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बरेली हिंसा केस में बड़ा मोड़, मास्टरमाइंड के करीबी नाजिम रज़ा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत
- Wednesday February 4, 2026
- Reported by: Deepak Gambhir, Edited by: संज्ञा सिंह
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 26 सितंबर 2025 की बरेली हिंसा के आरोपी नाजिम रज़ा खान को सशर्त जमानत दे दी है. कोर्ट ने कहा कि आरोपी का नाम एफआईआर में नहीं था और वह लंबे समय से जेल में बंद था.
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! आजीवन कारावास की सजा को बदला, आरोपियों की रिहाई
- Friday January 23, 2026
- Written by: प्रफुल्ल तिवारी, Edited by: धीरज आव्हाड़
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक पुराने आपराधिक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए हत्या के दोष को गैर-इरादतन हत्या में बदल दिया. कोर्ट ने माना कि घटना अचानक हुई थी और हत्या का कोई पूर्व इरादा साबित नहीं हुआ.
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आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में चार्ज फ्रेम करने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी बात कह दी
- Friday January 9, 2026
- Reported by: Deepak Gambhir, Edited by: पीयूष जयजान
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आत्महत्या मामले में क्रिमिनल रिवीजन खारिज करते हुए कहा कि आरोप तय करने के चरण में अनुमान/गंभीर संदेह पर्याप्त है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 228 CrPC के तहत चार्ज फ्रेमिंग के समय विस्तृत कारण आवश्यक नहीं, जबकि धारा 227 में डिस्चार्ज के लिए कारण रिकॉर्ड करना पड़ता है. IPC 306 में ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय करने का आदेश बरकरार रखा गया.
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फर्जी एनकाउंटर में 'SSP-DSP' समेत 5 दोषी, तीन दशक पुराने केस में CBI कोर्ट का अहम फैसला
- Friday August 1, 2025
- Reported by: मुकेश सिंह सेंगर, Edited by: मनोज शर्मा
फर्जी एनकाउंटर का यह मामला 1993 में पंजाब में अमृतसर के दो थानों से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस सीबीआई ने लिया था. अब स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने तत्कालीन एसएसपी-डीएसपी समेत पांच पूर्व पुलिस अफसरों को हत्या का दोषी करार दिया है.
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ज्योति-आलोक मौर्य केस: क्या पत्नी से गुजारा-भत्ता मांग सकता है पति? क्या कहता है कानून, वकील से जानिए
- Monday July 28, 2025
- Written by: Nilesh Kumar
इस मामले ने एक बार फिर भारतीय न्याय संहिता और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत भरण-पोषण के प्रावधानों पर बहस छेड़ दी है. इन प्रावधानों को विस्तार से समझने के लिए हमने पटना हाई कोर्ट के अधिवक्ता कुमार आंजनेय शानू से बात की.
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"देशद्रोह की धारा को अलविदा": राज्यसभा में नया आपराधिक संहिता बिल पारित होने पर पीएम मोदी
- Thursday December 21, 2023
- Reported by: प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया, Edited by: सूर्यकांत पाठक
पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को तीन आपराधिक न्याय विधेयकों (Criminal Justice Bills) के पारित होने की सराहना की. नए कानून देश में औपनिवेशिक युग में बनाए गए कानूनों की जगह लेंगे. पीएम मोदी ने कहा कि यह सार्वजनिक सेवा और कल्याण पर केंद्रित कानूनों के साथ एक नए युग की शुरुआत है.
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आपराधिक मामले की जांच के दौरान पुलिस किसी अचल संपत्ति को जब्त नहीं कर सकती
- Tuesday September 24, 2019
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: आरिफ खान मंसूरी
बॉम्बे उच्च न्यायालय की फुल बेंच ने बहुमत के फैसले में माना था कि जांच के दौरान पुलिस के पास संपत्ति जब्त करने की कोई शक्ति नहीं है. महाराष्ट्र सरकार ने यह कहते हुए इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी कि सर्वोच्च अदालत के तपस नियोगी में फैसले के अनुसार पुलिस बैंक खातों को फ्रीज कर सकती है. उसी तरह पुलिस अपराध से संबंधित संपत्ति जब्त कर सकती है. लेकिन सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट राज्य की इन दलीलों से सहमत नहीं क्योंकि उसका मानना था कि इससे पुलिस द्वारा अपनी शक्ति का दुरुपयोग हो सकता है.
