- डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों को अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना शुरू किया है
- ट्रंप ने कहा कि पेरिस जल्द ही मुस्लिम बहुल शहर बन जाएगा, फ्रांस पर प्रवासियों- कम्युनिस्टों का कब्जा हो रहा है
- अमेरिकी वोटरों के लिए घरेलू मुद्दे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं पर कम प्रभाव डालेंगी- एक्सपर्ट
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस में चल रहे हिंसक विरोध-प्रदर्शनों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए करना शुरू कर दिया है. ट्रंप ने यह पैंतरा उस समय में अपनाया है जब अमेरिका में होने जा रहे मध्यावधि चुनावों में उनकी रिपब्लिकन पार्टी को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. वैसे तो ट्रंप पहले से ही अपने कट्टरपंथी बयानों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन अब वह एक कदम और आगे बढ़ गए हैं. अमेरिका के कंसास में एक रैली के दौरान, अमेरिकी राष्ट्रपति ने फ्रांस को लेकर तीखी आलोचना की. उन्होंने यहां तक कह दिया कि पेरिस बहुत जल्द एक मुस्लिम शहर बन जाएगा.
ट्रंप क्या कह रहे हैं?
ट्रंप ने कहा कि फ्रांस पर प्रवासियों, जिहादियों और कम्युनिस्टों का कब्जा हो रहा है. वहां लूटपाट हो रही है और सब कुछ जलाया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा, "हम अपने देश में ऐसा नहीं होने देंगे." दिन में पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ हुई अपनी एक पुरानी बातचीत का जिक्र किया, "मैंने उनसे बहुत पहले ही कह दिया था कि आप फ्रांस में एक बड़ी गलती कर रहे हैं. आप दुनिया भर के लोगों को अंदर आने दे रहे हैं... बहुत जल्द पेरिस एक मुस्लिम शहर बन जाएगा."
सोमवार को ही ट्रंप ने अपने 'ट्रुथ सोशल' प्लेटफॉर्म पर लिखा, "प्रवासियों ने फ्रांस पर कब्जा कर लिया है. उन्हें तुरंत अपने बॉर्डर बंद कर देने चाहिए."
न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार जर्मन मार्शल फंड थिंक टैंक के सीनियर फेलो, जेसी लिंटजेनिच ने बताया कि ट्रंप फ्रांस के इस संकट को अपने चुनावी प्रचार के एक मुद्दे में बदल रहे हैं.
मकसद क्या है?
3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों के लिए आए ओपिनियन पोल में ट्रंप की प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेटिक पार्टी को भारी बढ़त मिलती दिख रही है. इन चुनावों से यह तय होगा कि अमेरिकी संसद पर किसका कंट्रोल होगा. अमेरिकी नागरिकों के वोट डालने में अब केवल दो हफ्ते बचे हैं. ऐसे में ट्रंप हर मुमकिन रणनीति अपना रहे हैं ताकि वोटरों को रिपब्लिकन पार्टी और उनके 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (MAGA) आंदोलन का समर्थन करने के लिए राजी किया जा सके.
जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में अमेरिकी विदेश नीति के प्रोफेसर जस्टिन वैस ने AFP को बताया, "MAGA आंदोलन की शुरुआत से ही, यूरोप अमेरिकी राजनीतिक रणभूमि का एक विस्तार बन गया है. इसलिए, 17 अक्टूबर को हुई फ्रांस में अशांति जैसी घटनाएं होने पर राजनीतिक मशीनरी का सक्रिय हो जाना कोई हैरानी की बात नहीं है."
सोशल मीडिया पर फ्रांस में हुई अशांति के वीडियो सामने आने के बाद ट्रंप सरकार में उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने X पर लिखा कि पश्चिमी उदारवादियों ने तीसरी दुनिया को फ्रांस में लाकर बसा दिया है... उन्होंने समाज में घुलने-मिलने और अनुकूलता से जुड़े बुनियादी सवालों को नजरअंदाज कर दिया. ग्लेन बेक, बेनी जॉनसन, निक सॉर्टर और जैक पोसोबिएक जैसी अमेरिकी दक्षिणपंथी मीडिया हस्तियों ने भी कुछ ऐसी ही बातें कहीं. उन्होंने पश्चिमी पहचान के संकट के लिए मुस्लिम बहुल देशों से आए प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराया.
क्या सच में इससे वोट मिलेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनावी रणनीति भले ही 2024 में सफल रही हो, लेकिन जरूरी नहीं कि आज अमेरिकी वोटर यही सुनना चाहते हों. लिंटजेनिच ने कहा कि अगर आप यहां के चुनावी विज्ञापनों को देखें तो इनमें मुख्य रूप से हेल्थकेयर और घरेलू मुद्दों पर बात हो रही है. उन्होंने आगे कहा, "अंतरराष्ट्रीय मामले यहां बहुत कम अहमियत रखते हैं. यूक्रेन, ईरान और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अन्य मुद्दे, फ्रांस की मौजूदा अस्थिरता की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं."
इस महीने हुए 'प्यू रिसर्च' के एक पोल से पता चला है कि 82 प्रतिशत अमेरिकी वोटर अपना वोट तय करते समय देश की इकनॉमी को सबसे अहम मानते हैं. यह आंकड़ा इमिग्रेशन (59 प्रतिशत) या नस्ल से जुड़े मुद्दों (36 प्रतिशत) की तुलना में काफी अधिक है. अब सच्चाई यह है कि भले ट्रंप ने 2024 के अपने चुनावी वादे के मुताबिक आव्रजन पर सख्ती तो बरती है, लेकिन महंगाई को कंट्रोल करने के उनके वादे पर उन्हें वैसी सफलता नहीं मिली है. उनकी टैरिफ पॉलिसी और ईरान के साथ तनाव के कारण अमेरिका की पूरी अर्थव्यवस्था में कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे उनकी अप्रूवल रेटिंग गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गई है.
वैस का कहना है कि अमेरिका की पहचान से जुड़ी बातों को फ्रांस की घटनाओं से जोड़ने से रिपब्लिकनों को एक भी अतिरिक्त वोट नहीं मिलेगा. हालांकि इससे उनके अपने वोट बैंक को जरूर एकजुट किया जा सकता है.
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