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This Article is From Apr 18, 2017

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे से कश्मीर मामले का कोई सीधा संबंध नहीं : चीन | इसके बारे में 7 खास बातें

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे से कश्मीर मामले का कोई सीधा संबंध नहीं : चीन |  इसके बारे में 7 खास बातें
ग्वादर पोर्ट (फाइल फोटो)
बीजिंग: चीन ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे पर भारत की चिंताओं को दूर करने की कोशिश करते हुए कहा कि इसका कश्मीर मामले से ‘कोई प्रत्यक्ष संबंध’ नहीं है और ‘वन बेल्ट वन रोड’ परियोजना में शामिल होने के लिए नई दिल्ली का स्वागत है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने 14-15 मई से होने वाले ‘वन बेल्ट वन रोड’ (ओबीओआर) शिखर सम्मेलन के संबंध में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, हालांकि (कोई) भारतीय नेता यहां नहीं होंगे, लेकिन ओबीओआर शिखर सम्मेलन में भारत का एक प्रतिनिधि होगा.

भाषा की खबर के मुताबिक- वांग ने कहा, हम शिखर सम्मेलन में वार्ता में शामिल होने के लिए भारतीय प्रतिनिधि और भारतीय व्यापारिक एवं वित्तीय समुदाय के सदस्यों का स्वागत करते हैं. उन्होंने कहा कि इस शिखर सम्मेलन में 28 राष्ट्रपतियों एवं प्रधानमंत्रियों के भाग लेने की संभावना है. वांग ने कहा, ओबीओआर सभी प्रतिभागियों के साझा विकास के लिए है इसलिए हम ओबीओआर के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए भारत का स्वागत करते हैं. वांग ने कहा कि 46 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का मकसद आर्थिक है. उन्होंने कहा, इसका मकसद आर्थिक सहयोग एवं विकास है.
  1. 46 अरब अमेरिकी डॉलर की महत्वकांक्षी योजना है. इसके तहत चीन और पाकिस्तान अरब सागर में ग्वादर बंदरगाह को शिंजियांग से जोड़ने के लिए करीब 3,000 किलोमीटर लंबा आर्थिक गलियारा बना रहे हैं. यह कदम चीन में तेल परिवहन के लिए एक नया और सस्ता मालवाहक मार्ग खोलेगा. साथ ही इस रास्ते से चीनी वस्तुओं का मध्य पूर्व और अफ्रीका में निर्यात होगा.
  2. विशेषज्ञों का मानना है कि सीपीईसी और ग्वादर बंदरगाह चीन और पाक की सैन्य क्षमताएं बढ़ाएगा तथा अरब सागर में चीनी नौसेना की आसान पहुंच को संभव बनाएगा. ग्वादर में नौसैनिक अड्डा होने से चीनी जहाज हिंद महासागर क्षेत्र में अपने बेड़े की मरम्मत और रखरखाव जैसे कार्य के लिए भी बंदरगाह का इस्तेमाल कर पाएंगे. ऐसी कोई भी सुविधा चीन की नौसेना के भविष्य के मिशनों के लिए उसे सहयोग प्रदान करने वाली पहली ओवरसीज सुविधा होगी.
  3. सीपीईसी पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत बलूचिस्तान से होकर गुजरेगा. इस गलियारे से चीन का मुस्लिम बहुल प्रांत शिंजियांग पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से जुड़ेगा.
  4. इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत 1100 किलोमीटर का लंबा मोटरवे कराची और लाहौर शहर के बीच में बनाया जाएगा. रावलपिंडी और चीनी सीमा के बीच काराकोरम हाइवे को पूरी तरह से नया बनाया जाएगा.
  5. इसके तहत कराची-पेशावर के बीच की मुख्य रेल लाइन को भी अपग्रेड किया जाएगा और दिसंबर 2019 तक इस रूट पर ट्रेन की रफ्तार को 160 किमी प्रति घंटे की से चलाया जाएगा. पाकिस्तान के रेल नेटवर्क को चीन के दक्षिणी शिनजियांग रेलवे से जोड़ा जाएगा.
  6. भारत ने इस गलियारे को लेकर चीन से आपत्ति जताई, क्योंकि यह पाक अधिग्रहित कश्मीर से होकर गुजरता है. चीन ने यह कहते हुए परियोजना का बचाव किया है कि इससे क्षेत्रीय विकास में मदद मिलेगी.
  7. भारत की चिंता ग्वादर पोर्ट को लेकर भी है. इस पोर्ट के जरिए चीन भारत को घेरने की रणनीति पर निश्चित ही आगे बढ़ेगा. पाकिस्तान को चीन से जोड़ने वाली सीमा पर नए रास्तों का निर्माण होगा जो भारत से लगे हुए है. चीन की वाजाही यहां और बढ़ जाएगी.
(इनपुट्स भाषा और अन्य एजेंसियों से)
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