प्रतीकात्मक तस्वीर
- मऊ में अस्थायी साक्षर मिशन के कर्मचारियों को नहीं मिल रहा वेतन
- फंड की कमी का दिया जा रहा है हवाला.
- कर्मचारियों को सितंबर, 2014 से कोई वेतन नहीं मिला है.
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मऊ:
यूपी के मऊ में जिला बेसिक शिक्षा के अधीन कार्यरत साक्षर मिशन के कर्मचारियों के लिए क्या सपा की सरकार और क्या बीजेपी की सरकार, दोनों एक ही जैसी हैं. इस मिशन में कार्यरत कर्मचारियों को सितंबर, 2014 से कोई वेतन नहीं मिला है. इस बात की जानकारी उस समय मिली, जब ईपीएफओ बनारस ने मऊ जिले के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं सचिव जिला लोक शिक्षा समिति को ईपीएफ कटौती जमा कराने के लिए पत्र भेजा.

बता दें कि इस योजना में केंद्र सरकार 75 फीसदी राशि देती है, जबकि राज्य सरकार की ओर से 25 फीसदी राशि दी जाती है. यूपी के प्रत्येक जिलों में ऐसे करीब 1000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं. ये सभी अस्थायी कर्मचारी हैं, जो शिक्षा विभाग के अधीन काम करते हैं.

मई 2017 को इन कर्मचारियों का पीएफ जमा कराने के लिए कहा गया था, जिसके जवाब में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 28 दिसंबर को सहायक भविष्यनिधि आयुक्त, वाराणसी को पत्र लिखकर जवाब दिया कि उन्हें सितंबर, 2014 से कोई फंड ही नहीं मिला है, जिस कारण इन लोगों को मानदेय भी नहीं दिया जा सका है. इसी वजह से इनके पीएफ का भी भुगतान नहीं किया जा सका है.
VIDEO: फ़ीस बढ़ाने की तैयारी में दिल्ली के प्राइवेट स्कूल

बता दें कि इस योजना में केंद्र सरकार 75 फीसदी राशि देती है, जबकि राज्य सरकार की ओर से 25 फीसदी राशि दी जाती है. यूपी के प्रत्येक जिलों में ऐसे करीब 1000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं. ये सभी अस्थायी कर्मचारी हैं, जो शिक्षा विभाग के अधीन काम करते हैं.

मई 2017 को इन कर्मचारियों का पीएफ जमा कराने के लिए कहा गया था, जिसके जवाब में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 28 दिसंबर को सहायक भविष्यनिधि आयुक्त, वाराणसी को पत्र लिखकर जवाब दिया कि उन्हें सितंबर, 2014 से कोई फंड ही नहीं मिला है, जिस कारण इन लोगों को मानदेय भी नहीं दिया जा सका है. इसी वजह से इनके पीएफ का भी भुगतान नहीं किया जा सका है.
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