बीएसपी के नवनिर्वाचित पार्षद मुशर्रफ हुसैन के खिलाफ एफआईआर (प्रतीकात्मक फोटो)
- BSP के नवनिर्वाचित पार्षद मुशर्रफ हुसैन के खिलाफ FIR
- धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप
- शिकायत में कहा गया कि इसकी वजह से माहौल खराब हुआ
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लखनऊ:
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) के नवनिर्वाचित पार्षद मुशर्रफ हुसैन के खिलाफ FIR दर्ज की है, क्योंकि उनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी कि उनके द्वारा उर्दू में पद एवं गोपनीयता की शपथ दुर्भावनापूर्ण ढंग से जानबूझकर धार्मिक भावनाएं आहत करने के लिए ली गई थी. शिकायत में यह भी कहा गया कि इसकी वजह से माहौल खराब हुआ तथा कानून एवं व्यवस्था बिगड़ने के हालात पैदा हो गए.
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यह शिकायत भारतीय जनता पार्टी, यानी BJP के पार्षद पुष्पेंद्र कुमार ने की, जिन्होंने बताया कि सभी पार्षदों को हिन्दी में लिखी शपथ दी गई थी, और कार्यक्रम कतई शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था, जब तक उर्दू में शपथ नहीं ली गई. इसके बाद दोनों पार्टियों के समर्थकों के बीच हाथापाई भी देखी गई, और दोनों ही तरफ से धर्म-संबंधी नारेबाज़ी भी की गई.
हाल ही में हुए निकाय चुनाव में BJP ने राज्यभर में मेयर के 16 पदों में से 14 पर जीत हासिल की है, लेकिन अलीगढ़ और मेरठ में उनके प्रत्याशी BSP के प्रत्याशियों से हारे हैं. अलीगढ़ में मेयर के पद पर BSP की जीत हुई है, लेकिन पार्षदों की सीटों पर BJP के 35 प्रत्याशी जीते, जबकि BSP को सिर्फ 21 सीटों पर जीत मिली.
BSP पार्षद मुशर्रफ हुसैन के खिलाफ पुलिस ने भारतीय दंड संहिता, यानी आईपीसी की धारा 295ए के तहत FIR दर्ज की है. IPC की यह धारा दुर्भावनापूर्ण ढंग से जानबूझकर किसी धर्म या धार्मिक परम्पराओं का उपहास कर किसी वर्ग की धार्मिक भावनाएं आहत करने के खिलाफ है.
हिन्दी और उर्दू को उत्तर प्रदेश में आधिकारिक भाषाओं का दर्जा हासिल है. इसके अलावा देश की सर्वोच्च विधायी संस्था संसद के शपथग्रहण से जुड़े नियमों के अनुसार भी शपथ किसी भी ऐसी भाषा में ली जा सकती है, जो संविधान के आठवीं अनुसूची में दर्ज 22 भाषाओं में शामिल है.
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इस बीच, अलीगढ़ के SSP राजेश पाण्डे ने कहा, "जैसा कि आप जानते हैं, जब पार्षद शपथ ले रहे थे, कुछ हल्ला-गुल्ला हुआ था... एक पार्षद ने उर्दू में शपथ ली थी, जिसकी वजह से माहौल गड़बड़ हो गया... दूसरे पक्ष ने शिकायत दर्ज करवाई है... उर्दू में शपथ लेना हरगिज़ भी गैरकानूनी नहीं है, लेकिन पुलिस को इसके बाद दखल देना पड़ा... FIR भी इसी संदर्भ में दर्ज की गई है... धारा 295 इसलिए लगाई गई है, क्योंकि वहां शपथग्रहण के बाद कथित रूप से धार्मिक नारेबाज़ी की गई थी..."
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यह शिकायत भारतीय जनता पार्टी, यानी BJP के पार्षद पुष्पेंद्र कुमार ने की, जिन्होंने बताया कि सभी पार्षदों को हिन्दी में लिखी शपथ दी गई थी, और कार्यक्रम कतई शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था, जब तक उर्दू में शपथ नहीं ली गई. इसके बाद दोनों पार्टियों के समर्थकों के बीच हाथापाई भी देखी गई, और दोनों ही तरफ से धर्म-संबंधी नारेबाज़ी भी की गई.
हाल ही में हुए निकाय चुनाव में BJP ने राज्यभर में मेयर के 16 पदों में से 14 पर जीत हासिल की है, लेकिन अलीगढ़ और मेरठ में उनके प्रत्याशी BSP के प्रत्याशियों से हारे हैं. अलीगढ़ में मेयर के पद पर BSP की जीत हुई है, लेकिन पार्षदों की सीटों पर BJP के 35 प्रत्याशी जीते, जबकि BSP को सिर्फ 21 सीटों पर जीत मिली.
BSP पार्षद मुशर्रफ हुसैन के खिलाफ पुलिस ने भारतीय दंड संहिता, यानी आईपीसी की धारा 295ए के तहत FIR दर्ज की है. IPC की यह धारा दुर्भावनापूर्ण ढंग से जानबूझकर किसी धर्म या धार्मिक परम्पराओं का उपहास कर किसी वर्ग की धार्मिक भावनाएं आहत करने के खिलाफ है.
हिन्दी और उर्दू को उत्तर प्रदेश में आधिकारिक भाषाओं का दर्जा हासिल है. इसके अलावा देश की सर्वोच्च विधायी संस्था संसद के शपथग्रहण से जुड़े नियमों के अनुसार भी शपथ किसी भी ऐसी भाषा में ली जा सकती है, जो संविधान के आठवीं अनुसूची में दर्ज 22 भाषाओं में शामिल है.
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इस बीच, अलीगढ़ के SSP राजेश पाण्डे ने कहा, "जैसा कि आप जानते हैं, जब पार्षद शपथ ले रहे थे, कुछ हल्ला-गुल्ला हुआ था... एक पार्षद ने उर्दू में शपथ ली थी, जिसकी वजह से माहौल गड़बड़ हो गया... दूसरे पक्ष ने शिकायत दर्ज करवाई है... उर्दू में शपथ लेना हरगिज़ भी गैरकानूनी नहीं है, लेकिन पुलिस को इसके बाद दखल देना पड़ा... FIR भी इसी संदर्भ में दर्ज की गई है... धारा 295 इसलिए लगाई गई है, क्योंकि वहां शपथग्रहण के बाद कथित रूप से धार्मिक नारेबाज़ी की गई थी..."