मुंबई:
23 फरवरी की सुबह शिवसेना भवन पर कई सारे रंग लेकर आई. बीएमसी चुनाव के नतीजों के रुझान सुबह से शिवसेना के हक़ में जा रहे थे. जिस तेज़ी से शिवसेना को बढ़त मिल रही थी पार्टी के प्रमुख नेताओं और शिवसैनिकों को पूरा भरोसा था कि जीत उन्हीं की होगी और वो भी सीटों के बड़े अन्तर से जीत होगी. मतगणना की शुरुआत से ही बड़ी संख्या में शिवसैनिक मुंबई में दादर स्थित शिवसेना भवन पहुंच गए.
उत्साही शिवसैनिक पूरी तैयारी के साथ पहुंचे. सेना भवन शिवसैनिकों से खचाखच भर गया. पटाखों की लड़ियां छूटने लगीं, ढोल बजाए जाने लगे, एक-दूसरे को लड्डू खिलाकर मुंह मीठा करवाया गया. नाचते-गाते शिवसैनिक शिवसेना, उद्धव ठाकरे और बालासाहब ठाकरे के जयघोष के नारे लगाने लगे.

लेकिन जैसे-जैसे वक़्त बीतता गया, चुनावी नतीजों ने पलटी खाई और शिवसेना से पीछे चल रही भाजपा शिवसेना को कड़ी टक्कर देती नज़र आई. नतीजों के इस बदलाव ने सेनाभवन के बाहर का माहौल भी बदल डाला. अब तक नाच गा रहे शिवसैनिकों में निराशा दिखाई देने लगी. शिवसेना भाजपा से आगे ज़रूर थी, लेकिन बहुत कम सीटों के अंतर से. शिवसेना भवन के बाहर मानो सन्नाटा सा छा गया. जहां अब तक जीत का जश्न था, वहां असमंजस के बादल छा गए. और लंबी शान्ति के बाद जब शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे सेना भवन पहुंचे तब एक बार फ़िर कुछ देर के लिए जश्न का माहौल बना, लेकिन उनके जाते ही हालात फ़िर पहले जैसे हो गए.

शिवसेना नेताओं के रुख़ में बदलाव...
मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजों में आए बदलाव ने नेताओं के रुख़ भी बदल डाले, खासकर शिवसेना नेताओं के. नतीजों के शुरुआती रुझान में शिवसेना बड़े अंतर से भाजपा से आगे चल रही थी, ऐसे में जीत का जश्न जायज़ था. शिवसैनिकों के साथ शिवसेना के मुख्य नेता भी शिवसेना भवन पहुंचने लगे. शुरुआती रुझानों के वक़्त जब शिवसेना के प्रमुख नेता अनिल देसाई से बात की गई तो उन्होंने बताया कि शिवसेना भाजपा से हाथ नहीं मिलाएगी. शिवसेना के एक और प्रमुख नेता और परिवहन मंत्री दिवाकर राउते ने भाजपा के साथ गठबंधन की संभावना से ना तो इंकार किया और न ही इकरार किया.
जैसे-जैसे चुनावी नतीजे शिवसेना से ज़्यादा भाजपा के हक़ में जाने लगे, वैसे-वैसे शिवसेना नेताओं में भी निराशा की लहर दिखाई दी.
उत्साही शिवसैनिक पूरी तैयारी के साथ पहुंचे. सेना भवन शिवसैनिकों से खचाखच भर गया. पटाखों की लड़ियां छूटने लगीं, ढोल बजाए जाने लगे, एक-दूसरे को लड्डू खिलाकर मुंह मीठा करवाया गया. नाचते-गाते शिवसैनिक शिवसेना, उद्धव ठाकरे और बालासाहब ठाकरे के जयघोष के नारे लगाने लगे.

लेकिन जैसे-जैसे वक़्त बीतता गया, चुनावी नतीजों ने पलटी खाई और शिवसेना से पीछे चल रही भाजपा शिवसेना को कड़ी टक्कर देती नज़र आई. नतीजों के इस बदलाव ने सेनाभवन के बाहर का माहौल भी बदल डाला. अब तक नाच गा रहे शिवसैनिकों में निराशा दिखाई देने लगी. शिवसेना भाजपा से आगे ज़रूर थी, लेकिन बहुत कम सीटों के अंतर से. शिवसेना भवन के बाहर मानो सन्नाटा सा छा गया. जहां अब तक जीत का जश्न था, वहां असमंजस के बादल छा गए. और लंबी शान्ति के बाद जब शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे सेना भवन पहुंचे तब एक बार फ़िर कुछ देर के लिए जश्न का माहौल बना, लेकिन उनके जाते ही हालात फ़िर पहले जैसे हो गए.

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मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजों में आए बदलाव ने नेताओं के रुख़ भी बदल डाले, खासकर शिवसेना नेताओं के. नतीजों के शुरुआती रुझान में शिवसेना बड़े अंतर से भाजपा से आगे चल रही थी, ऐसे में जीत का जश्न जायज़ था. शिवसैनिकों के साथ शिवसेना के मुख्य नेता भी शिवसेना भवन पहुंचने लगे. शुरुआती रुझानों के वक़्त जब शिवसेना के प्रमुख नेता अनिल देसाई से बात की गई तो उन्होंने बताया कि शिवसेना भाजपा से हाथ नहीं मिलाएगी. शिवसेना के एक और प्रमुख नेता और परिवहन मंत्री दिवाकर राउते ने भाजपा के साथ गठबंधन की संभावना से ना तो इंकार किया और न ही इकरार किया.
जैसे-जैसे चुनावी नतीजे शिवसेना से ज़्यादा भाजपा के हक़ में जाने लगे, वैसे-वैसे शिवसेना नेताओं में भी निराशा की लहर दिखाई दी.
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