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सुप्रीम कोर्ट बोला: व्यभिचार अपराध नहीं, पति, पत्नी का मालिक नहीं, पढ़ें इस मामले की पूरी टाइमलाइन
- Thursday September 27, 2018
- ख़बर न्यूज़ डेस्क
सुप्रीम कोर्ट ने व्यभिचार कानून को रद्द कर दिया और अब से यह अपराध नहीं रहा. सुप्रीम कोर्ट की प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से व्यभिचार से संबंधित दंडात्मक प्रावधान को असंवैधानिक करार देते हुए उसे मनमाना और महिलाओं की व्यक्तिकता को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए निरस्त किया. मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा ने कहा, "व्यभिचार अपराध नहीं हो सकता. यह निजता का मामला है. पति, पत्नी का मालिक नहीं है. महिलाओं के साथ पुरूषों के समान ही व्यवहार किया जाना. इस मामले में हुई सुनवाई से संबंधित घटनाक्रम कुछ इस प्रकार रहा.
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सुप्रीम कोर्ट के ये हैं 5 जज, जिन्होंने समलैंगिकता के बाद अब व्यभिचार को किया अपराध से बाहर
- Thursday September 27, 2018
- ख़बर न्यूज़ डेस्क
158 साल पुराने कानून IPC 497 (व्यभिचार) की वैधता (Adultery under Section 497) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपना फैसला सुना दिया. सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने व्यभिचार को आपराधिक कृत्य बताने वाले दंडात्मक प्रावधान को सर्वसम्मति से निरस्त किया. सुप्रीम कोर्ट ने 157 साल पुराने व्यभिचार को रद्द कर दिया और कहा कि किसी पुरुष द्वारा विवाहित महिला से यौन संबंध बनाना अपराध नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि व्यभिचार कानून असंवैधानिक है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि व्यभिचार कानून मनमाना और भेदभावपूर्ण है. यह लैंगिक समानता के खिलाफ है. मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा के संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाया है. बता दें कि इस पीठ ने ही धारा 377 पर अपना अहम फैसला सुनाया था. इससे पहले इसी बेंच ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से अलग किया था. तो चलिए जानते हैं उन पांचों जजों के बारे में...
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158 साल पुराने व्यभिचार कानून को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द, संविधान पीठ ने कहा- यह अपराध नहीं
- Thursday September 27, 2018
- Reported by: आशीष भार्गव
157 साल पुराने कानून IPC 497 (व्यभिचार) की वैधता (Supreme Court verdict on Adultery under Section 497) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)का फैसला गुरुवार को आएगा. सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ ने 9 अगस्त को व्यभिचार की धारा IPC 497 पर फैसला सुरक्षित रखा था. पीठ तय करेगी कि यह धारा अंसवैधानिक है या नहीं, क्योंकि इसमें सिर्फ पुरुषों को आरोपी बनाया जाता है, महिलाओं को नहीं.
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बरेली हिंसा केस में बड़ा मोड़, मास्टरमाइंड के करीबी नाजिम रज़ा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत
- Wednesday February 4, 2026
- Reported by: Deepak Gambhir, Edited by: संज्ञा सिंह
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 26 सितंबर 2025 की बरेली हिंसा के आरोपी नाजिम रज़ा खान को सशर्त जमानत दे दी है. कोर्ट ने कहा कि आरोपी का नाम एफआईआर में नहीं था और वह लंबे समय से जेल में बंद था.
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! आजीवन कारावास की सजा को बदला, आरोपियों की रिहाई
- Friday January 23, 2026
- Written by: प्रफुल्ल तिवारी, Edited by: धीरज आव्हाड़
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक पुराने आपराधिक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए हत्या के दोष को गैर-इरादतन हत्या में बदल दिया. कोर्ट ने माना कि घटना अचानक हुई थी और हत्या का कोई पूर्व इरादा साबित नहीं हुआ.
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आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में चार्ज फ्रेम करने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी बात कह दी
- Friday January 9, 2026
- Reported by: Deepak Gambhir, Edited by: पीयूष जयजान
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आत्महत्या मामले में क्रिमिनल रिवीजन खारिज करते हुए कहा कि आरोप तय करने के चरण में अनुमान/गंभीर संदेह पर्याप्त है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 228 CrPC के तहत चार्ज फ्रेमिंग के समय विस्तृत कारण आवश्यक नहीं, जबकि धारा 227 में डिस्चार्ज के लिए कारण रिकॉर्ड करना पड़ता है. IPC 306 में ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय करने का आदेश बरकरार रखा गया.
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फर्जी एनकाउंटर में 'SSP-DSP' समेत 5 दोषी, तीन दशक पुराने केस में CBI कोर्ट का अहम फैसला
- Friday August 1, 2025
- Reported by: मुकेश सिंह सेंगर, Edited by: मनोज शर्मा
फर्जी एनकाउंटर का यह मामला 1993 में पंजाब में अमृतसर के दो थानों से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस सीबीआई ने लिया था. अब स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने तत्कालीन एसएसपी-डीएसपी समेत पांच पूर्व पुलिस अफसरों को हत्या का दोषी करार दिया है.
