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This Article is From Nov 06, 2019

दमघोटू प्रदूषण और डॉक्टरों की लापरवाही ने छीन ली मासूम बच्ची की जिंदगी, जानें पूरा मामला

फेफड़ों के रोग से पीड़ित पांच साल की मासूम बच्ची की जिंदगी की सांसे आखिरकार दमघोटू प्रदूषण ने छीन ली. इस मामले में नोएडा के जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर भी बड़ी लापरवाही किए जाने का आरोप लगा है.

दमघोटू प्रदूषण और डॉक्टरों की लापरवाही ने छीन ली मासूम बच्ची की जिंदगी, जानें पूरा मामला
नोएडा: डॉक्टरों की लापरवाही ने छीन ली मासूम बच्ची की जिंदगी
नोएडा:

फेफड़ों के रोग से पीड़ित पांच साल की मासूम बच्ची की जिंदगी की सांसे आखिरकार दमघोटू प्रदूषण ने छीन ली. इस मामले में नोएडा के जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर भी बड़ी लापरवाही किए जाने का आरोप लगा है. अस्पताल की सीएमएस अब एक कमेटी बनाकर सारे मामले की जांच करने की बात कह रही हैं, लेकिन इस कमेटी का जांच का फैसला चाहे जो भी हो एक मां को उसकी बच्ची की सांसे नहीं लौटा पाएगा.

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अपनी पांच वर्षीय मृत बेटी नंदिनी को आगोश में लेकर बिलख रही सुनीता बाल्मीकि का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण उसकी बेटी की मौत हुई है. सुनीता कहती है कि वह सुबह अपनी बेटी को सर्दी जुकाम की शिकायत होने पर इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल आई थी. एक घंटे लाइन लग कर पर्ची भी बनवाई और कमरा नंबर 151 डॉक्टर को भी दिखाया. डॉक्टर ने देखने के बाद एक्स-रे करा कर लाने को कहा जब वह एक्स-रे डॉक्टर के पास उनके कमरे में दिखने पहुंची डॉक्टर सीट पर नहीं मिले.

पूछने पर बताया गया की मीटिंग में गए है. 2 घंटे तक लाइन में खड़े होकर डॉक्टर का इंतजार करती रही, बेटी की हालत बिगड़ने पर वहां तैनात गार्ड से डॉक्टर को बुलाने का अनुरोध किया. जिसके बाद उसने भी धक्का देकर बाद में आने की बात कही. लाइन में खड़े-खड़े उसकी बेटी ने उसकी बाहों में दम तोड़ दिया. बेटी की मौत के बाद सुनीता ने जब हंगामा किया तो अस्पताल के प्रबंधन ने आनन-फानन बच्ची को इमरजेंसी में ले जाकर इलाज करने का दिखावा करना शुरू कर दिया और फिर थोड़ी देर बाद घोषित कर दिया कि बच्ची के दोनों से फेफड़े खराब होने के कारण उसकी मौत हो गई.

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अपनी पांच साल की बच्ची की यूं हुई मौत ने सुनीता और उसके पति को गहरे सदमे में डाल दिया. उनके साथ आए और लोगों ने जब हंगामा किया तो तथा प्रबंधन ने पुलिस को बुला लिया पुलिस ने आकर मामले को शांत किया. सीएमएस शिवम वंदना शर्मा ने इस सारे मामले की एक कमेटी बनाकर जांच करने की बात कही है. सीएमएस वंदना शर्मा भी स्वीकार करती हैं कि बच्ची की मौत दोनों फेफड़े खराब होने के कारण हुई है. वह कहती हैं कि अगर जांच में डॉक्टरों की लापरवाही की बात सामने आई तो जरूर उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा.

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मायावती सरकार के समय छह सौ करोड़ रुपए खर्च कर यह अस्पताल इसलिए बनाया गया था कि गरीबों को उचित इलाज मिल सके लेकिन सुनीता बाल्मीकि की बेटी नंदनी की मौत से इस अस्पताल की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है.

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