विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) के अध्यक्ष सर क्रेग रीडी ने कहा है कि डोपिंग के दोषी पाए गए खिलाड़ियों को आजीवन प्रतिबंधित कर देना वैध नहीं है।समाचार चैनल बीबीसी ने रीडी के हवाले से कहा है कि डोपिंग का दोषी पाए जाने वाले खिलाड़ियों को दी जाने वाली सजा में आनुपातिक संतुलन होना चाहिए।
गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले जमैका के रिकॉर्डधारी फर्राटा धावक असाफा पावेल की सजा को घटाकर छह महीने कर दिया गया, जिसके कारण मंगलवार को उनके प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का रास्ता साफ हो गया।
रीडी ने कहा, "मैं पहले से ही कह रहा था कि आजीवन प्रतिबंधित किए जाने को चुनौती दी जा सकती है, तथा यह हमेशा कानून में बना नहीं रह सकता। चार वर्ष के प्रतिबंध को न्यायालय में साबित किया जा सकता है, तथा इससे किसी खिलाड़ी को एक ओलिम्पिक से वंचित रखा जा सकता है।"
पिछले वर्ष नवंबर में वाडा के अध्यक्ष चुने गए रीडी ने कहा, "जानबूझकर प्रतिबंधित पदार्थों का सेवन करने वाले खिलाड़ियों की संख्या ज्यादा नहीं है। कई बार इसमें खिलाड़ी के अलावा अन्य लोग संलिप्त रहते हैं, जैसे कोच, दोस्त, मैनेजर या एजेंट।"
दूसरी ओर डोपिंग के दोषी पाए जाने वाले खिलाड़ियों पर आजीवन प्रतिबंद लगाए जाने के हिमायती पूर्व ओलिम्पिक पदक विजेता जेमी बोल्ख का मानना है कि डोपिंग के लिए तय मौजूदा सजाएं काफी नर्म हैं।
बोल्ख ने कहा, "ऐसे लोगों को आजीवन प्रतिबंधित कर देना चाहिए। ऐसे लोगों की वजह से स्पर्धा के वास्तविक नायक प्रतियोगिता वाले दिन वह ख्याति हासिल नहीं कर पाते जिसके वह हकदार होते हैं।"
गौरतलब है कि विश्व चैम्पियनशिप-1997 में चार गुणा 400 मीटर रीले में अमेरिका के एंटोनियो पेटीग्रू के डोपिंग का आरोप स्वीकार किए जाने के बाद बोल्ख को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया था।
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