
Facebook के स्वामित्व वाले इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp ने बुधवार यानी आज इस बात की घोषणा की है कि कंपनी नए प्राइवेसी सेटिंग को रोल आउट कर रही है। आप लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि इसकी मदद से यूज़र तय कर पाएंगे कि कौन उन्हें WhatsApp ग्रुप में जोड़ सकता है। इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp में ग्रुप के लिए इनवाइट सिस्टम को भी जोड़ा गया है। लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) से पहले यह नया अपडेट बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा क्योंकि राजनीतिक पार्टियां आम जनता को प्रभावित करने के लिए इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स और सोशल मीडिया नेटवर्क का इस्तेमाल करती हैं।
WhatsApp ने बुधवार को प्रेस नोट में कहा कि नए प्राइवेसी सेटिंग और इनवाइट सिस्टम आने के बाद यूज़र को मिलने वाले ग्रुप मैसेज पर उनका अधिक कंट्रोल रहेगा। अगर आप खुद को नए ग्रुप में ज्वाइन होने से सीमित रखना चाहते हैं तो इसके लिए विशेष प्राइवेसी सेटिंग हैं, सबसे पहले व्हाट्सऐप के सेटिंग मेन्यू में जाएं और फिर Account > Privacy > Groups में जाना होगा। यहां आपको तीन विकल्प दिखेंगे- Nobody, मॉय कॉन्टैक्ट और एवरीवन।

WhatsApp यूज़र तय करेंगे कि कौन जोड़ सकता है ग्रुप में
Nobody विकल्प चुनने का मतलब है कि ग्रुप एडमिन यदि किसी यूज़र को WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनाना चाहते हैं तो उन्हें इनविटेशन भेजना होगा। इसके बाद आप पर निर्भर करता है कि आप इनविटेशन को अप्रूव करना चाहते हैं या नहीं। दूसरा विकल्प है My Contacts। इसमें यूज़र के कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौज़ूद यूज़र ही आपको ग्रुप का हिस्सा बना पाएंगे। तीसरा विकल्प है “Everyone”। इसमें कोई भी व्हाट्सऐप यूज़र आपको ग्रुप का हिस्सा बना सकेगा।
अगर आपने Nobody विकल्प का चुनाव किया है तो एडमिन जो आपको ग्रुप में इनवाइट करना चाहता है वह इंडीविजुअल चैट के जरिए प्राइवेट इनवाइट सेंड करेगा। या कह लीजिए कि नोबड़ी विकल्प सेट होने की स्थिति में यूजर को पहले इनविटेशन प्राप्त होगा। मैसेज प्राप्त होने के तीन दिनों बाद प्राइवेट इनवाइट एक्सपायर हो जाएगा। याद करा दें कि कुछ समय पहले व्हाट्सऐप एंड्रॉयड और आईफोन के लिए नया प्राइवेसी सेटिंग और इनवाइट सिस्टम को बीटा वर्जन में देखा गया था।
लेकिन अब व्हाट्सऐप ने इस बात से पर्दा उठा दिया है कि आज से कुछ यूज़र के लिए इसे रोल आउट कर दिया गया है और आने वाले समय में यह फीचर ग्लोबली उपलब्ध होगा। नए चेंज का अनुभव करने के लिए आपके फोन में WhatsApp का लेटेस्ट वर्जन होना चाहिए। इस सप्ताह के शुरुआत में व्हाट्सऐप (WhatsApp) ने भारत में "Checkpoint Tipline" को जोड़ा था। इसकी मदद से यूज़र इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप पर मिलने वाली जानकारी की प्रामाणिकता को चेक कर सकते हैं।
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