
भ्रष्टाचार के मामले में फंसे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ.
नई दिल्ली:
जुलाई का महीना पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के लिए घातक साबित हुआ है. 18 और 28 जुलाई नवाज शरीफ को हमेशा सताती रहेगी, दोनों तारीख में शरीफ को अपना प्रधानमंत्री कुर्सी छोड़ना पड़ा है. 1990 में शरीफ पहली बार पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बने थे और 18 जुलाई 1993 को उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा था. उस वक्त के राष्ट्रपति गुलाम इशक खान से नवाज शरीफ का मतभेद था. 18 अप्रैल 1993 को राष्ट्रपति खान ने नेशनल असेंबली को भंग कर दिया. राष्ट्रपति के इस निर्णय के खिलाफ शरीफ ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई और कोर्ट ने राष्ट्रपति के निर्णय को गलत मानते हुए शरीफ को दोबारा प्रधानमंत्री बनाया था, लेकिन शरीफ ज्यादा दिन तक प्रधानमंत्री नहीं रह पाए थे. राष्ट्रपति के साथ मतभेद के वजह से सरकार चलना मुश्किल हो रहा था. फिलहाल पाकिस्तान आर्मी की दखलअंदाजी से नवाज शरीफ को 18 जुलाई 1993 को प्रधानमंत्री का पद छोड़ना पड़ा और इस के साथ साथ राष्ट्रपति खान को भी जाना पड़ा था.
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70 सालों में 27 प्रधानमंत्री : 2013 में हुई चुनाव में शरीफ के पार्टी की शानदार जीत मिली थी और 5 जून 2013 शरीफ ने प्रधानमंत्री का कार्यभार संभाला था. 28 जुलाई 2017 पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने शरीफ को पनामा रिपोर्ट में दोषी मानते हुए अयोग्य घोषित कर दिया, जिसके वजह से शरीफ को अपना इस्तीफा देना पड़ा है. पाकिस्तान के 70 साल की इतिहास में 27 लोगों ने प्रधानमंत्री का पद पर रह चुके हैं और नवाज शरीफ के बाद अब शाहिद खाकानी अब्बासी अंतरिम प्रधानमंत्री होंगे.
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पाकिस्तान के इतिहास यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है जब कोई प्रधानमंत्री को अपना पद छोड़ना पड़ रहा है. ज्यादा ज्यादा प्रधानमत्रियों गवर्नर जनरल,राष्ट्रपति,आर्मी द्वारा निकला गया है या फिर सुप्रीम कोर्ट ने अयोग्य घोषित कर दिया है. पाकिस्तान में प्रधानमंत्री के ऊपर राष्ट्रपति का दबदबा रहता है और दबदबा शुरुआत के दौर में ज्यादा था.पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को गोली मार कर हत्या कर दिया गया था इस के बाद ख्वाजा नजीमुद्दीन पाकिस्तान का प्रधानमंत्री का पद भार संभाला था. ख्वाजा अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए थे.
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जब इस प्रधानमंत्री ने किया था अपने स्टेनोग्राफर से शादी: 1953 में गवर्नर जनरल मलिक गुलाम ने प्रधानमंत्री नजीमुद्दीन को प्रधानमंत्री के पद से हटाया था. यह कहा जाता है कि नजीमुद्दीन ने मलिक ग़ुलाम को गवर्नर जनरल बनाया था. ख्वाजा नजीमुद्दीन के बाद मुहम्मद अली बोगरा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने. बोगरा उस वक्त अमेरिका में पाकिस्तान का राजदूत थे. उन्हें गवर्नर जनरल ग़ुलाम ने पाकिस्तान बुलाया और प्रधानमंत्री बनाया था. प्रधानमंत्री बोगरा जब राजदूत थे तब उनके ऑफिस में आलिया नाम के एक लेबनीज महिला स्टेनोग्राफर के रूप में काम करती थी. बोगरा प्रधानमंत्री बने के बाद आलिया को अपना सेक्रेटरी बनाये और कुछ दिनों के बाद उसे शादी भी कर लिए. बोगरा का यह दूसरी शादी थी. शादी को लेकर बोगरा के खिलाफ पाकिस्तान के महिलाओं ने प्रदर्शन करना भी शुरू कर दिए थे. कुछ महीनों के बाद बोगरा और गवर्नर जनरल गुलाम मुहम्मद के बीच मतभेद शुरू हो गयी.
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एक राष्ट्रपति ने लिया कई प्रधानमंत्रियों का इस्तीफा : गुलाम, बोगरा को हटाना चाहते थे, लेकिन बोगरा हटना नहीं चाहते थे. तबियत खराब होने के वजह से गवर्नर जनरल ग़ुलाम मुहम्मद इलाज के लिए इंग्लैंड जाना पड़ा और गवर्नर जनरल का पदभार इस्कंदर अली मिर्जा ने संभाला. मिर्जा ने बोगरा को प्रधानमंत्री के पद से हटा दिया और चौधरी मोहम्मद अली को प्रधानमंत्री बनाया.
