Ganga Expressway: गंगा एक्सप्रेसवे अब लगभग तैयार हो चुका है. 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरदोई में इसका शुभारंभ करेंगे. गंगा एक्सप्रेसवे की शुरुआत मेरठ के बिजौली गांव से होगी और 594 किमी की यात्रा तय कर प्रयागराज पर जाकर खत्म होगी. दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल को गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने वाले हैं. करीब 36,200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह एक्सप्रेसवे माल ढुलाई और परिवहन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.
यह एक्सप्रेसवे उस माल को भी सड़कों पर लाने में मदद करेगा, जो पहले दूसरे साधनों से भेजा जाता था. इस परियोजना से परिवहन, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है. गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को सीधे जोड़ता है, जिससे यात्रा और कारोबार दोनों आसान होंगे. इस एक्सप्रेसवे की आधारशिला 18 दिसंबर, 2021 को शाहजहांपुर में प्रधानमंत्री मोदी ने रखी थी. इस प्रोजेक्ट को 2020 में राज्य कैबिनेट की मंजूरी मिली थी. चलिए आपको बताते हैं गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ी 5 अहम बातें, जो इसे खास बनाती हैं.
उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से को पूर्वी हिस्से से जोड़ने वाला एक बड़ा और महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे है. इसकी कुल लंबाई लगभग 594 किलोमीटर है. यह एक्सप्रेसवे मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जूदापुर डांडू गांव तक जाएगा. इसके बनने से मेरठ से प्रयागराज तक सीधी और आसान सड़क कनेक्टिविटी मिल जाएगी. एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद यह उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होगा. इससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) को राज्य के पूर्वी इलाकों से सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा.
गंगा एक्सप्रेसवे 12 जिलों से होकर गुजरेगा
गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज. इस परियोजना से 500 से अधिक गांवों को फायदा मिलेगा और इन इलाकों में व्यापार, रोजगार और विकास के नए अवसर पैदा होंगे.
इसे उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) द्वारा चार अलग‑अलग पैकेजों में बनाया गया है. इस एक्सप्रेसवे में गंगा नदी पर करीब 960 मीटर लंबा पुल, रामगंगा नदी पर लगभग 720 मीटर लंबा पुल बनाया गया है। इसके अलावा, शाहजहांपुर के पास 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी (एयरस्ट्रिप) भी बनाई गई है, ताकि आपातकाल में भारतीय वायुसेना (IAF) के विमान यहां से टेकऑफ और लैंडिंग कर सकें. भारतीय वायुसेना यहां आपात लैंडिंग का सफल अभ्यास भी कर चुकी है. इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से मेरठ से प्रयागराज का सफर, जो पहले 10–12 घंटे में पूरा होता था, अब सिर्फ 6–7 घंटे में पूरा हो सकेगा.
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औद्योगिक कॉरिडोर और लॉजिस्टिक्स में सुधार
गंगा एक्सप्रेसवे को एक पूरे औद्योगिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है. राज्य सरकार का लक्ष्य है कि इसके आसपास निवेश और उद्योगों को बढ़ावा मिले. यात्रा का समय घटने और ईंधन की बचत होने से लॉजिस्टिक्स (माल ढुलाई) की लागत कम होगी. यह भारत जैसे देश के लिए बेहद अहम है, जहां 2021 के PIB आंकड़ों के मुताबिक करीब 65% माल ढुलाई और 80% यात्री यातायात सड़क मार्ग से होता है. कुल मिलाकर, गंगा एक्सप्रेसवे से परिवहन, व्यापार और उद्योग तीनों को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है.
गंगा एक्सप्रेसवे से यूपी की तस्वीर बदलने वाली 5 अहम बातें
समय की बचत- मेरठ के बिजौली गांव से प्रयागराज के जुदापुर डांडू तक का सफर अब मात्र 6 घंटे में पूरा होगा. अभी तक लोग 11-12 घंटे का समय लेते थे, जिससे सफर आसान और तेज हो जाएगा.
औद्योगिक और आर्थिक विकास- यह एक्सप्रेसवे 12 जिलों से होकर गुजरता है और औद्योगिक गलियारे के रूप में काम करेगा, जिससे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, बदायूं, शाहजहांपुर, और प्रयागराज जैसे क्षेत्रों में नए उद्योग, वेयरहाउसिंग और निवेश को बढ़ावा मिलेगा.
आध्यात्मिक व सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा- प्रयागराज जैसे धार्मिक स्थल से सीधी कनेक्टिविटी मिलने से पश्चिमी यूपी के निवासियों के लिए कुंभ, महाकुंभ और गंगा स्नान के लिए पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा, जिससे पर्यटन में वृद्धि होगी.
सुरक्षा और हाई-स्पीड यात्रा- 120 किमी/घंटे की गति सीमा वाले इस एक्सप्रेसवे पर शाहजहांपुर में एक हवाई पट्टी भी है. साथ ही, बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट और सुरक्षा के लिए हाई-टेक कैमरे लगाए गए हैं.
किसानों और कृषि आधारित उद्योगों को फायदा- गंगा एक्सप्रेसवे से फल, सब्जियां और दूध जैसे खराब होने वाले कृषि उत्पाद जल्दी से प्रमुख बाजारों तक पहुंच सकेंगे, जिससे किसानों को उनके उत्पादों की बेहतर कीमत मिलेगी.
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