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आखिरी इच्छा की अनोखी कहानी...न जलाया, न दफनाया...मरने के बाद बहन की हड्डियों से बना दी विंड चाइम
- Sunday May 3, 2026
- Written by: शालिनी सेंगर
मौत के बाद अक्सर लोग श्मशान या कब्रिस्तान का रुख करते हैं, लेकिन अमेरिका के डेनवर में एक बहन ने वसीयत की ऐसी शर्त पूरी की, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे. एरिन ने अपनी मरी हुई बहन को मिट्टी या आग के हवाले नहीं किया, बल्कि उसकी हड्डियों से एक 'विंड चाइम' बनवाकर बालकनी में टांग दिया.
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ndtv.in
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मलबे के ढेर में भी है जान! कलाकार ने ईंटों से उकेरी ऐसी दास्तां, देखकर आप भी कहेंगे- वाह उस्ताद
- Sunday April 5, 2026
- Written by: शालिनी सेंगर
जिस मलबे को लोग कचरा समझकर पैरों से ठोकर मार देते हैं, कोई उसमें भी 'जिंदगी' ढूंढ सकता है क्या? दिल्ली के आर्ट फेयर में एक उस्ताद ने ऐसी जादूगरी दिखाई है कि पुरानी ईंटों के सीने से खामोश चेहरे बोल पड़े हैं. यकीन मानिए, ये कलाकारी नहीं, बल्कि उन टूटे हुए घरों की रूह है, जिन्हें दुनिया ने कब का भुला दिया था.
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ndtv.in
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पत्थर की मूर्ति नहीं...जिंदा मजबूरी, सच्चाई जान छलक पड़े लोगों के आंसू
- Sunday December 28, 2025
- Written by: शालिनी सेंगर
सड़क किनारे बैठी एक 'मूर्ति' को लोग चुपचाप देखते, फोटो खींचते और पैसे रखकर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन जैसे ही हकीकत सामने आती है, एहसास होता है कि यह पत्थर नहीं, बल्कि एक जिंदा महिला की खामोश मजबूरी है. यही वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों के दिल को झकझोर रहा है.
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आखिरी इच्छा की अनोखी कहानी...न जलाया, न दफनाया...मरने के बाद बहन की हड्डियों से बना दी विंड चाइम
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मौत के बाद अक्सर लोग श्मशान या कब्रिस्तान का रुख करते हैं, लेकिन अमेरिका के डेनवर में एक बहन ने वसीयत की ऐसी शर्त पूरी की, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे. एरिन ने अपनी मरी हुई बहन को मिट्टी या आग के हवाले नहीं किया, बल्कि उसकी हड्डियों से एक 'विंड चाइम' बनवाकर बालकनी में टांग दिया.
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मलबे के ढेर में भी है जान! कलाकार ने ईंटों से उकेरी ऐसी दास्तां, देखकर आप भी कहेंगे- वाह उस्ताद
- Sunday April 5, 2026
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जिस मलबे को लोग कचरा समझकर पैरों से ठोकर मार देते हैं, कोई उसमें भी 'जिंदगी' ढूंढ सकता है क्या? दिल्ली के आर्ट फेयर में एक उस्ताद ने ऐसी जादूगरी दिखाई है कि पुरानी ईंटों के सीने से खामोश चेहरे बोल पड़े हैं. यकीन मानिए, ये कलाकारी नहीं, बल्कि उन टूटे हुए घरों की रूह है, जिन्हें दुनिया ने कब का भुला दिया था.
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पत्थर की मूर्ति नहीं...जिंदा मजबूरी, सच्चाई जान छलक पड़े लोगों के आंसू
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सड़क किनारे बैठी एक 'मूर्ति' को लोग चुपचाप देखते, फोटो खींचते और पैसे रखकर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन जैसे ही हकीकत सामने आती है, एहसास होता है कि यह पत्थर नहीं, बल्कि एक जिंदा महिला की खामोश मजबूरी है. यही वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों के दिल को झकझोर रहा है.
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