सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने किसी अन्य पार्टी में जाने से साफ इनकार किया है (फाइल फोटो)
इटावा:
परिवार से तल्ख हुए रिश्ते और यूपी विधानसभा चुनावों में पार्टी को मिली करारी हार के बाद अफवाहों का बाज़ार गर्म था कि शिवपाल सिंह यादव कोई नई पार्टी बना सकते हैं, लेकिन इन अटकलों को विराम देते हुए उन्होंने साफ कर दिया है कि वे ना तो कोई नई पार्टी बना रहे हैं और ना ही किसी और दल में जा रहे हैं.
उत्तर प्रदेश के पूर्व काबीना मंत्री शिवपाल ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में उनके बीजेपी में जाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि सारी ख़बरें बेबुनियाद हैं. उन्होंने कहा,‘मैं नेता जी (मुलायम सिंह यादव) के साथ हूँ और साथ रहूंगा.’
मालूम हो कि सपा संगठन की कमान अखिलेश के हाथ में जाने के बाद पार्टी प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए गए शिवपाल ने हाल में सम्पन्न विधानसभा चुनाव के दौरान एक जनसभा में कहा था कि 11 मार्च के बाद वह अपनी पार्टी बनाएंगे. इसके अलावा कुछ मीडिया रिपोर्ट में उनके बीजेपी में जाने की तैयारी के दावे भी किए गए थे.
मुलायम सिंह द्वारा मैनपुरी में अपने पुत्र एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खिलाफ टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा ‘जो अपने माता-पिता का कहना नहीं मानते, उनका सम्मान नहीं करते, वे कभी जीवन में तरक्की नहीं करते. मनुष्य को संस्कारवान होना चाहिए. संस्कार को नहीं भूलना चाहिए अन्यथा ऐसे लोग पतन की ओर चले जाते हैं.’
(इनपुट भाषा से)
उत्तर प्रदेश के पूर्व काबीना मंत्री शिवपाल ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में उनके बीजेपी में जाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि सारी ख़बरें बेबुनियाद हैं. उन्होंने कहा,‘मैं नेता जी (मुलायम सिंह यादव) के साथ हूँ और साथ रहूंगा.’
मालूम हो कि सपा संगठन की कमान अखिलेश के हाथ में जाने के बाद पार्टी प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए गए शिवपाल ने हाल में सम्पन्न विधानसभा चुनाव के दौरान एक जनसभा में कहा था कि 11 मार्च के बाद वह अपनी पार्टी बनाएंगे. इसके अलावा कुछ मीडिया रिपोर्ट में उनके बीजेपी में जाने की तैयारी के दावे भी किए गए थे.
मुलायम सिंह द्वारा मैनपुरी में अपने पुत्र एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खिलाफ टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा ‘जो अपने माता-पिता का कहना नहीं मानते, उनका सम्मान नहीं करते, वे कभी जीवन में तरक्की नहीं करते. मनुष्य को संस्कारवान होना चाहिए. संस्कार को नहीं भूलना चाहिए अन्यथा ऐसे लोग पतन की ओर चले जाते हैं.’
(इनपुट भाषा से)
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