले मार्च को रोक दिया गया. फ्रांस के तीसरे सबसे बड़े शहर, ल्योन के केंद्र में अधिकारियों ने शनिवार को “सभी तरह के विरोध-प्रदर्शनों” पर प्रतिबंध लगा दिया है. पिछले सप्ताहांत यहां 200 से 300 दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई थी, और पर्यटक कार्यालय में आग लगा दी गई थी.

कारोबारी भी प्रदर्शन को लेकर सतर्क

मार्सेई, नीस और टूलॉन के अधिकारियों ने भी शनिवार के लिए इसी तरह के प्रतिबंधों की घोषणा की है. पेरिस में, राजधानी के पूर्वी हिस्से में 'प्लेस डे ला बास्टिल' से शुरू होने वाले एक मार्च को अनुमति तो दी गई, लेकिन उसे शहर के केंद्र में जाने से रोक दिया गया. हालांकि, राजधानी के अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को छात्रों और 'जिले जौन' (येलो वेस्ट) आंदोलन के कुछ सदस्यों द्वारा राजधानी में निकाले जाने वाले एक अलग मार्च को अनुमति नहीं दी जाएगी. गौरतलब है कि ईंधन की कीमतों को लेकर इसी आंदोलन ने 2018 और 2019 में पूरे फ्रांस को हिलाकर रख दिया था.

फ्रांस के मुख्य छात्र संगठन, UNEF ने भी शनिवार को रैलियां निकालने का आह्वान किया है. फ्रांसीसी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा की आशंका को देखते हुए मध्य पेरिस और अन्य शहरों में कारोबारियों ने अपनी दुकानों की खिड़कियों को ढकना और निजी सुरक्षाकर्मियों को काम पर रखना शुरू कर दिया है.

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