पिता सरदार बारेला का कहना है मेरे पास बैल खरीदने के पैसे नहीं है....
- किसान का कहना है कि उसके पास बैल खरीदने के पैसे नहीं
- सीहोर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का गृह ज़िला है
- दोनों बेटियों को पैसों की कमी से पढ़ाई छोड़नी पड़ी
भोपाल:
मध्यप्रदेश के सीहोर ज़िले में खेत में एक किसान द्वारा बैल की जगह बेटियों से जुताई करवाने की तस्वीरें सामने आई हैं. किसान का कहना है कि उसके पास बैल खरीदने के पैसे नहीं हैं. सीहोर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का गृह ज़िला है.
सीहोर ज़िले के नसरूल्लागंज तहसील में बसंतपुर पांगरी में सरदार बारेल, बैल की जगह दो बेटियों से खेत की जुताई कराते दिख रहे हैं. एक नजर में ये तस्वीरें खिंचवाई गई लगती हैं, लेकिन इसके पीछे खींची हकीकत से कोई इनकार नहीं कर सकता जो किसानों की दुर्दशा, लगातार सरकारी-सामाजिक उपेक्षा से खींच दी गई हैं. जहां किसान के लिए बैल खरीदना-ट्रैक्टर जुगाड़ने बहुत महंगा सौदा है. सरदार बारेला का कहना है मेरे पास बैल खरीदने के पैसे नहीं है, मक्के में डोर के लिये मैं ये कर रहा हूं, मेरी दोनों बेटियों को पैसों की कमी से पढ़ाई छोड़नी पड़ी, वो आठवीं तक पढ़ी हैं.
तस्वीरें मीडिया में आने के बाद प्रशासन भी जागा. डीपीआरओ आशीष शर्मा ने कहा प्रशासन मामले को देख रहा है, हम नियमों के तहत किसान की मदद करेंगे. वहीं विपक्ष ने इस मामले में सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, कांग्रेस के प्रवक्ता के के मिश्रा ने मुख्यमंत्री को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा ये मुख्यमंत्री का क्षेत्र है, ये बहुत शर्मनाक तस्वीरें हैं, उन्हें दोबारा सोचना चाहिए सरकार किसानों की दुर्दशा को कैसे दूर किया जाए.
वहीं बीजेपी नेता आलोक संजर ने सरकार का बचाव करते हुए कहा मैं किसान से अपील करता हूं वो सरपंच से बात करें. हम हरसंभव मदद पहुंचाने की कोशिश करेंगे. जो संबंधित अधिकारी हैं वो फौरन इस मामले में संज्ञान लें. हमारे मुख्यमंत्री किसानों के प्रति बहुत संवेदनशील हैं. मध्यप्रदेश में किसानों के आंदोलन के बाद से अबतक 51 किसान खुदकुशी कर चुके हैं, सबसे ज्यादा 11 मुख्यमंत्री के गृहज़िले सीहोर में. सबने कर्ज को वजह बताया है, हालांकि सरकार अब तक नहीं मानती की किसानों ने कर्ज की वजह से जान दी है.
सीहोर ज़िले के नसरूल्लागंज तहसील में बसंतपुर पांगरी में सरदार बारेल, बैल की जगह दो बेटियों से खेत की जुताई कराते दिख रहे हैं. एक नजर में ये तस्वीरें खिंचवाई गई लगती हैं, लेकिन इसके पीछे खींची हकीकत से कोई इनकार नहीं कर सकता जो किसानों की दुर्दशा, लगातार सरकारी-सामाजिक उपेक्षा से खींच दी गई हैं. जहां किसान के लिए बैल खरीदना-ट्रैक्टर जुगाड़ने बहुत महंगा सौदा है. सरदार बारेला का कहना है मेरे पास बैल खरीदने के पैसे नहीं है, मक्के में डोर के लिये मैं ये कर रहा हूं, मेरी दोनों बेटियों को पैसों की कमी से पढ़ाई छोड़नी पड़ी, वो आठवीं तक पढ़ी हैं.
तस्वीरें मीडिया में आने के बाद प्रशासन भी जागा. डीपीआरओ आशीष शर्मा ने कहा प्रशासन मामले को देख रहा है, हम नियमों के तहत किसान की मदद करेंगे. वहीं विपक्ष ने इस मामले में सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, कांग्रेस के प्रवक्ता के के मिश्रा ने मुख्यमंत्री को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा ये मुख्यमंत्री का क्षेत्र है, ये बहुत शर्मनाक तस्वीरें हैं, उन्हें दोबारा सोचना चाहिए सरकार किसानों की दुर्दशा को कैसे दूर किया जाए.
वहीं बीजेपी नेता आलोक संजर ने सरकार का बचाव करते हुए कहा मैं किसान से अपील करता हूं वो सरपंच से बात करें. हम हरसंभव मदद पहुंचाने की कोशिश करेंगे. जो संबंधित अधिकारी हैं वो फौरन इस मामले में संज्ञान लें. हमारे मुख्यमंत्री किसानों के प्रति बहुत संवेदनशील हैं. मध्यप्रदेश में किसानों के आंदोलन के बाद से अबतक 51 किसान खुदकुशी कर चुके हैं, सबसे ज्यादा 11 मुख्यमंत्री के गृहज़िले सीहोर में. सबने कर्ज को वजह बताया है, हालांकि सरकार अब तक नहीं मानती की किसानों ने कर्ज की वजह से जान दी है.
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अनुराग द्वारी
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