- लेबनान और इजरायल के बीच हाल ही में एक सीजफायर हुआ है, जिसके बाद स्थायी शांति वार्ता की संभावना बनी है।
- हिज्बुल्लाह सीजफायर और शांति वार्ता को लेकर नाराज है और वो शांति वार्ता का हिस्सा नहीं है
- लेबनान के बेरूत समेत सभी जिलों में इजरायल के हमलों से भारी क्षति हुई है
लेबनान और इजरायल में फिलहाल सीजफायर हो गया है. दोनों के बीच स्थायी शांति वार्ता भी होने वाली है, मगर हिज्बुल्लाह इससे नाराज है. क्या बगैर हिज्बुल्लाह की सहमति के लेबनान-इजरायल में शांति पर बात बन सकती है? क्या हिज्बुल्लाह को छोड़कर लेबनान इजरायल में समझौता हो सकता है? सवाल तो कई हैं, जिनके जवाब भविष्य के गर्भ में हैं. मगर इस मसले पर लेबनान क्या सोच रहा है? क्या वो युद्ध से टूट चुका है या डटकर खड़ा है. यही जानने एक बार फिर एनडीटीवी की टीम इजरायल और लेबनान के दक्षिण में स्थित नबातिये जिला पहुंची. इसकी सीमा उत्तरी इजरायल से लगती है.
नबातिये का माहौल
एक सप्ताह पहले ही इजरायल ने यहां बड़ा हमला किया. लगातार हमले से ये इलाका खंडहर की तरह हो गया है. कई बहु मंजिला इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं हैं. दुकानों की भी यही हालत है. लोग मलबों के बाहर बैठे हैं. लेबनान की सरकार का कहना है कि 2200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. हालांकि, आशंका है कि मलबे के नीचे भी कई शव हो सकते हैं. कहा जा रहा है कि अब जो लेबनान और इजरायल में सीजफायर हुआ है, उससे शायद स्थायी शांति आ जाए. हालांकि, हिज्बुल्लाह की ओर से कहा जा रहा है कि नबातिये या टायर या सिडोन नाम के इजरायल के नजदीकी लेबनानी इलाकों में लेबनान के लोग ना जाएं. क्योंकि इजरायल युद्धविराम कर तोड़ देता है. फिलहाल इस युद्धविराम की एक कंडीशन ये भी है कि इजरायल को जब भी लगे कि उसे हिज्बुल्लाब से खतरा है तो वो दोबारा हमले शुरू कर सकता है. ऐसे में इस कंडीशन को बहुत एकतरफा माना जा रहा है. यही कारण है कि दक्षिणी लेबनान के सरहदी इलाकों में अभी भी इजरायली सेना दिख रहे हैं. हिज्बुल्लाह का कहना है कि उन इलाकों में जो इजरायल ने हथिया लिए हैं या कब्जा कर लिया है, उसे छोड़ दे. मगर इजरायल का कहना है कि वो अपने सैनिकों को उन इलाकों से इसलिए नहीं हटाएगा, क्योंकि इन इलाकों में हिज्बुल्लाह की मौजूदगी की वजह से उसे खतरा है. तो अब देखना है इसका असर कितने दिनों तक देखने को मिलेगा?
