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छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं की खुलेगी किस्मत, GST परिषद की अगली बैठक में मिल सकती है बड़ी राहत; जानें क्या होगा फायदा

Small Online Sellers relief news: डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और देश के छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए जीएसटी परिषद प्रक्रियागत सुधारों का एक बड़ा पैकेज लाने की तैयारी में है.जानिए इन बदलावों का आपकी जेब और कारोबार पर क्या असर होगा.

छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं की खुलेगी किस्मत, GST परिषद की अगली बैठक में मिल सकती है बड़ी राहत; जानें क्या होगा फायदा
छोटे ईकॉमर्स कारोबारियों को जीएसटी परिषद से मिलेगी बड़ी राहत! ईकॉमर्स गोदामों के इस्तेमाल और ITC नियमों में सुधार की तैयारी
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GST Council Meeting : देश के छोटे ईकॉमर्स विक्रेताओं और एमएसएमई (MSME) कारोबारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है. दरअसल, जीएसटी परिषद (GST Council) की अगली बैठक में व्यापार को आसान बनाने (Ease of Doing Business) के मकसद से कई महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी मिल सकती है. नए प्रस्तावों के तहत छोटे ऑनलाइन सेलर्स को ई कॉमर्स कंपनियों के गोदामों को अतिरिक्त व्यावसायिक स्थान (APoB) के रूप में पंजीकृत करने की छूट मिल सकती है. इसके अलावा ईमानदार टैक्सपेयर्स के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुरक्षा और छोटे टैक्स विवादों को खत्म करने के लिए मौद्रिक सीमा तय करने की तैयारी है. 

अमेजन (Amazon), फ्लिपकार्ट (Flipkart) या दूसरे ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर सामान बेचने वाले छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों को अब अलग-अलग राज्यों में व्यापार फैलाने के लिए महंगे किराए के गोदामों या भौतिक कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. परिषद की आगामी बैठक में छोटे ऑनलाइन सेलर्स के लिए नियमों को अधिक व्यावहारिक और पारदर्शी बनाने पर सहमति बन सकती है.

 7 अक्टूबर को होगी जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक

जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक  7 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में बुलाई गई है. पहले यह बैठक 12 सितंबर को प्रस्तावित थी, लेकिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के चलते इसके कार्यक्रम में बदलाव किया गया था. हर बार की तरह, इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता भी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ही करेंगी. इसी बैठक में छोटे ईकॉमर्स कारोबारियों बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. 

ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म के गोदामों का कर सकेंगे इस्तेमाल

छोटे ईकॉमर्स विक्रेताओं को अब जीएसटी पंजीकरण के तहत ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के स्थापित गोदामों को ही अपना अतिरिक्त व्यावसायिक स्थान घोषित करने की अनुमति दी जा सकती है. इस कदम से विक्रेताओं को उस राज्य में अलग से कोई दुकान या गोदाम किराए पर लेने या भौतिक सत्यापन के जटिल कानूनी कागजी झंझटों से मुक्ति मिलेगी. इससे लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आएगी और एमएसएमई सेलर पूरे देश में आसानी से डिलीवरी कर सकेंगे.

ईमानदार खरीदारों के इनपुट टैक्स क्रेडिट की होगी सुरक्षा

मौजूदा नियमों के तहत अगर कोई सप्लायर खरीदार से जीएसटी वसूलने के बाद सरकार के पास जमा नहीं करता है, तो खरीदार का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) रोक दिया जाता है या उसे नोटिस जारी कर दिया जाता है. जीएसटी परिषद अब ऐसे नए सुरक्षात्मक दिशा निर्देश लाने जा रही है, जिससे अगर खरीदार ने पूरा भुगतान किया है और वह एक ईमानदार करदाता है, तो विक्रेता की डिफॉल्ट या गलती के बावजूद खरीदार का आईटीसी क्लेम नहीं अटकाया जाएगा.

कानूनी मुकदमों में कमी के लिए मौद्रिक सीमा का निर्धारण

टैक्स विभागों और अदालतों में लंबित छोटे-छोटे मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए जीएसटी परिषद कानूनी विवादों की मौद्रिक सीमा तय करने पर विचार कर रही है. इसके तहत कर अधिकारियों की ओर से छोटे-मोटे टैक्स विवादों को अपीलीय प्राधिकरणों या उच्च अदालतों में ले जाने पर रोक लगाने के लिए एक निश्चित न्यूनतम मौद्रिक सीमा तय की जाएगी. इस व्यवस्था से छोटे मुकदमों की संख्या में भारी गिरावट आएगी, जिससे कारोबारियों का उत्पीड़न रुकेगा और अदालतों व टैक्स अधिकारियों का बहुमूल्य समय बचेगा.

कौन हैं छोटे ऑनलाइन विक्रेता 

छोटे ऑनलाइन विक्रेता उन व्यक्तियों, स्थानीय दुकानदारों या छोटे व्यापारियों को कहा जाता है, जो बड़ी कंपनियों के मुकाबले सीमित बजट और संसाधनों के साथ इंटरनेट के जरिए अपना कारोबार चलाते हैं. इन्हें आमतौर पर रीसेलर या सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग श्रेणी में रखा जाता है. ये विक्रेता अपने उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए मुख्य रूप से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों जैसे अमेज़न, फ्लिपकार्ट, मीशो और मिंत्रा जैसे माध्यमों का सहारा लेते हैं. 

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जीएसटी परिषद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 279 A के तहत स्थापित एक संवैधानिक निकाय है. इसमें कुल 33 सदस्य शामिल होते हैं, जो केंद्र सरकार के साथ-साथ सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते हैं. केंद्रीय वित्त मंत्री इस परिषद के प्रमुख यानी अध्यक्ष होते हैं.वहीं, केंद्र सरकार की तरफ से राजस्व या वित्त विभाग के प्रभारी राज्य मंत्री इसके सदस्य होते हैं. इसके अलावा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 31 सदस्य हैं. भारत के सभी 28 राज्यों के वित्त मंत्री, कराधान मंत्री या राज्य सरकार की ओर से नामित कोई भी  मंत्री इसके सदस्य होते हैं. विधानसभा वाले 3 केंद्र शासित प्रदेशों जैसे दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर के वित्त मंत्री या नामित मंत्री भी इसमें शामिल होते हैं.

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