- मोहम्मद शाहिद का 56 वर्ष की आयु में गुड़गांव के अस्पताल में निधन
- मॉस्को ओलिम्पिक में भारतीय टीम को स्वर्ण पदक जितवाने में भूमिका
- 1986 में उन्हें पद्मश्री से नवाज़ा गया था
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नई दिल्ली:
'80 के दशक के हॉकी सुपरस्टार और 'ड्रिब्लिंग के बादशाह' कहे जाने वाले मोहम्मद शाहिद का 56 वर्ष की आयु में बुधवार को गुड़गांव के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया है। मोहम्मद शाहिद लिवर की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे।
अंतिम क्षणों में वेन्टिलेटर पर चल रहे मोहम्मद शाहिद ने बुधवार पूर्वाह्न 10:45 बजे अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए वाराणसी ले जाया जाएगा।
वाराणसी के निवासी मोहम्मद शाहिद देश की ओर से हॉकी खेलने वालों में बेहतरीन 'ड्रिब्लर' के रूप में याद किए जाते हैं, और वर्ष 1980 के मॉस्को ओलिम्पिक में भारतीय टीम के स्वर्ण पदक जीतने में उनकी महती भूमिका रही थी। गौरतलब है कि उसके बाद भारतीय टीम कभी ओलिम्पिक में स्वर्ण पदक नहीं जीत पाई है।

मोहम्मद शाहिद को जून में गुड़गांव के इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जब उनकी हालत काफी गंभीर हो गई थी। उन्हें लिवर की समस्याओं के चलते पेट में दर्द की शिकायत थी।
रेलवे में स्पोर्ट्स ऑफिसर के पद पर कार्यरत मोहम्मद शाहिद को वर्ष 1986 में देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाज़ा गया था। खेल के दौरान गेंद पर अपने बेजोड़ नियंत्रण के लिए मशहूर शाहिद को ज़फ़र इकबाल के साथ उनकी शानदार जोड़ी के लिए भी याद किया जाता है, जिन्होंने भारतीय टीम को वर्ष 1982 और 1986 में एशियाई खेलों में भी पदक दिलाए थे।
अंतिम क्षणों में वेन्टिलेटर पर चल रहे मोहम्मद शाहिद ने बुधवार पूर्वाह्न 10:45 बजे अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए वाराणसी ले जाया जाएगा।
वाराणसी के निवासी मोहम्मद शाहिद देश की ओर से हॉकी खेलने वालों में बेहतरीन 'ड्रिब्लर' के रूप में याद किए जाते हैं, और वर्ष 1980 के मॉस्को ओलिम्पिक में भारतीय टीम के स्वर्ण पदक जीतने में उनकी महती भूमिका रही थी। गौरतलब है कि उसके बाद भारतीय टीम कभी ओलिम्पिक में स्वर्ण पदक नहीं जीत पाई है।

मोहम्मद शाहिद को जून में गुड़गांव के इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जब उनकी हालत काफी गंभीर हो गई थी। उन्हें लिवर की समस्याओं के चलते पेट में दर्द की शिकायत थी।
रेलवे में स्पोर्ट्स ऑफिसर के पद पर कार्यरत मोहम्मद शाहिद को वर्ष 1986 में देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाज़ा गया था। खेल के दौरान गेंद पर अपने बेजोड़ नियंत्रण के लिए मशहूर शाहिद को ज़फ़र इकबाल के साथ उनकी शानदार जोड़ी के लिए भी याद किया जाता है, जिन्होंने भारतीय टीम को वर्ष 1982 और 1986 में एशियाई खेलों में भी पदक दिलाए थे।
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