
येरूशलम:
येरूशलम में संरक्षण विशेषज्ञों ने ईसा मसीह की पवित्र मजार को दो सदी बाद पहली बार खोलने का दावा किया गया है. ईसाई मान्यताओं के अनुसार, येरूशलम के पवित्र सेपल्चर चर्च में मौजूद मजार को ईसा मसीह का ही माना जाता है. इस मूल कब्र की सतह को कई शताब्दियों के बाद खोला गया है.
इस ऐतिहासिक घटना के गवाह बने एएफपी फोटोग्राफर गली टिब्बॉन ने उस स्थल की तस्वीर ली है, जहां करीब 33 ईस्वी में ईसा मसीह को दफन किया गया था. कब्र के ऊपर रखी पट्टी को हटाने वाले शोधकर्ताओं ने बताया कि इसे संभवत: 1810 के बाद नहीं खोला गया. उनके मुताबिक कब्र संगमरमर से ढकी है और इसके बीच संकरी छेद से ईसा मसीह की एक पेंटिंग देखी जा सकती है.
नेशनल ज्योग्राफिक सोसाइटी से जुड़े पुरातत्ववेत्ता फ्रेडरिक हेईबर्ट ने बताया कि कब्र के ऊपर से संगमरमर हटाने के बाद वहां अप्रत्याशित तौर पर पदार्थ भरे मिले. इसका वैज्ञानिक विश्लेषण करने में लंबा वक्त लगेगा, लेकिन परंपराओं के मुताबिक ईसा मसीह के शरीर को जिस शिला के ऊपर रखा गया था, उसे देखा जा सका.
इसको एक छोटे ढांचे से ढका गया है, जिसे एडिकुल कहते हैं. आग से नष्ट होने के कारण वर्ष 1808-10 में इसका पुनर्निर्माण कराया गया था. फिलहाल नेशनल टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एथेंस) के विशेषज्ञ एडिकुल और कब्र के आंतरिक ढांचे को दुरुस्त कर रहे हैं. कब्र की पहचान वर्ष 326 में रोमन सम्राट कॉन्स्टेंटाइन की मां हेलेना ने की थी.
इस ऐतिहासिक घटना के गवाह बने एएफपी फोटोग्राफर गली टिब्बॉन ने उस स्थल की तस्वीर ली है, जहां करीब 33 ईस्वी में ईसा मसीह को दफन किया गया था. कब्र के ऊपर रखी पट्टी को हटाने वाले शोधकर्ताओं ने बताया कि इसे संभवत: 1810 के बाद नहीं खोला गया. उनके मुताबिक कब्र संगमरमर से ढकी है और इसके बीच संकरी छेद से ईसा मसीह की एक पेंटिंग देखी जा सकती है.
नेशनल ज्योग्राफिक सोसाइटी से जुड़े पुरातत्ववेत्ता फ्रेडरिक हेईबर्ट ने बताया कि कब्र के ऊपर से संगमरमर हटाने के बाद वहां अप्रत्याशित तौर पर पदार्थ भरे मिले. इसका वैज्ञानिक विश्लेषण करने में लंबा वक्त लगेगा, लेकिन परंपराओं के मुताबिक ईसा मसीह के शरीर को जिस शिला के ऊपर रखा गया था, उसे देखा जा सका.
इसको एक छोटे ढांचे से ढका गया है, जिसे एडिकुल कहते हैं. आग से नष्ट होने के कारण वर्ष 1808-10 में इसका पुनर्निर्माण कराया गया था. फिलहाल नेशनल टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एथेंस) के विशेषज्ञ एडिकुल और कब्र के आंतरिक ढांचे को दुरुस्त कर रहे हैं. कब्र की पहचान वर्ष 326 में रोमन सम्राट कॉन्स्टेंटाइन की मां हेलेना ने की थी.
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