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This Article is From Oct 08, 2017

नोटबंदी के बाद बची खुची कसर जीएसटी ने पूरी कर दी : अखिलेश यादव

‘प्रधानमंत्री 15 दिन पहले ही दिवाली ला देने की बात कर रहे हैं. वे जरा व्यापारियों से तो जाकर पूछें कि उनके लिए दिवाली पहले आ गई या फिर दिवाली से काफी पहले ही उनका दिवाला निकल गया.'

नोटबंदी के बाद बची खुची कसर जीएसटी ने पूरी कर दी : अखिलेश यादव
  • ‘नोटबंदी से कौन सा और कितना भ्रष्टाचार कम हुआ है'
  • ‘कर्जमाफी के नाम पर किसानों को सरासर धोखा दिया जा रहा है'
  • 'जब भी डिजिटल इंडिया की बात होगी, यूपी सबसे आगे खड़ा दिखाई देगा'
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मथुरा: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मोदी सरकार पर तीखे प्रहार करते हुए भाजपा को सबसे झूठी पार्टी करार दिया. उन्होंने कहा कि गरीबों की गरीबी दूर करने और उनके खातों में धन जमा करने के वादे कर नोटबंदी के बहाने छोटी से छोटी बचतें भी निकलवा ली गईं और फिर रही-सही कसर जीएसटी लागू कर पूरी कर दी गई. अखिलेश यादव समाज के एक ट्रस्ट द्वारा वृन्दावन में करोड़ों की लागत से बनाए जाने वाले बहुमंजिला ‘यादव भवन’ की आधारशिला रखने के लिए पहुंचे थे. इस मौके पर संवाददाताओं से मुलाकात में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की मोदी एवं योगी सरकारों पर जमकर भड़ास निकाली. उन्होंने दोनों ही नेताओं को धोखेबाज करार दिया.

उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री 15 दिन पहले ही दिवाली ला देने की बात कर रहे हैं. वे जरा व्यापारियों से तो जाकर पूछें कि उनके लिए दिवाली पहले आ गई या फिर दिवाली से काफी पहले ही उनका दिवाला निकल गया. रही बात गरीबों की, तो उसे तो न खील नजर आ रही है, और न ही बताशे. क्योंकि, उनसे उनका रोजगार ही छिन गया है. इस पर भी प्रधानमंत्री दिवाली जल्द ला देने की बात कहकर उल्टे उन्हें चिढ़ा रहे हैं.’ सपा नेता ने कहा, ‘जहां तक जीएसटी के मामलों में सुधार लाने की बात है तो प्रधानमंत्री अपने ही लोगों से आलोचना झेलने के बाद अब रोज समीक्षा के नाम पर छूटें देने की बात कर रहे हैं. अगर उन्हें जीएसटी की कमियां वास्तव में सुधारनी ही हैं तो व्यापारी जिन शिकायतों को शुरू से रखते आ रहे हैं उनका एक साथ ही निवारण क्यों नहीं कर देते.’

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अखिलेश यादव ने मोदी सरकार से सवाल किया, ‘नोटबंदी से कौन सा और कितना भ्रष्टाचार कम हुआ है. इसका जवाब साल भर बाद भी नहीं दे पा रहे बीजेपी वाले.’ उन्होंने कहा, ‘सच तो यह है कि भ्रष्टाचार के जड़ से खात्मे की बात करने वाले उस पर लगाम लगाने में भी पूरी तरह विफल रहे हैं. इसके लिए मुख्यमंत्री के गृह जनपद का उदाहरण ही काफी है जहां कमीशन के चक्कर में टेंडर लटके रहे और ऑक्सीजन के अभाव में कई बच्चों को जान गंवानी पड़ गई. यह सिलसिला अभी भी जारी है. क्योंकि अक्सर कहीं न कहीं से मरीजों के असामयिक मौत की खबरें आ ही रही हैं.’’

पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश में किसानों की कर्जमाफी पर तंज कसते हुए कहा, ‘कर्जमाफी के नाम पर किसानों को सरासर धोखा दिया जा रहा है. एक लाख रुपये की कर्जमाफी की बात कहकर एक-एक, दो-दो पैसे की कर्जमाफी की गई. यह किसानों के साथ खिलवाड़ नहीं तो फिर क्या है.’ उन्होंने गंगा-यमुना के शुद्धीकरण से जुड़ी भाजपा की योजनाओं पर उंगली उठाते आरोप लगाया, ‘वर्ष 2018 तक इन नदियों को आचमन योग्य पवित्रता दिलाने का दावा करने वालों ने कहीं भी धेला भर काम नहीं किया. मथुरा-वृन्दावन सहित अनेक स्थानों पर तो स्थिति और भी बदतर हो गई है.’

मोदी सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम पर अखिलेश ने कहा, ‘हमारी सरकार ने उत्तर प्रदेश में जितने लैपटॉप बांटे, उतने देश की किसी भी सरकार ने नहीं बांटे. राज्यों में जब भी डिजिटल इंडिया की बात होगी, उत्तर प्रदेश सबसे आगे खड़ा दिखाई देगा. क्योंकि, यहां रिकॉर्ड 18 लाख लैपटॉप हमारे कार्यकाल के दौरान बांटे गए, वह भी अंतरराष्ट्रीय स्तर वाली कंपनी एचपी के.’

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उन्होंने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर चुटकी लेते हुए इसे पूरी तरह से फेल बताया. वह बोले - ‘हमने राज्य को विश्वस्तरीय पुलिस की त्वरित सहायता सेवा ‘यूपी 100’ का तोहफा दिया था. इसके काम करने के तरीके की प्रशंसा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी दिल खोलकर की थी. लेकिन अब, योगी सरकार ने सब मिट्टी कर दिया. किसी भी शहर में यह सेवा सही प्रकार से चलती नजर नहीं आ रही.’

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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