Ayodha Dispute
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Ayodhya Case: कोर्ट के फैसले से पहले मुस्लिम पक्ष ने दिलाई SC को संवैधानिक मूल्यों की याद, कहा- आपका फैसला हमेशा ही...
- Monday October 21, 2019
अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला सुरक्षित होने के साथ ही अयोध्या (Ayodhya) में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अयोध्या (Ayodhya) राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद ज़मीन विवाद पर सुनवाई पूरी कर ली थी. लगातार चालीस दिन तक चली देश के इतिहास की दूसरी सबसे लंबी सुनवाई के बाद फ़ैसला सुरक्षित रख लिया गया है. फैसला 17 नवंबर तक आ सकता है. वहीं, अयोध्या पर मध्यस्थता पैनल ने सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंप दी. सूत्रों के मुताबिक़, सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित जमीन पर दावा छोड़ने को तैयार. सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड दूसरी जगह मस्जिद बनाने को राजी हो गया है.
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अयोध्या विवाद : 1934 से पहले मुसलमान वहां नियमित रूप से नमाज पढ़ते थे, हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था : सुप्रीम कोर्ट
- Wednesday October 16, 2019
- Bhasha
अयोध्या विवाद मामले की सुनवाई आज से नियमित रूप से सुप्रीम कोर्ट में शुरू हो चुकी है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि 1934 से पहले मुसलमान वहां नियमित रूप से नमाज पढ़ते थे, हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था . वहीं निर्मोही अखाड़ा की ओर से कहा गया कि 1934 से 1949 तक मुसलमान विवादित ढांचे में जुमे की नमाज अदा करते थे. निर्मोही अखाड़ा के वकील ने भूमि विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के निष्कर्षों का हवाला दिया. इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा के वकील से कहा कि वह अपनी दलीलों को दीवानी विवाद मामले तक ही सीमित रखें. वहीं मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश अधिवक्ता राजीव धवन से सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत किसी की दलीलों को छोटा नहीं करना चाहते, अदालत की गरिमा बनाए रखें
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नाराज मौलाना सलमान नदवी अयोध्या समझौते से अलग हुए, जानिये क्या है कारण...
- Thursday February 15, 2018
अयोध्या में राम मंदिर बनाने की वकालत कर रहे मौलाना सलमान नदवी ने समझौते के बदले रकम लेने के इल्जाम के बाद सुलह से हाथ खीच लिए हैं. अब उनका कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे. श्री श्री रविशंकर के एक करीबी अमरनाथ मिश्रा ने इल्जाम लगाया था कि मौलाना ने सुलह के बदले 5000 करोड़ रुपये मांगे थे.
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अयोध्या विवाद मामले की सुनवाई आज से नियमित रूप से सुप्रीम कोर्ट में शुरू हो चुकी है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि 1934 से पहले मुसलमान वहां नियमित रूप से नमाज पढ़ते थे, हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था . वहीं निर्मोही अखाड़ा की ओर से कहा गया कि 1934 से 1949 तक मुसलमान विवादित ढांचे में जुमे की नमाज अदा करते थे. निर्मोही अखाड़ा के वकील ने भूमि विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के निष्कर्षों का हवाला दिया. इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा के वकील से कहा कि वह अपनी दलीलों को दीवानी विवाद मामले तक ही सीमित रखें. वहीं मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश अधिवक्ता राजीव धवन से सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत किसी की दलीलों को छोटा नहीं करना चाहते, अदालत की गरिमा बनाए रखें
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