राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा से बनने वाली अतिरिक्त बिजली अब व्यर्थ नहीं जाएगी. विद्युत वितरण निगमों ने दिन में बनने वाली अतिरिक्त सौर बिजली को बैटरी में संग्रहित कर रात के समय आपूर्ति करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसके तहत जयपुर, अजमेर और जोधपुर डिस्कॉम के 172 ग्रिड सब-स्टेशनों (जीएसएस) पर मेगा बैटरी बैंक लगाए जाएंगे.
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर होगा प्रोजेक्ट
परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर लागू किया जाएगा. दिन में सौर ऊर्जा से बनने वाली अतिरिक्त बिजली को बैटरी बैंक में संग्रहित किया जाएगा और शाम व रात के समय बिजली की मांग बढ़ने पर इसी बिजली की आपूर्ति की जाएगी. पहले चरण में जोधपुर डिस्कॉम के करीब 150, जयपुर डिस्कॉम के 12 और अजमेर डिस्कॉम के 10 जीएसएस को शामिल किया गया है. इनमें जोधपुर, सीकर, झुंझुनूं, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, जयपुर और उदयपुर के शहरी जीएसएस को प्राथमिकता दी गई है.
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3 शर्तें भी हैं शामिल
बैटरी बैंक और नियंत्रण इकाई लगाने के लिए जीएसएस के पास कम से कम 15 वर्ग मीटर खाली और सुरक्षित जगह होना जरूरी होगा. संबंधित फर्म के साथ 10 वर्ष का समझौता किया जाएगा. वहीं, ऐसे जीएसएस को तकनीकी प्राथमिकता दी जाएगी, जहां रूफटॉप और वाणिज्यिक सौर संयंत्रों का संकेंद्रण अधिक है.
जीएसएस का सर्वे पूरा
परियोजना के लिए अगस्त के पहले पखवाड़े में चयनित जीएसएस का सर्वे कराया जा चुका है. अब सर्वे के आधार पर परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, पायलट प्रोजेक्ट के सफल रहने पर इसे प्रदेश के अन्य जीएसएस तक भी विस्तार दिया जा सकता है. इससे फायदा यह होगा कि दिन में उपलब्ध अतिरिक्त सौर बिजली को संग्रहित कर शाम और रात में इस्तेमाल किया जा सकेगा. इससे सौर ऊर्जा का बेहतर उपयोग होगा और बिजली आपूर्ति के प्रबंधन में भी मदद मिलेगी.
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