प्रतीकात्मक फोटो
- महीने भर के अंदर तीसरी घटना
- पैरोल पर छूटकर आया था शख्स
- तीन घटनाओं में तीन की हो चुकी है मौत
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मुंबई:
मुंबई में महाराष्ट्र का मंत्रालय खुदकुशी का अड्डा बनता जा रहा है. महीने भर में 2 लोग यहां पर आत्महत्या कर चुके हैं जबकि एक को आत्मदाह के ठीक पहले पकड़कर उसकी कोशिश नाकाम की जा चुकी है. राज्य सरकार जहां इससे सकते में है वहीं विपक्ष इसे जनता को न्याय देने में सरकार की नाकामी बताने में जुटा है. बता दें कि गुरुवार शाम 6 बजे के करीब हर्षल रावते नाम के युवक ने मंत्रालय की 5 वी मंजिल से कूदकर खुदकुशी कर ली. मुंबई के चेम्बूर में रहने वाला हर्षल अपनी ही साली की हत्या के दोष में उम्रकैद की सजा काट रहा था. जेल के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बीके उपाध्याय के मुताबिक हर्षल राज्य की पैठण जेल में अपनी सजा काट रहा था और हाल ही में पैरोल पर छूट कर आया था.
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में सात माह में 580 किसानों ने की खुदकुशी : सरकारी रिपोर्ट
8 फरवरी को ही उसकी पैरोल खत्म हो रही थी. माना जा रहा है कि मंत्रालय में वह अपनी सजा कम कराने के उद्देश्य से आया था लेकिन नियमों के मुताबिक अभी उसे माफी नहीं दी जा सकती थी. इसलिए निराश होकर उसने वहीं पर कूदकर जान दे दी. इस घटना की खबर मिलते ही शाम को मंत्रालय में कूदकर खुदकुशी से हड़कंप मच गया. मंत्री और विपक्षी नेता भी तुरंत मौके पर पहुंच गये और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति शुरू हो गई. गौरतलब है कि एक दिन पहले ही मंत्रालय के सामने अविनाश शेट्टे नाम के युवक ने खुदकुशी करने की कोशिश की थी. शेट्टे शरीर पर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगाने ही जा रहा था कि पुलिस ने उस पकड़ लिया था. शेट्ट एमपीएससी परीक्षा में फेल होने से दुखी था.
वीडियो : मंत्रालय में जहर पी लिया था किसान ने
इससे पहले 22 जनवरी को धुले ज़िले से आये 84 साल के किसान धर्मा पाटिल ने मंत्रालय में ज़हर पी लिया था. 6 दिन बाद अस्पताल में धर्मा पाटिल की मौत हो गई थी. उनके बेटे ने न्याय ना मिलने तक पिता का शव लेने से इनकार कर दिया था. मुद्दा एक परियोजना के लिए ली गई जमीन की कीमत में भेदभाव के आरोप का था. राज्य सरकार को जांच का लिखित आश्वासन देना पड़ा तब जाकर धर्मा पाटिल का अंतिम संस्कार हो पाया था.
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8 फरवरी को ही उसकी पैरोल खत्म हो रही थी. माना जा रहा है कि मंत्रालय में वह अपनी सजा कम कराने के उद्देश्य से आया था लेकिन नियमों के मुताबिक अभी उसे माफी नहीं दी जा सकती थी. इसलिए निराश होकर उसने वहीं पर कूदकर जान दे दी. इस घटना की खबर मिलते ही शाम को मंत्रालय में कूदकर खुदकुशी से हड़कंप मच गया. मंत्री और विपक्षी नेता भी तुरंत मौके पर पहुंच गये और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति शुरू हो गई. गौरतलब है कि एक दिन पहले ही मंत्रालय के सामने अविनाश शेट्टे नाम के युवक ने खुदकुशी करने की कोशिश की थी. शेट्टे शरीर पर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगाने ही जा रहा था कि पुलिस ने उस पकड़ लिया था. शेट्ट एमपीएससी परीक्षा में फेल होने से दुखी था.
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इससे पहले 22 जनवरी को धुले ज़िले से आये 84 साल के किसान धर्मा पाटिल ने मंत्रालय में ज़हर पी लिया था. 6 दिन बाद अस्पताल में धर्मा पाटिल की मौत हो गई थी. उनके बेटे ने न्याय ना मिलने तक पिता का शव लेने से इनकार कर दिया था. मुद्दा एक परियोजना के लिए ली गई जमीन की कीमत में भेदभाव के आरोप का था. राज्य सरकार को जांच का लिखित आश्वासन देना पड़ा तब जाकर धर्मा पाटिल का अंतिम संस्कार हो पाया था.
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