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ज्योति-आलोक मौर्य केस: क्या पत्नी से गुजारा-भत्ता मांग सकता है पति? क्या कहता है कानून, वकील से जानिए
- Monday July 28, 2025
- Written by: Nilesh Kumar
इस मामले ने एक बार फिर भारतीय न्याय संहिता और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत भरण-पोषण के प्रावधानों पर बहस छेड़ दी है. इन प्रावधानों को विस्तार से समझने के लिए हमने पटना हाई कोर्ट के अधिवक्ता कुमार आंजनेय शानू से बात की.
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"देशद्रोह की धारा को अलविदा": राज्यसभा में नया आपराधिक संहिता बिल पारित होने पर पीएम मोदी
- Thursday December 21, 2023
- Reported by: प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया, Edited by: सूर्यकांत पाठक
पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को तीन आपराधिक न्याय विधेयकों (Criminal Justice Bills) के पारित होने की सराहना की. नए कानून देश में औपनिवेशिक युग में बनाए गए कानूनों की जगह लेंगे. पीएम मोदी ने कहा कि यह सार्वजनिक सेवा और कल्याण पर केंद्रित कानूनों के साथ एक नए युग की शुरुआत है.
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आपराधिक मामले की जांच के दौरान पुलिस किसी अचल संपत्ति को जब्त नहीं कर सकती
- Tuesday September 24, 2019
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: आरिफ खान मंसूरी
बॉम्बे उच्च न्यायालय की फुल बेंच ने बहुमत के फैसले में माना था कि जांच के दौरान पुलिस के पास संपत्ति जब्त करने की कोई शक्ति नहीं है. महाराष्ट्र सरकार ने यह कहते हुए इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी कि सर्वोच्च अदालत के तपस नियोगी में फैसले के अनुसार पुलिस बैंक खातों को फ्रीज कर सकती है. उसी तरह पुलिस अपराध से संबंधित संपत्ति जब्त कर सकती है. लेकिन सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट राज्य की इन दलीलों से सहमत नहीं क्योंकि उसका मानना था कि इससे पुलिस द्वारा अपनी शक्ति का दुरुपयोग हो सकता है.
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सुप्रीम कोर्ट बोला: व्यभिचार अपराध नहीं, पति, पत्नी का मालिक नहीं, पढ़ें इस मामले की पूरी टाइमलाइन
- Thursday September 27, 2018
- ख़बर न्यूज़ डेस्क
सुप्रीम कोर्ट ने व्यभिचार कानून को रद्द कर दिया और अब से यह अपराध नहीं रहा. सुप्रीम कोर्ट की प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से व्यभिचार से संबंधित दंडात्मक प्रावधान को असंवैधानिक करार देते हुए उसे मनमाना और महिलाओं की व्यक्तिकता को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए निरस्त किया. मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा ने कहा, "व्यभिचार अपराध नहीं हो सकता. यह निजता का मामला है. पति, पत्नी का मालिक नहीं है. महिलाओं के साथ पुरूषों के समान ही व्यवहार किया जाना. इस मामले में हुई सुनवाई से संबंधित घटनाक्रम कुछ इस प्रकार रहा.
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सुप्रीम कोर्ट के ये हैं 5 जज, जिन्होंने समलैंगिकता के बाद अब व्यभिचार को किया अपराध से बाहर
- Thursday September 27, 2018
- ख़बर न्यूज़ डेस्क
158 साल पुराने कानून IPC 497 (व्यभिचार) की वैधता (Adultery under Section 497) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपना फैसला सुना दिया. सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने व्यभिचार को आपराधिक कृत्य बताने वाले दंडात्मक प्रावधान को सर्वसम्मति से निरस्त किया. सुप्रीम कोर्ट ने 157 साल पुराने व्यभिचार को रद्द कर दिया और कहा कि किसी पुरुष द्वारा विवाहित महिला से यौन संबंध बनाना अपराध नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि व्यभिचार कानून असंवैधानिक है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि व्यभिचार कानून मनमाना और भेदभावपूर्ण है. यह लैंगिक समानता के खिलाफ है. मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा के संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाया है. बता दें कि इस पीठ ने ही धारा 377 पर अपना अहम फैसला सुनाया था. इससे पहले इसी बेंच ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से अलग किया था. तो चलिए जानते हैं उन पांचों जजों के बारे में...
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158 साल पुराने व्यभिचार कानून को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द, संविधान पीठ ने कहा- यह अपराध नहीं
- Thursday September 27, 2018
- Reported by: आशीष भार्गव
157 साल पुराने कानून IPC 497 (व्यभिचार) की वैधता (Supreme Court verdict on Adultery under Section 497) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)का फैसला गुरुवार को आएगा. सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ ने 9 अगस्त को व्यभिचार की धारा IPC 497 पर फैसला सुरक्षित रखा था. पीठ तय करेगी कि यह धारा अंसवैधानिक है या नहीं, क्योंकि इसमें सिर्फ पुरुषों को आरोपी बनाया जाता है, महिलाओं को नहीं.
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