1956 में पाकिस्तान में गवर्नर जनरल के पद को खत्म कर दिया गया और राष्ट्रपति पद शुरू कर दिया गया. इस्कंदर मिर्जा पाकिस्तान का पहला राष्ट्रपति बने. मिर्जा और मुहम्मद अली के बीच में सब कुछ ठीक नहीं था. मिर्जा के दवाब में अली को इस्तीफा देना पड़ा था. अली एक साल एक महीने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे. मुहम्मद अली के बाद हुसैन शाहिद सुहरावर्दी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने, लेकिन राष्ट्रपति के साथ मतभेद के वजह से ज्यादा दिन इस पद पर नहीं रह पाए. करीब एक साल तक प्रधानमंत्री रहने के बाद वह इस पद इस्तीफ़ा दे दिए थे. 17 अक्टूबर 1957 को पाकिस्तान मुस्लिम लीग के इब्राहिम इस्माइल चुंदरिगर प्रधानमंत्री पद का कार्यभार संभाला. चुंदरिगर का कार्यकाल सिर्फ दो महीने के लिए रहा. राष्ट्रपति मिर्जा के साथ मतभेद के वजह से चुंदरिगर को अपने पद छोड़ना पड़ा था.
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जब खुद राष्ट्रपति हुए देश से निष्कासित : फिरोज खान नून 16 दिसंबर 1957 को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनाये गए. नून का शासन भी ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया. करीब एक साल के बाद राष्ट्रपति मिर्जा ने नून को राष्ट्रपति के पद से हटा दिया था. 1953 से लेकर 1958 के बीच पांच प्रधानमंत्री बने और राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा के साथ मतभेद के वजह से पांचों को इस्तीफ़ा देना पड़ा था.
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7 अक्टूबर 1958 राष्ट्रपति मिर्जा ने पाकिस्तान में सैनिक शासन लागू कर दिया. मिर्जा ने जनरल अयूब खान को पाकिस्तान आर्मी का कमांडर इन चीफ के साथ साथ मुख्य सैनिक शासक बनाया. कुछ दिन के बाद मिर्जा और अयूब खान के बीच मतभेद शुरू हो गया. मिर्जा खुद कुछ निर्णय लेना चाहते थे, लेकिन अयूब खान मिर्जा से खुश नहीं थे. अयूब खान को खुश करने के लिए मिर्जा ने 24 अक्टूबर 1958 को उन्हें प्रधानमंत्री भी बनाया, लेकिन अयूब खान इस पद से खुश नहीं थे क्यों कि अयूब खान को पता था कि मुख्य फौजी शासक के रूप में उनका शक्ति ज्यादा था. अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए मिर्जा ने आर्मी के अंदर अयूब खान के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों के मदद लेना शुरू कर दिए लेकिन वो इसमें मे सफल नहीं हुए. 27 अक्टूबर 1958 को अयूब खान ने मिर्जा को गिरफ्तार किया और देश से निष्कासित करते हुए ब्रिटेन भेज दिया. राष्ट्रपति के रूप में अपने शासन काल मे कई प्रधानमंत्रियों का इस्तीफ़ा लेने वाले मिर्जा खुद देश से बाहर हो गए और 12 नवंबर 1969 को लंदन में उनकी मौत हो गयी .
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70 सालों में 27 प्रधानमंत्री : 2013 में हुई चुनाव में शरीफ के पार्टी की शानदार जीत मिली थी और 5 जून 2013 शरीफ ने प्रधानमंत्री का कार्यभार संभाला था. 28 जुलाई 2017 पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने शरीफ को पनामा रिपोर्ट में दोषी मानते हुए अयोग्य घोषित कर दिया, जिसके वजह से शरीफ को अपना इस्तीफा देना पड़ा है. पाकिस्तान के 70 साल की इतिहास में 27 लोगों ने प्रधानमंत्री का पद पर रह चुके हैं और नवाज शरीफ के बाद अब शाहिद खाकानी अब्बासी अंतरिम प्रधानमंत्री होंगे.
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पाकिस्तान के इतिहास यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है जब कोई प्रधानमंत्री को अपना पद छोड़ना पड़ रहा है. ज्यादा ज्यादा प्रधानमत्रियों गवर्नर जनरल,राष्ट्रपति,आर्मी द्वारा निकला गया है या फिर सुप्रीम कोर्ट ने अयोग्य घोषित कर दिया है. पाकिस्तान में प्रधानमंत्री के ऊपर राष्ट्रपति का दबदबा रहता है और दबदबा शुरुआत के दौर में ज्यादा था.पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को गोली मार कर हत्या कर दिया गया था इस के बाद ख्वाजा नजीमुद्दीन पाकिस्तान का प्रधानमंत्री का पद भार संभाला था. ख्वाजा अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए थे.
