- जर्मनी की रिसर्च टीम ने अंटार्कटिका के वेडेल सागर में एक नया द्वीप खोजा है, जो पहले मानचित्रों में नहीं था
- नया द्वीप लगभग एक सौ तेरह मीटर लंबा और पचास मीटर चौड़ा है तथा पानी से सोलह मीटर ऊपर स्थित है
- द्वीप संभवतः ज्वालामुखी विस्फोट या समुद्र के अंदर भूगर्भीय गतिविधियों के कारण बना होगा
कई इंसानों को लगता होगा कि पृथ्वी का चप्पा-चप्पा अब खंगाला जा चुका है. हर इंच जमीन पर किसी ना किसी का कब्जा है, मगर पृथ्वी इतनी बड़ी है और समुद्र इतना गहरा कि यहां कब क्या मिल जाए कुछ कहा नहीं जा सकता. ऐसा ही कुछ जर्मनी की एक रिसर्च टीम के साथ हुआ. जर्मन रिसर्च आइसब्रेकर पोलरस्टर्न पर सवार एक अंतरराष्ट्रीय अभियान दल ने अंटार्कटिका के वेडेल सागर में एक द्वीप (Island) की खोज की है.
नया द्वीप कैसे मिल गया
यह जानकारी अल्फ्रेड वेगेनर इंस्टीट्यूट फॉर पोलर एंड मरीन रिसर्च (एडब्ल्यूआई) ने दी है. रिपोर्ट के अनुसार, 93 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय अभियान दल 8 फरवरी, 2026 से अल्फ्रेड वेगेनर इंस्टीट्यूट के आइसब्रेकर पोलरस्टर्न पर सवार होकर अंटार्कटिका के उत्तर-पश्चिमी वेडेल सागर में खोज कर रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है, "जब खराब मौसम के कारण रिसर्च कार्य को रोककर जॉइनविले द्वीप के पास शरण लेनी पड़ी, तो वैज्ञानिक और जहाज के चालक दल अचानक एक नये द्वीप को देखकर आश्चर्यचकित रह गए. तास के अनुसार, यह द्वीप पहले उपलब्ध समुद्री मानचित्रों पर केवल एक खतरनाक क्षेत्र के रूप में चिह्नित था."
कैसा दिखता है नया द्वीप
रिपोर्ट में आगे कहा गया है, "खिड़की से बाहर देखने पर हमें एक 'हिमखंड' दिखाई दिया, जो देखने में थोड़ा गंदा लग रहा था. करीब से देखने पर हमें एहसास हुआ कि यह शायद एक चट्टान है. फिर हमने अपना मार्ग बदला और उस दिशा में बढ़े और यह स्पष्ट होता चला गया कि हमारे सामने एक द्वीप है!" अभियान में शामिल साइमन ड्रेउटर के हवाले से यह बात कही गई है.
कितना बड़ा है ये नया द्वीप
रिपोर्ट के अनुसार, यह द्वीप लगभग 130 मीटर लंबा, 50 मीटर चौड़ा है और पानी से लगभग 16 मीटर बाहर निकला हुआ है. मतलब लगभग लगभग 69,965 वर्ग फुट उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के मानकों के अनुसार लगभग 2.5 से 3 बीघा जमीन मान सकते हैं. एक्सपर्ट का मानना है कि हो सकता है कि बर्फ के कारण कभी इस पर किसी की नजर ही नहीं गई हो या हो सकता है कि ये समुद्र के अंदर से निकल आया हो. हालांकि, मौजूदा समय में किसी की नजर नहीं पड़ने वाली बात को मानना थोड़ा मुश्किल है.
क्या समुद्र से नये द्वीप निकल सकते हैं
जी हां, द्वीप समुद्र के अंदर से ही निकलते हैं. यह प्रक्रिया मुख्य रूप से ज्वालामुखी विस्फोट और भूगर्भीय गतिविधियों द्वारा होती है. जब समुद्र के नीचे स्थित ज्वालामुखी फटते हैं, तो लावा पानी की सतह के ऊपर जमा होकर ठंडा हो जाता है, जिससे द्वीप का निर्माण होता है.
द्वीप बनने के मुख्य कारण
- ज्वालामुखी विस्फोट: समुद्र के नीचे की दरारों से निकला लावा ठंडा होकर पानी की सतह से ऊपर आ जाता है, जो हवाई जैसे द्वीपों का कारण बनता है.
- प्रवाल भित्तियां: उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में, प्रवाल के अवशेष और नई वृद्धि समुद्र की सतह पर द्वीप बना सकती है.
- टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल: समुद्र तल के नीचे प्लेटों के खिसकने से भी नया भूभाग ऊपर आ सकता है.
- अवसाद का जमाव: समुद्री धाराएं रेत और अन्य पदार्थों को जमा करके भी नए टापू बना सकती हैं.
क्या खोजने वाले का होगा द्वीप पर कब्जा
सागर में नया द्वीप मिलने पर वह कानूनी रूप से निकटतम तटीय देश का होगा, न कि उसे खोजने वाले व्यक्ति का. यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत आता है, जिसके अनुसार 200 समुद्री मील के भीतर बनने वाले द्वीप पर उस देश का संप्रभु अधिकार होता है. यदि द्वीप किसी देश की सीमा (200 मील) से बहुत दूर बने, तो उसे तकनीकी रूप से किसी का नहीं माना जा सकता है, लेकिन उसे अपना देश घोषित करने के लिए अन्य देशों से मान्यता की आवश्यकता होगी, जो व्यावहारिक रूप से बहुत कठिन है.
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