- ईरान पर हमले की आशंका के बीच अमेरिका ने 30 दिनों के लिए ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटा दिया
- राष्ट्रपति ट्रंप के ईरानी पावर प्लांट हमले को टालने की घोषणा से पहले इनसाइडर ट्रेडिंग में भारी उछाल देखा गया
- अमेरिका के रक्षा सचिव के ब्रोकर ने ईरान पर हमले से पहले बड़ी रक्षा कंपनियों में निवेश की कोशिश की थी
मिडिल ईस्ट में महीनेभर से भयानक युद्ध चल रहा है. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जहां बारूद बरस रहा है, वहीं कुछ तिजोरियों में मुनाफे की बारिश भी हो रही है. इसे 'युद्ध की अर्थव्यवस्था' कहें या 'आपदा में अवसर', लेकिन सच यही है कि ईरान पर हमले की आहट के बीच कहीं वॉल स्ट्रीट पर इनसाइडर ट्रेडिंग के खेल हो रहे हैं, तो कहीं पाबंदियों के बीच रूसी तेल पर अरबों डॉलर के दांव लगाए जा रहे हैं. हथियारों की नई मंडियों से लेकर तेल के बदले नियमों तक, जंग के मैदान से दूर एक 'नया बिजनेस' जन्म ले चुका है.
ईरान खुलकर बेच रहा है तेल
अमेरिका ने ईरानी तेल की कुछ मात्रा की बिक्री और आपूर्ति पर लगे प्रतिबंधों को 30 दिनों के लिए अस्थायी रूप से हटाने की घोषणा की. ईरानी कच्चा तेल ले जा रहा एक तेल टैंकर भारत जाने वाला था. यह मई 2019 के बाद से भारत को तेहरान के कच्चे तेल की पहली संभावित डिलीवरी होने वाली थी. लेकिन बाद में खबर आई कि पेमेंट की शर्तों में कुछ दिक्कत आने के बाद टैंकर का रास्ता बदलकर चीन की ओर कर दिया गया.
युद्ध में इनसाइडर ट्रेडिंग
राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करने की योजना टालने से कुछ ही मिनट पहले, बड़े सौदे किए गए, जिससे इनसाइडर ट्रेडिंग की चिंताएं बढ़ गईं. NPR की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा यह घोषणा करने से ठीक 15 मिनट पहले कि वे आखिरकार ईरानी पावर प्लांट पर बमबारी नहीं करेंगे, लेन-देन की संख्या में भारी उछाल आया.

Business in Iran war
युद्ध से जुड़ा पैसा कमाने वाला निवेश
Financial Times की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के एक ब्रोकर ने, ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले से कुछ हफ्ते पहले, बड़ी रक्षा कंपनियों में बड़ा निवेश करने की कोशिश की. इस जांच में ब्लैकरॉक के डिफेंस इंडस्ट्रियल एक्टिव ETF को शामिल किया गया था, जिसमें RTX, Lockheed Martin और Northrop Grumman जैसी कंपनियां शामिल हैं. पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने इस आरोप को झूठा बताते हुए खारिज कर दिया है, जबकि ब्लैकरॉक और मॉर्गन स्टेनले ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.
यूक्रेन भी मिडिल ईस्ट को बेच रहा ड्रोन
इस युद्ध में यूक्रेन की भी एंट्री हो चुकी है. राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का कहना है कि यूक्रेन ने सऊदी अरब के साथ अपने ड्रोन रक्षा विशेषज्ञता और तकनीक को साझा करने के लिए एक समझौता किया है. ज़ेलेंस्की ने कहा कि सऊदी अरब को भी ईरान की ओर से उसी तरह के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ रहा है, जिनका यूक्रेन पिछले चार साल से भी ज्यादा समय से रूस की ओर से सामना कर रहा है. जेलेंस्की ने पिछले हफ्ते रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 'यूक्रेन ऐसी विशेषज्ञता साझा कर रहा है जो मध्य पूर्व में उपलब्ध नहीं है. विशेषज्ञता का मतलब सिर्फ ड्रोन नहीं है, बल्कि यह एक कौशल, एक रणनीति और एक ऐसी प्रणाली है जिसमें ड्रोन रक्षा का सिर्फ एक हिस्सा होता है.'
रूसी तेल पर लगे प्रतिबंध हटाए गए
अमेरिका ने उन प्रतिबंधों में ढील दी है जो दूसरे देशों को समुद्र में जहाजों पर पहले से लदे रूसी तेल और पेट्रोलियम खरीदने से रोकते थे. ऐसा अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण पैदा हुई ऊर्जा आपूर्ति की कमी को कम करने की कोशिश के तहत किया गया है. अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह अल्पकालिक उपाय वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है. ब्लूमबर्ग के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमतें इस साल के अंत तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो रूसी तेल निर्यात को 40 अरब डॉलर का बढ़ावा मिल सकता है.
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हथियारों का बाजार भी गर्म
19 मार्च को वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट किया कि ट्रंप प्रशासन ने संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और जॉर्डन को लगभग 23 बिलियन डॉलर के हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे दी है. अमेरिका इन देशों को 16 बिलियन डॉलर से ज्यादा के एयर-डिफेंस सिस्टम, गोला-बारूद और रडार उपकरण देगा, साथ ही UAE को 7 बिलियन डॉलर के अतिरिक्त हथियार भी देगा.
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