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जब इस प्रधानमंत्री ने किया था अपने स्टेनोग्राफर से शादी: 1953 में गवर्नर जनरल मलिक गुलाम ने प्रधानमंत्री नजीमुद्दीन को प्रधानमंत्री के पद से हटाया था. यह कहा जाता है कि नजीमुद्दीन ने मलिक ग़ुलाम को गवर्नर जनरल बनाया था. ख्वाजा नजीमुद्दीन के बाद मुहम्मद अली बोगरा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने. बोगरा उस वक्त अमेरिका में पाकिस्तान का राजदूत थे. उन्हें गवर्नर जनरल ग़ुलाम ने पाकिस्तान बुलाया और प्रधानमंत्री बनाया था. प्रधानमंत्री बोगरा जब राजदूत थे तब उनके ऑफिस में आलिया नाम के एक लेबनीज महिला स्टेनोग्राफर के रूप में काम करती थी. बोगरा प्रधानमंत्री बने के बाद आलिया को अपना सेक्रेटरी बनाये और कुछ दिनों के बाद उसे शादी भी कर लिए. बोगरा का यह दूसरी शादी थी. शादी को लेकर बोगरा के खिलाफ पाकिस्तान के महिलाओं ने प्रदर्शन करना भी शुरू कर दिए थे. कुछ महीनों के बाद बोगरा और गवर्नर जनरल गुलाम मुहम्मद के बीच मतभेद शुरू हो गयी.
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एक राष्ट्रपति ने लिया कई प्रधानमंत्रियों का इस्तीफा : गुलाम, बोगरा को हटाना चाहते थे, लेकिन बोगरा हटना नहीं चाहते थे. तबियत खराब होने के वजह से गवर्नर जनरल ग़ुलाम मुहम्मद इलाज के लिए इंग्लैंड जाना पड़ा और गवर्नर जनरल का पदभार इस्कंदर अली मिर्जा ने संभाला. मिर्जा ने बोगरा को प्रधानमंत्री के पद से हटा दिया और चौधरी मोहम्मद अली को प्रधानमंत्री बनाया.
1956 में पाकिस्तान में गवर्नर जनरल के पद को खत्म कर दिया गया और राष्ट्रपति पद शुरू कर दिया गया. इस्कंदर मिर्जा पाकिस्तान का पहला राष्ट्रपति बने. मिर्जा और मुहम्मद अली के बीच में सब कुछ ठीक नहीं था. मिर्जा के दवाब में अली को इस्तीफा देना पड़ा था. अली एक साल एक महीने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे. मुहम्मद अली के बाद हुसैन शाहिद सुहरावर्दी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने, लेकिन राष्ट्रपति के साथ मतभेद के वजह से ज्यादा दिन इस पद पर नहीं रह पाए. करीब एक साल तक प्रधानमंत्री रहने के बाद वह इस पद इस्तीफ़ा दे दिए थे. 17 अक्टूबर 1957 को पाकिस्तान मुस्लिम लीग के इब्राहिम इस्माइल चुंदरिगर प्रधानमंत्री पद का कार्यभार संभाला. चुंदरिगर का कार्यकाल सिर्फ दो महीने के लिए रहा. राष्ट्रपति मिर्जा के साथ मतभेद के वजह से चुंदरिगर को अपने पद छोड़ना पड़ा था.
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जब खुद राष्ट्रपति हुए देश से निष्कासित : फिरोज खान नून 16 दिसंबर 1957 को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनाये गए. नून का शासन भी ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया. करीब एक साल के बाद राष्ट्रपति मिर्जा ने नून को राष्ट्रपति के पद से हटा दिया था. 1953 से लेकर 1958 के बीच पांच प्रधानमंत्री बने और राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा के साथ मतभेद के वजह से पांचों को इस्तीफ़ा देना पड़ा था.
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7 अक्टूबर 1958 राष्ट्रपति मिर्जा ने पाकिस्तान में सैनिक शासन लागू कर दिया. मिर्जा ने जनरल अयूब खान को पाकिस्तान आर्मी का कमांडर इन चीफ के साथ साथ मुख्य सैनिक शासक बनाया. कुछ दिन के बाद मिर्जा और अयूब खान के बीच मतभेद शुरू हो गया. मिर्जा खुद कुछ निर्णय लेना चाहते थे, लेकिन अयूब खान मिर्जा से खुश नहीं थे. अयूब खान को खुश करने के लिए मिर्जा ने 24 अक्टूबर 1958 को उन्हें प्रधानमंत्री भी बनाया, लेकिन अयूब खान इस पद से खुश नहीं थे क्यों कि अयूब खान को पता था कि मुख्य फौजी शासक के रूप में उनका शक्ति ज्यादा था. अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए मिर्जा ने आर्मी के अंदर अयूब खान के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों के मदद लेना शुरू कर दिए लेकिन वो इसमें मे सफल नहीं हुए. 27 अक्टूबर 1958 को अयूब खान ने मिर्जा को गिरफ्तार किया और देश से निष्कासित करते हुए ब्रिटेन भेज दिया. राष्ट्रपति के रूप में अपने शासन काल मे कई प्रधानमंत्रियों का इस्तीफ़ा लेने वाले मिर्जा खुद देश से बाहर हो गए और 12 नवंबर 1969 को लंदन में उनकी मौत हो गयी .
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