शहीद कांस्टेबल प्रेम सागर के शव पर माल्यार्पण करता बीएसएफ का जवान.
- सीमा पर गश्त कर रहे दो भारतीय जवानों को पाकिस्तान ने मारा
- दोनों शहीदों के शवों को क्षत विक्षत किया गया.
- दोनों के शवों का अंतिम संस्कार किया गया.
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नई दिल्ली:
जम्मू कश्मीर में सीमा के करीब पेट्रोलिंग करती हुई भारतीय सुरक्षा बलों की टुकड़ी पर हमला कर दो जवानों की हत्या कर उनके शव के क्षत विक्षत कर दिया गया था. इसके बाद शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए शहीदों के शवों को उनके पैतृक गांव भेजा गिया था. यूपी के देवरिया के रहने वाले बीएसएफ के कांस्टेबल प्रेम सागर का शव भी उनके गांव पहुंचा. आज उनका पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया.
अब यह जानकारी आई है कि परिजनों ने काफी समय तक शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार दिया था और कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात करनी है.
इस मामले में परिजनों ने शव के दाह संस्कार की बात तब स्वीकारी जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आधी रात के बाद शहीद के बड़े बेटे से सीधे बात की. बेटे ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव में उनके पिता के नाम पर एक स्कूल बनेगा और एक मेमोरियल भी बनाया जाएगा. इतना ही नहीं सीएम खुद 13 दिनों के भीतर उनके गांव आकर परिजनों से मुलाकात करेंगे.
उल्लेखनीय है कि कांस्टेबल सागर और नायब सूबेदार परमजीत सिंह उन तीन सदस्यीय पेट्रोलिंग टीम का सदस्य थे जो एलओसी के पास गस्त कर रही थी जिस पर पाकिस्तान की बैट टीम के सदस्यों और आतंकियों ने हमला किया.
इन लोगों के क्षत विक्षत शव सोमवार को सुबह मिले. सूत्रों का कहना था कि इस हमले में लश्कर के आतंकी शामिल थे जिन्हें पाकिस्तानी सेना का पूरा साथ मिला. कांस्टेबल सागर की बेटी ने कहा कि उसे अपने पिता की शहादत के बदले पाकिस्तानी सेना के 50 सिल चाहिए.
ऐसा ही कुछ हाल नायब सूबेदार परमजीत सिंह के गांव में भी था. उन लोगों ने भी बिना शव के देखे अंतिम संस्कार करने से पहले मना कर दिया था. उन्होंने कहा था कि आखिर यह शव किसका है. यह एक बक्से में है. बिना देखे कैसे अंतिम संस्कार कर दें. वह यह मानने को तैयार नहीं थे कि परमजीत सिंह शहीद हो चुके हैं.
अब यह जानकारी आई है कि परिजनों ने काफी समय तक शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार दिया था और कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात करनी है.
इस मामले में परिजनों ने शव के दाह संस्कार की बात तब स्वीकारी जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आधी रात के बाद शहीद के बड़े बेटे से सीधे बात की. बेटे ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव में उनके पिता के नाम पर एक स्कूल बनेगा और एक मेमोरियल भी बनाया जाएगा. इतना ही नहीं सीएम खुद 13 दिनों के भीतर उनके गांव आकर परिजनों से मुलाकात करेंगे.
उल्लेखनीय है कि कांस्टेबल सागर और नायब सूबेदार परमजीत सिंह उन तीन सदस्यीय पेट्रोलिंग टीम का सदस्य थे जो एलओसी के पास गस्त कर रही थी जिस पर पाकिस्तान की बैट टीम के सदस्यों और आतंकियों ने हमला किया.
इन लोगों के क्षत विक्षत शव सोमवार को सुबह मिले. सूत्रों का कहना था कि इस हमले में लश्कर के आतंकी शामिल थे जिन्हें पाकिस्तानी सेना का पूरा साथ मिला. कांस्टेबल सागर की बेटी ने कहा कि उसे अपने पिता की शहादत के बदले पाकिस्तानी सेना के 50 सिल चाहिए.
ऐसा ही कुछ हाल नायब सूबेदार परमजीत सिंह के गांव में भी था. उन लोगों ने भी बिना शव के देखे अंतिम संस्कार करने से पहले मना कर दिया था. उन्होंने कहा था कि आखिर यह शव किसका है. यह एक बक्से में है. बिना देखे कैसे अंतिम संस्कार कर दें. वह यह मानने को तैयार नहीं थे कि परमजीत सिंह शहीद हो चुके हैं.
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