- महाराष्ट्र में अक्टूबर के मौसम में भीषण गर्मी का दौर जारी है. मानसून के बाद तापमान में बढ़ गया है
- मौसम विभाग ने मुंबई और रायगढ़ जिलों के लिए लू और हीटवेव का येलो अलर्ट जारी किया है
- गर्मी की वजह से किसानों की फसल सूख गई है, मोसंबी की फसल बर्बाद हो गई है
महाराष्ट्र अक्टूबर के मौसम में गर्मी से जल रहा है. अक्टूबर-नवंबर का मौसम आमतौर पर सर्दी आने का संकेत देने लगता है. इस मौसम में सुबह और शाम थोड़ी ठंडक महसूस होने लगती है लेकिन महाराष्ट्र से गर्मी जा ही नहीं रही. मानसून की विदाई होते ही हीट और लू का अलर्ट मौसम विभाग ने जारी कर दिया है. मौसम इतना ज्यादा गर्म है कि बाग-बगीचे सूख रहे हैं. पेड़ों पर लगे फलों का रस भी गर्मी ने पूरी तरह से चूस लिया है. पेड़ों पर लगे फल गर्मी से झुलस गए हैं. मई-जून की गर्मी वाला हाल अक्टूबर के बदलते मौसम में देखने को मिल रहा है.
बारिश का सीजन खत्म, जब झुलसाएगी गर्मी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, पुणे के मुताबिक, महाराष्ट्र से दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक वापसी हो चुकी है. इसके साथ ही राज्य में बारिश का सीजन पूरी तरह खत्म हो गया है. अब अक्टूबर हीट का असर तेज होने की संभावना है तापमान में अचानक हुई बढ़ोतरी को देखते हुए मुंबई और रायगढ़ जिलों के लिए लू और हीटवेव का येलो अलर्ट जारी किया गया है.

मुंबई और रायगढ़ में लू का अलर्ट जारी
मौसम वैज्ञानिक, डॉ. एसडी. सानप ने ठाणे और पालघर जिलों में बहुत ज्यादा उमस और चिपचिपी गर्मी का अनुमान जताया जा रहा है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अक्टूबर में दोपहर के समय धूप बहुत तेज रहेगी. जिससे लोगों को तीखी लू और तेज गर्मी के थपेड़े झेलने पड़ सकते हैं. मौसम में आए इस बदलाव और भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन और विशेषज्ञों ने नागरिकों को पर्याप्त पानी पीने और सीधी धूप से बचने की सलाह दी है.
गर्मी से मोसंबी के बगीचे सूख गए
पानी की कमी की वजह से से मोसंबी के बगीचे सूख गए हैं. देखने से लग रहा है कि जैसे गर्मी और उमस ने उनका पूरा रस चूस लिया है. महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में जल संकट का असर बागवानी पर गंभीर रूप से दिखने लगा है. पानी की भारी कमी के कारण कई क्षेत्रों में मोसंबी के हरे-भरे बगीचे पूरी तरह सूखकर नष्ट हो गए हैं. किसानों के इस बड़े नुकसान का जायजा लेने के लिए एक विशेष जांच दल ने प्रभावित खेतों का दौरा किया.जांच दल ने मौके पर पहुंचकर फसलों के नुकसान का मुआयना किया, ताकि प्रभावित किसानों के लिए राहत और मुआवजे की दिशा में आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की जा सके.
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