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दहशत के बीच उम्मीद
बेरूत का हाल भी जुदा नहीं है. 10 दिन पहले भी एनडीटीवी की टीम यहां पहुंची थी. उस वक्त इजरायल ने भयंकर हमला यहां किया था. बहु मंजिला इमारतों के बीच हुए इजरायल के हमलों में कई इमारतें ढह गईं. हमले के बाद यहां उस वक्त दहशत का माहौल था, क्योंकि इसे हिजबुल्ला का गढ़ भी माना जाता है. शिया समुदाय की आबादी यहां पर ज्यादा है. इससे आशंका थी कि इजरायल यहां कभी भी हमला कर सकता है. पर अब फिर से सड़कों पर चहल-पहल है. यहां कई बहुमंजिला इमारतें जमींदोज हो चुकी हैं. आसपास के घर और इमारतें भी क्षतिग्रस्त हो गईं हैं. लोग अब उन्हें ठीक करने में जुट गए हैं. सीजफायर के बाद लोगों में काफी उत्साह है. शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद लोग सड़कों पर बाहर आ चुके हैं और अब यह वही मना रहे हैं कि यूएस-इजरायल-ईरान-लेबनान में स्थायी शांति पर बात बन जाए. इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर की घोषणा से बेरूत से लेकर लेबनान के अलग-अलग शहरों में खुशी मनाई जा रही है. लोगों को उम्मीद है कि शायद जंग अब खत्म हो रही है.

शांति आएगी या छिड़ेगी लड़ाई
युद्ध का खामियाजा लेबनान में ना सिर्फ बेरूत बल्कि लेबनान के दक्षिणी इलाकों में भी देखने को मिला था. लोगों को पलायन करना पड़ा था. कई लोगों को अपना घर छोड़कर दूसरे इलाकों में शरण लेना पड़ा. ये हाल सिर्फ सीमा के इस पार ही नहीं बल्कि सीमा के उस पार इजरायल में भी देखने को मिला. उत्तरी इजराइल पर हिज्बुल्लाह की तरफ से भी लगातार हमले किए जा रहे थे, लेकिन अब लोग बेरूत से निकलकर अपने घर लौटना शुरू कर चुके हैं. हालांकि, अभी स्थाई शांति इन लोगों की किस्मत से कोसों दूर है. अभी भी गाजा का मसला बना हुआ है. अभी भी ईरान के साथ यूएस और इजरायल की परमानेंट संधि या कह लें स्थायी शांति समझौता नहीं हुआ है. ऐसे में ये देखना होगा कि क्या लेबनान और इजरायल के बीच जो सीजफायर हुआ है, क्या यह अस्थाई शांति इस पूरे क्षेत्र की तकदीर बदलने वाला होगा या वार्ता का अगला राउंड लड़ाई की एक और भूमिका बना देगा.
10 मिनट में गिरे 100 बम
बेरूत के शहर के बीच एक इलाका है कॉर्निश मजरा. वहां पर एक हफ्ते पहले इजरायल की तरफ से हमला किया गया था. यहां पर राहत बचाव कार्य चल रहा है. राहत बचाव कार्य का मतलब है कि जली हुई गाड़ियां को हटाया जा रहा है. मल्टी स्टोरी बिल्डिंग के मलबे को हटाया जा रहा है. लोगों के घर, गाड़ियां, सामान सब कुछ जलकर राख हो चुके हैं. सब अपने को फिर से समेटने में लगे हैं. पिछले बृहस्पतिवार को इस इलाके में हमला हुआ था. करीब 60 लोगों की मौत हो गई. खबरों में बताया गया कि करीब 10 मिनट के अंदर 100 बम इजरायल ने गिराए. जिन्हें मौत आ गई, वो तो चले गए, पर जो जिंदा है उनके लिए जिंदगी खुद मौत बन गई है.

इस इलाके में दहशत भी है, गुस्सा भी है, पर एक उम्मीद भी है. लोग यही मना रहे हैं कि किसी तरह हिज्बुल्लाह-लेबनान की सरकार इजरायल और अमेरिका आपस में वह संधि करें, वह समझौता करें, वह सीजफायर करें ताकि इस तरह की तबाही किसी और इलाके में देखने को ना मिले. वो जी रहे हैं मगर दहशत, गुस्से, उम्मीद के साथ. शायद ये आखिरी बार जिंदगी ने परीक्षा ली हो और आगे आना वाला वक्त उनके लिए शांति और खुशियों की सौगात लाए. युद्ध तो लाशें गिनती है, शांति जिंदगी जीने का मौका.
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